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Safalta Talks : AI - ML का सही इस्तेमाल हर किसी के लिए फायदेमंद : सौरभ

Tue, 03 Sep 2024 02:05 PM IST
Pushpendra Mishra Media Solution Initiative
Media Solution Initiative Published by: Pushpendra Mishra Updated Tue, 03 Sep 2024 02:05 PM IST
सार

विषय : आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग की ताकत

अतिथि वक्ता : सौरभ सिसोदिया सिंह, प्रिंसिपल सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, एस्पायर

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Safalta Talks: Proper use of AI-ML is beneficial for everyone: Saurabh-safalta
The Power of AI and ML - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सफलता.कॉम द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग की ताकत विषय पर आयोजित मास्टर क्लास सेशन में अतिथि वक्ता व एस्पायर कंपनी में प्रिंसिपल सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट, सौरभ सिसोदिया सिंह ने कहा कि एआई और एमएल दोनों नाम एक जैसे लगते हैं। ये चीजें एक सीरीज में हैं। चैट जीपीटी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का सिर्फ एक पार्ट है। जैसे हम देखेंगे तो सबसे पहले आता है डेटा माइनिंग, डेटा को एक जगह स्टोर करने के बाद उसे व्यवस्थित करना होता है। उसका एनालिसिस करके एक मतलब निकालना होता है। तो जो सबसे बड़ी छतरी है वो डेटा माइनिंग की है। उसी के अंदर सब आते हैं। क्योंकि डेटा माइनिंग के कोर्स के अंदर आपको एआई और एमएल पढ़ाया जाता है। डेटा माइनिंग के बाद दूसरे लेवल पर आती है मशीन लर्निंग, इसमें आपने मशीन में डेटा डाल दिया है। अब मशीन खुद ही समझ रहा है कि मैं इस डेटा का क्या करूं। यानी डेटा का जो एक एक्सपर्ट सिस्टम है वो एमएल है।

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एआई दो भाग में बंटा हुआ है
 

अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में भी दो तरह की चीजें होती हैं। एक है डीप लर्निंग और दूसरी है कन्वेंशनल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस। कन्वेंशनल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को शेयर बाजार में लोग सालों से इस्तेमाल कर रहे हैं। जैसे मशीन में पिछले 10 साल के प्राइज को डालकर उससे आज के प्राइज को प्रिडिक्ट कराया जाए। वहीं डीप लर्निंग जैसे इमेज रिकग्निशन करते हैं। इसमें क्या होता है कि हम डेटा दे देते हैं और सिस्टम उसमें से पैटर्न निकाल लेता है। एक फोटो देंगे तो हम बतायेंगे इस क्षेत्र में बिल्ली है। जैसे 1000 फोटो आपने डाले तो उसमें बिल्ली की फोटो को वो पहचान लेना।

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चैट जीपीटी को जनरेटिव एआई कहते हैं। जैसे आपने इमेज को जनरेट किया। या किसी और वस्तु के फोटो को चैट जीपीटी से जनरेट करने के लिए कहा। मेटा ने गामा निकाला हुआ है। जैसे आपने एआई को कोई चीज बोली जनरेट करने के लिए तो उसे वह पहले एनालाइज करेगा उसके बाद एक सीरीज में उसके पार्ट को जोड़कर आपको रिस्पांस दे देगा। मैट्रिक्स मल्टिप्लिकेशन पर ये सारा आधारित होता है।

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स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई ने किया है बहुत अच्छा काम
 

एआई का स्वास्थ्य क्षेत्र में अच्छा खासा प्रभाव देखने को मिल रहा है जैसे किसी मरीज में कई सिम्टम्स हैं। लेकिन बीमारी कुछ ही पता चल पाई लेकिन आजकल एआई सभी बीमारी डिटेक्ट कर रहा है। आजकल कैमरे अच्छे हो गए हैं इमेज से पढ़ने में सझम है। आजकल डिजिटल इमेज, एक्सरे को डॉक्टर डिटेक्ट करते थे। आज कम्प्यूटर सब डिटेक्ट कर ले रहा है। यानी 10 साल पहले भी लोगों को पता चल जा रहा है कि उन्हें एक दशक बाद दिल की बीमारी हो सकती है, कैंसर हो सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में ये आपका समय बहुत बचा रहा है। पढ़ाई करते समय भी आपको किताब में एक सीमित जानकारी मिलती है। वहीं चैट जीपीटी पर ये पूरे गूगल पर मौजूद 3.5 बिलियन डेटा की समरी निकाल कर आपको दे देगा।

 

आईओटी चीजें कंट्रोल करने में आ रही काम
 

वहीं इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) एक चीज होती है जिसमें हम अलग - अलग जगह पर सेंसर लगा के एक ही जगह बैठकर कई चीजें मैनेज कर सकते हैं। जैसे ऑफिस में बैठे - बैठे घर का पंखा, एसी, फ्रीजर बंद कर देना आदि। वहीं एआई से ऑटो सेक्टर में काफी बदलाव हुआ है। जैसे ड्राइवरलेस कार टेस्ला लांच कर चुका है।

 

एडास सिस्टम दुर्घटनाएं रोकने में सक्षम
 

वहीं दुनियां में कितने एक्सीडेंट हर साल होते हैं। जिनसे बचाने के लिए अब गाड़ियों में एडास सिस्टम आ रहा है। जो खतरा होने पर खुद से ब्रेक लगा देगा। क्योंकि कोहरे में अगर आप नहीं देख पा रहे लेकिन आपकी गाड़ी में इंफ्रा रेड कैमरा लगा है जिससे कोहरे के आर पार देखा जा सकता है तो वो डिटेक्ट कर रहा है पीछे और आगे से आने वाले गाड़ियों को।

 

एआई से आने वाले दशकों में नौकरियों पर पड़ेगा असर
 

एआई में प्रॉम्ट इंजीनियरिंग में मिल रहे नौकरियों पर युवाओं को बड़े पैकेज ऑफर किये जा रहे हैं। ऐसे युवा जो एआई सीखकर जॉब करने के इच्छुक हैं उन्हें प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग अवश्य सीख लेनी चाहिए। इसके अलावा एआई के आने से ये सच है कि आने वाले दशकों में लोगों के नौकरी पर असर पड़ेगा। लेकिन कंपनियां काम ज्यादा कर पाएंगी। जैसे कोई कंपनी एक ऑर्डर पूरा करने में अगर 5 महीने का समय लगाती है तो एक साल में वह 3 ऑर्डर ही पूरे कर पाएगी। लेकिन एआई के आने के बाद अब एक साल में 3 से 10 ऑर्डर भी पूरे किये जा सकते हैं। क्योंकि बड़ा हिस्सा इसमें ऑटोमेट होने वाला है।

 

इंटर्नशिप या ट्रेनिंग की जरूरत
 

जब आप नौकरी शुरू कर रहे हो। तो पैसे की चिंता न करें। सीखने पर आपका पूरा ध्यान रखें। थ्योरी जब आप पढ़ते हैं और रियल में जब आप प्रैक्टिकल करते हैं तो उसका अनुभव अलग होता है। एक्सपेरीमेंट करके आप रियल वर्ल्ड में कैसे काम होता है ये सीख सकते हैं।

 

जिंदगी जीने का आपका अपना हो एक तरीका
 

गूगल के सीईओ या फेसबुक के सीईओ क्या करते हैं आप भी वैसा करके सफल हो जाए ये मुश्किल है। इसलिए जिंदगी जीने का अपना एक अलग तरीका होना चाहिए। काम के प्रति हमेशा गंभीर रहो। तो कंपनी में कभी न कभी आपके काम को मान्यता मिलेगी। चीजें बहुत तेजी से बदल रही हैं। आपको पहले से ये तय करना होगा कि आने वाले सालों आपको क्या मदद कर सकता है। बदलते समय में खुद को बदल लेना ही बेहतर फैसला हो सकता है।

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