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बिना परीक्षा पास: छात्रों के मूल्यांकन के लिए मानदंड बनाने की तैयारी में जुटा सीबीएसई

Mon, 19 Apr 2021 05:39 AM IST
Jeet Kumar रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Mon, 19 Apr 2021 05:39 AM IST
सार

  • बच्चों के प्रदर्शन के आधार पर होना है मूल्यांकन, फिलहाल क्राइटेरिया तय नहीं
  • बोर्ड ने स्कूलों से मांगा ब्यौरा, कितनी परीक्षाएं ऑफलाइन या ऑनलाइन ली

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CBSE is preparing to make the criteria for evaluation of students
CBSE Board - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए दसवीं की परीक्षाएं रद्द कर चुका है। बच्चे दसवीं से ग्यारवीं में अपने प्रदर्शन के आधार पर ही जाएंगे लेकिन इसको लेकर अभी क्राइटेरिया तय नहीं हुआ है।

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इस बीच बोर्ड ने स्कूलों से यह ब्यौरा मांगना शुरू किया है कि उन्होंने दसवीं में कितनी परीक्षाएं ऑफलाइन या ऑनलाइन आयोजित की है। दरअसल बोर्ड ने मूल्यांकन के लिए क्राइटेरिया बनाने की तैयारी शुरु कर दी है। ऐसे में स्कूलों का कहना है कि बोर्ड को मूल्यांकन के लिए ऐसा क्राइटेरिया बनाना चाहिए जिसमें प्री-बोर्ड, मिडटर्म, प्रैक्टिकल परीक्षा, इंटरनल असेसमेंट शामिल हो।
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माउंट आबू स्कूल की प्रिंसिपल ज्योति अरोड़ा ने कहा कि जब जनवरी में दसवीं-बारहवीं के लिए स्कूल खोले गए, उसके बाद स्कूलों में मिड टर्म, प्री-बोर्ड, प्रैक्टिकल, पीरियोडिक टेस्ट हुए हैं। सब स्कूलों में एक-एक प्री-बोर्ड तो निश्चित तौर पर हुआ होगा।
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ऐसे में बोर्ड दसवीं का रिजल्ट निकालने के लिए इन्हीं परीक्षाओं के प्रदर्शन को देखें। वह कहती हैं कि जब दसवीं में सतत तथा व्यापक मूल्यांकन (सीसीई स्कीम) लागू थी तब भी बच्चों का मूल्यांकन उनके विभिन्न प्रदर्शन के आधार पर होता था। स्थिति ऐसी है कि बच्चों की परीक्षा ली नहीं जा सकती। ऐसे में क्राइटेरिया बनाते समय स्कूलों के प्रदर्शन को ध्यान में रखना चाहिए।

चूंकि ग्यारवीं में बच्चों को स्ट्रीम उनके प्रदर्शन के आधार पर ही आवंटित की जाती है। लिहाजा यह जरूरी है। एसआर कैपिटल पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल एस.के यादव कहती हैं कि  परीक्षा रद्द हो गई है, ऐसे में स्कूल में बच्चे के प्रदर्शन के आधार पर ही ग्यारवीं मे भेजा जा सकता है। हालांकि वह कहती हैं कि यह बच्चों के लिए मुश्किल होगा क्योंकि कोई स्कूल ज्यादा अंक देगा तो कोई कम। स्कूल जो नंबर देगा उसकी विश्वसनीयता क्या होगी। किसी को ज्यादा अंक मिलेंगे तो किसी को कम।

वहीं कुछ स्कूलों का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई के कारण कई बच्चों के प्री-बोर्ड अच्छे नहीं हुए। इस कारण यदि प्री-बोर्ड के प्रदर्शन को भी मूल्यांकन का आधार बनाया जाएगा तो बच्चों को दिक्कत होगी।

सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा रद्द होने पर उठने लगी मांग
कोरोना महामारी के कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं की परीक्षाएं रद्द हो चुकी हैं। बोर्ड की ओर से परीक्षा शुल्क केरुप में दसवीं के विद्यार्थियों से 1500 से 1800 रुपये शुल्क लिया गया था।

ऐसे में अब यह मांग उठने लगी है कि बोर्ड विद्यार्थियों से लिए गए इस शुल्क को वापस करे। कोरोना महामारी के दौर में कई विद्यार्थियों के अभिभावकों ने यह शुल्क काफी कठिनाई से दिया था। वहीं कई विद्यार्थियों का शुल्क ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन ने एकत्र कर बोर्ड को दिया था।

विद्यार्थियों को बिना लेट फीस के साथ पांच विषयों के लिए 1500 रुपये का भुगतान करना था। जबकि दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों के एससी-एसटी छात्रों को पांच विषयों केलिए 1200 रुपये का भुगतान करना था।

अतिरिक्त विषय के लिए प्रति विषय 300 रुपये शुल्क था। लेट फीस के साथ विद्यार्थियों को दो हजार रुपये का शुल्क चुकाना था। ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन ने सीबीएसई से यह शुल्क वापस किए जाने की मांग की है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि अब जब दसवीं की परीक्षा रद्द हो गई हैं, तो परीक्षा शुल्क वापस किया जाना चाहिए। बोर्ड को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि कोरोना महामारी के दौर में अभिभावकों ने किस मुश्किल से इस राशि का इंतजाम किया था। खासकर सरकारी स्कूल में पढने वाले विद्यार्थी आर्थिंक तंगी से जूझ रहे होते हैं।


उन्होंने बताया कई ऐसे भी अभिभावक रहें जिन्होंने उधार लेकर इस फीस का भुगतान किया था। वहीं एसोसिएशन ने भी दसवीं-बारहवीं के विद्यार्थियों के लिए लगभग आठ लाख रुपये की राशि एकत्र की थी, जिससे कि उनके परीक्षा शुल्क का भुगतान किया जा सके।

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