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Hindi News ›   Education ›   CBSE to celebrate 25th National Reading Day virtually

जानिए क्या है राष्ट्रीय पठन दिवस? 19 जून को क्यों मनाया जाता है?

Fri, 19 Jun 2020 05:44 PM IST
ललित फुलारा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Fri, 19 Jun 2020 05:44 PM IST
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CBSE to celebrate 25th National Reading Day virtually
books - फोटो : books

भारत में आज यानी कि 19 जून को राष्ट्रीय पठन दिवस का 19वां संस्करण मनाया जा रहा है। इस दिवस को देश में पुस्तकालय आंदोलन के जनक के सम्मान के तौर पर मनाया जाता है। इस साल कोरोना वायरस की वजह से पैदा हुई स्थिति के कारण रीडिंग मंथ समारोह की शुरुआत ऑनलाइन मोड में हुई है। हर साल रीडिंग मंथ 19 जून से लेकर 18 जुलाई तक मनाया जाता है। दरअसल, 19 जून को ही भारत में पुस्तकालय आंदोलन के जनक पीएन पैनिकर की पुण्यतिथि होती है। इसी वजह से एक महीने तक रीडिंग मंथ मनाया जाता है।

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कौन थे पीएन पैनिकर? 
पीएन पैनिकर भारत में पुस्तकालय आंदोलन के जनक थे। वह शिक्षक और समाजसेवक थे जिन्होंने केरल में पुस्तकालय आंदोलन की शुरुआत की थी। उनको केरल में पुस्तकालय आंदोलन का पिता कहा जाता है। पीएन पैनिकर ने अपने गृह नगर में एक अध्यापक के तौर पर 1926 में सदानाधर्मम पुस्तकालय की शुरुआत की थी। 
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पीएन पैनिकर 1 मार्च 1909 में पैदा हुए और 19 जून 1995 में उनकी मृत्यु हुई। उनका जन्म केरल के नीलमपरूर में गोविंदा पिल्लई और जानकी अम्मा के घर हुआ। एक शिक्षक के तौर पर समाज में उनका गहरा प्रभाव रहा। 1945 में 47 ग्रामीण पुस्तकालयों के साथ तिरुविथामकूर ग्रंथशाला संघम की स्थापना हुई जिसका नेतृत्व पैनिकर ने ही किया। इस संगठन का नारा 'पढ़ो और बढ़ो' था। पैनिकर ने गांव-गांव की यात्रा के जरिए लोगों को पढ़ने का महत्व बताया और शिक्षा के प्रति जागरुक किया। 1975 में ग्रंथशाला को 'कृपसकय अवॉर्ड' से नवाजा गया। पैनिकर 32 सालों तक इस संगठन के  सक्रटरी रहे।

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