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नई दिल्ली : केंद्र सरकार जल्द कर सकती है उच्च शिक्षा आयोग का गठन, जानिए क्या होंगे बदलाव

Sat, 13 Nov 2021 04:04 PM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: सुभाष कुमार Updated Sat, 13 Nov 2021 04:04 PM IST
सार

नई दिल्ली : देशभर में उच्च शिक्षा के लिए वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), तकनीकी शिक्षा, शिक्षक शिक्षा, कौशल विकास से संबंधित शिक्षा परिषद समेत कुल 14 नियामक काम कर रहे हैं।

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Central government may soon constitute Higher Education Commission, know what will be the changes
नई शिक्षा नीति 2020 में भी उच्च शिक्षा आयोग के गठन की सिफारिश की गई थी। - फोटो : Social Media

विस्तार

देश में नई शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद उच्च शिक्षा को भी एक ही नियामक (रेग्यूलेटर) के अंतर्गत लाने के लिए कोशिशें तेज हो गई हैं। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जल्द ही उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) का गठन किया जा सकता है। खबरों के अनुसार इस कार्य को लेकर सभी सरकारी प्रक्रिया पूरी हो गई है। नई शिक्षा नीति 2020 में भी इस आयोग के गठन की सिफारिश की गई थी। इसके बाद से ही आयोग के गठन के कयास लगाए जाने लगे थे। 

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वर्तमान में 14 नियामक
देशभर में उच्च शिक्षा के लिए वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), तकनीकी शिक्षा, शिक्षक शिक्षा, कौशल विकास से संबंधित शिक्षा परिषद समेत कुल 14 नियामक काम कर रहे हैं। इस कारण विश्वविद्यालय और संस्थानों को अपने यहां संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों के लिए बारी-बारी से सभी नियामकों के पास दाना पड़ता है। साथ ही सभी के अनुसार विभिन्न तरह के नियमों का पालन करना पड़ता है। उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) का गठन कर के इन सभी को एक ही नियामक के अंतर्गत लाने की योजना है। इससे पहले सरकार ने वर्ष 2018 में भी इस मसौदे पर तेजी से काम शुरू किया था, लेकिन यह पूरा नहीं हो पाया। 
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नई शिक्षा नीति के तहत मेडिकल एवं कानून की पढ़ाई छोड़कर उच्च शिक्षा के लिए उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) का गठन किया जाएगा। एचईसीआई के चार स्वतंत्र अंग होंगे, इनमें राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा नियामकीय परिषद (एनएचईआरसी), मानक निर्धारण के लिए सामान्य शिक्षा परिषद (जीईसी), वित पोषण के लिए उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद (एचईजीसी) और मान्यता के लिए राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (एनएसी/NAC) होगा।
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शीतकालीन सत्र में पेश हो सकता है विधेयक
खबरों के अनुसार इस बार संसद के शीतकालीन सत्र में उच्च शिक्षा आयोग के गठन को लेकर विधेयक को भी पेश किया जा सकता है। आयोग के गठन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। संसद का शीतकालीन सत्र इस बार 29 नवंबर 2021 से शुरू किया जा रहा है। उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) के नियम सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों मेें लागू होंगे। वैज्ञानिक व सामाजिक अनुसंधानों को भी नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाकर बढ़ावा दिया जाएगा।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी की थी चर्चा
इससे पहले जुलाई महीने में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी यह बात साफ की थी कि सरकार उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) के गठन के लिए विधेयक का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है। लोकसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए प्रधान ने कहा था कि शिक्षा मंत्रालय ने कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त करने के बाद 29 जुलाई, 2020 को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की घोषणा की थी। मंत्रालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अलग-अलग कार्यों को करने के लिए चार स्वतंत्र वर्टिकल- विनियमन, मान्यता, वित्त पोषण, और अकादमिक मानक सेटिंग के साथ एकमात्र निकाय के रूप में भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना का प्रयास कर रहा है।  

इन तीन संस्थाओं का होगा विलय
उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) अपनी स्थापना के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) जैसे तीन स्वायत्त निकायों की जगह लेने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मेडिकल और कानूनी शिक्षा को छोड़कर, उच्च शिक्षा के लिए उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) को ही एकमात्र निकाय के रूप में स्थापित करने की सिफारिश की गई है।


जानिए उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) के गठन की खास बातें

1. नियामक देश भर में नए संस्थान स्थापित करेगा जहां पर छात्र-छात्राओं को अच्छी क्वालिटी की गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा मिलेगी। 
2. नियामक शोध और पढ़ाई के नए मानक तय करेगा। 
3. नियामक प्रत्येक वर्ष सभी विश्वविद्यालयों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के प्रदर्शन का भी अध्य्यन करेगा। 
4. यूजीसी में प्रत्येक पाठ्यक्रमों के लिए बनी अलग-अलग कमेटी (एचईसीआई) के दायरे में आ जाएंगी।  
5. अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा न देने पर नियामक संबंधित संस्थान में छात्रों के एडमीशन पर रोक भी लगा सकेगा। 
6. इस नियामक में 10 लोगों की नियुक्ति की जाएगी। इसमें शिक्षा जगत के नामी व्यक्ति को चेयरमैन, दो उप चेयरपर्सन, तीन सदस्य जो कि आईआईटी/आईआईएम/आईआईएससी में पांच साल तक निदेशक रहे और तीन सदस्य ऐसे जो कि किसी राष्ट्रीय या राज्यों के विश्वविद्यालय में कुलपति रहे हों।

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