{"_id":"5ee60b2b8ebc3e430c40a65c","slug":"cbse-cisce-exams-2020-parents-want-exams-scrapped","type":"story","status":"publish","title_hn":"CBSE, CISCE परीक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित, सुप्रिम कोर्ट में दायर की याचिका","category":{"title":"Education","title_hn":"शिक्षा","slug":"education"}}
CBSE, CISCE परीक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित, सुप्रिम कोर्ट में दायर की याचिका
Sun, 14 Jun 2020 05:23 PM IST
Garima Garg
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
Published by: Garima Garg
Updated Sun, 14 Jun 2020 05:23 PM IST
विज्ञापन
Exams 2020
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना महामारी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में अधिकांश माता-पिता का कहना है कि वे कक्षा 10वीं और 12वीं की शेष परीक्षाओं को लेकर चिंता में हैं। बता दें कि CBSE और CICSE द्वारा लंबित बोर्ड परीक्षा 1 जुलाई से आयोजित की जाएंगी। अभिभावका बोर्ड से मांग कर रहे हैं कि वे परीक्षा को रोक दें और परिणाम आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर दिए जाएं। यानी छात्रों के पुराने प्रदर्शन के आधार पर अंक दिए जाएं।
कुछ माता-पिता ने इसके लिए ऑनलाइन कैंपेन "studentlivesmatter", "livesoverexams" और "cancelboardexams" शुरू किया है और इनके माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की है, जिसमें बोर्ड परीक्षा को रद्द करने का आग्रह किया गया है।
एक अभिभावक ने अपनी चिंता प्रकट करते हुए कहा कि हमारे बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि कक्षा में एक भी बच्चा संक्रमित हुआ तो वो उस कक्षा में सभी बच्चों को संक्रमित कर सकता है। एक ही कमरे में 4 घंटे तक रहने से कोरोना के फैलने का डर ज्यादा है।
विज्ञापन
कक्षा 10वीं की छात्रा की मां रोहिणी भूमिहार, ने कहा कि क्या होगा अगर वहां स्थिति बिगड़ती है तो? बच्चे परीक्षा की तैयारी करते हैं और आखिरी मिनट पर परीक्षा रद्द हो जाती है ऐसे में हमारे बच्चों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या होगा?
देश की स्थिति में सुधार नहीं है इसलिए पंजाब, तेलंगाना और तमिलनाडु ने इस साल अपने छात्रों के लिए कक्षा 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी हैं।
12वीं कक्षा के छात्रों के माता-पिता द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सीबीएसई को निर्देश दिया गया है कि वह पहले से आयोजित परीक्षणों के आधार पर परिणाम घोषित करें और शेष विषयों के आंतरिक मूल्यांकन अंकों के आधार पर गणना करें।
इसी के साथ माता-पिता ने यह भी कहा है कि जब सीबीएसई ने विदेश में स्थित लगभग 250 स्कूलों के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है और अन्य मानदंडों को अपनाया है तो वे इसी तरह अपने देश में क्यों नहीं कर सकते।
विज्ञापन
कुछ माता-पिता ने इसके लिए ऑनलाइन कैंपेन "studentlivesmatter", "livesoverexams" और "cancelboardexams" शुरू किया है और इनके माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की है, जिसमें बोर्ड परीक्षा को रद्द करने का आग्रह किया गया है।
विज्ञापन
एक अभिभावक ने अपनी चिंता प्रकट करते हुए कहा कि हमारे बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि कक्षा में एक भी बच्चा संक्रमित हुआ तो वो उस कक्षा में सभी बच्चों को संक्रमित कर सकता है। एक ही कमरे में 4 घंटे तक रहने से कोरोना के फैलने का डर ज्यादा है।
विज्ञापन
कक्षा 10वीं की छात्रा की मां रोहिणी भूमिहार, ने कहा कि क्या होगा अगर वहां स्थिति बिगड़ती है तो? बच्चे परीक्षा की तैयारी करते हैं और आखिरी मिनट पर परीक्षा रद्द हो जाती है ऐसे में हमारे बच्चों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव क्या होगा?
देश की स्थिति में सुधार नहीं है इसलिए पंजाब, तेलंगाना और तमिलनाडु ने इस साल अपने छात्रों के लिए कक्षा 10वीं की परीक्षा रद्द कर दी हैं।
12वीं कक्षा के छात्रों के माता-पिता द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सीबीएसई को निर्देश दिया गया है कि वह पहले से आयोजित परीक्षणों के आधार पर परिणाम घोषित करें और शेष विषयों के आंतरिक मूल्यांकन अंकों के आधार पर गणना करें।
इसी के साथ माता-पिता ने यह भी कहा है कि जब सीबीएसई ने विदेश में स्थित लगभग 250 स्कूलों के लिए कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है और अन्य मानदंडों को अपनाया है तो वे इसी तरह अपने देश में क्यों नहीं कर सकते।
कमेंट
कमेंट X