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CBSE ने पांच गुना घटा दी फीस, फिर भी क्यों हो रहा है हंगामा, कोर्ट तक पहुंचा मामला

Fri, 06 Sep 2019 06:32 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Fri, 06 Sep 2019 06:32 PM IST
सार

  • सीबीएसई द्वारा फीस घटाने के बाद भी नाराज हैं पैरेंट्स
  • बोर्ड और मानव संसाधन विकास विभाग को भेजा नोटिस

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CBSE Decreased fees to 1000 from 5000 for class 9 and 11, But Parents to sue board in High court

विस्तार

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) एक बार फिर विवादों में है। इस बार फीस घटाने के बाद भी पैरेंट्स बोर्ड से नाराज हैं। नाराजगी इस हद तक है कि यह मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। सीबीएसई और मानव संसाधन विकास विभाग (MHRD) को लीगल नोटिस तक भेजा जा चुका है।

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क्या है मामला?

दरअसल, बोर्ड ने कुछ दिनों पहले (18 जुलाई को) एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें स्कूल बदलने के नियमों का उल्लेख किया गया था। अलग-अलग कुल 11 श्रेणियां बना कर हर श्रेणी के नियम के बारे में बताया गया था। इसमें से 11वीं श्रेणी के अंतर्गत किसी दूसरे स्कूल में कक्षा 9वीं या 11वीं में प्रोसेसिंग फीस के तौर पर प्रति स्टूडेंट 5 हजार रुपये फीस भरने के प्रावधान का उल्लेख किया गया था।

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जब इस पर हंगामा हुआ, तो बोर्ड ने अब दोबारा एक नया नोटिस जारी किया है। इसमें बोर्ड ने कहा है कि पुराने सर्कुलर में प्रोसेसिंग फीस 5 हजार गलती से प्रकाशित हो गई थी। असल में पैरेंट्स को सिर्फ एक हजार रुपये प्रति स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन फीस देनी होगी। यह फीस स्कूल को तब देनी होगी जब क्लास में 40 स्टूडेंट्स के नामांकन की सीमा पूरी हो चुकी हो।

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फीस घटाने के बाद भी क्यों कोर्ट पहुंचा मामला

हालांकि पैरेंट्स सीबीएसई द्वारा एडमिशन के लिए रजिस्ट्रेशन फीस को एक हजार रुपये तक करने से भी नाराज हैं। इसके लिए पैरेंट्स एसोसिएशन बोर्ड के इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दे रहा है। कोर्ट में 9 सितंबर को बोर्ड के फैसले को चुनौती दी जाएगी। 


पैरेंट्स का कहना है कि यह लोगों की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ऑल इंडिया पैरेंट एसोसिएशन के प्रमुख अशोक अग्रवाल ने कहा, 'यह केवल निजी स्कूलों की बात नहीं है। कई सरकारी स्कूल में सीबीएसई से संबद्ध हैं। इन स्कूलों में ज्यादातर ऐसे बच्चे भी पढ़ते हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। जिनके पैरेंट्स इतनी फीस देने में अमसर्थ हैं। जब इनकी शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है तो इन्हें फीस क्यों देनी पड़े।'

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यह सवाल तब उठा जब दिल्ली के द्वारका स्थित सर्वोदय विद्यालय के एक स्टूडेंट ने वहां के प्राचार्य से फीस देने में असर्थता की बात कही। स्कूल ने उसे चेतावनी दी कि यह बोर्ड का फैसला है। अगर बोर्ड इसे वापस नहीं लेता है, तो उसे फीस भरनी होगी या स्कूल छोड़ना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, वह स्टूडेंट स्कूल के बाद खुद मजदूरी भी करता है। उसका कहना है कि स्कूल में ऐसे करीब 200 बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई इस कारण छूट सकती है।

एक शिक्षक का कहना है कि कई स्टूडेंट अपने शिक्षकों की मदद से फीस भर रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए प्रोसेसिंग फीस भरने की अंतिम तारीख 30 सितंबर है। लेकिन अब तक आधे से ज्यादा स्टूडेंट ये फीस भर पाने में अमसर्थ हैं।

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