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डॉक्टर नहीं बन पाए तो भी करें मेडिकल का सपना पूरा
एजुकेशन डेस्क/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Oct 2014 09:48 AM IST
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मेडिकल की पढ़ाई का सपना था और सफलता नहीं मिली, तो निराश होने की बात नहीं है। मेडिकल क्षेत्र में ऐसे कई आप्सन हैं, जो इस सपने को पूरा कर सकते हैं। विज्ञान वर्ग से पढ़ाई करने के बाद आप इस क्षेत्र में कॅरियर बना सकते हैं।
बायाइंफॉर्मेटिक्स के क्षेत्र के बढ़ने से इस क्षेत्र में युवाओं की मांग बढ़ने लगी है। विज्ञान वर्ग के छात्र फार्माकोविजिलेंस बनकर डॉक्टर का फर्ज जरूर निभा सकते हैं।
दुनिया भर में दवाओं का कारोबार बढ़ता जा रहा है। फार्माकोविजिलेंस बनकर दवाइयों में होने वाले किसी भी प्रकार के साइडइफेक्ट की पहचान, आकलन, और बचाव के लिए मदद कर सकते हैं, जिससे कि दवाइयों को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सके।
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फार्माकोलॉजिकल का संबध दवाइयों की उपलब्धता, वितरण, इस्तेमाल और इससे जुड़ी समस्याओं से भी है। इसके साथ ही दवाइयों के साइडइफेक्ट को जानना भी जरूरी होता है। इस फील्ड से जुड़े लोगों को भारत केसाथ दुनिया भर में रोजगार के भरपूर अवसर हैं।
क्वालिफिकेशन
पचास फीसदी अंकों के साथ केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलोजी, बायोकेमिस्टी, माइक्रोबायोलॉजी, जेनेटिक्स और बायोटेक से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट या फार्मेसी और मेडिसिन में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है। सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स करके भी इस क्षेत्र में कॅरियर बनाया जा सकता है।
कहां मिलेगी नौकरी
फार्माकोविजिलेंस से संबंधित कोर्स करने के बाद ग्लैक्सी, सन फार्मा, फाइजर, सिप्ला, निकोलस, पिरामल जैसी फार्मास्युटिकल कंपिनयों में नौकरी मिल सकती है। कोर्स करने के बाद छात्र अच्छे पैकेज पर रखे जाते हैं। शुरूआत 15 से 20 हजार रुपये से हो सकती है लेकिन धीरे-धीरे प्रमोशन केसाथ कई और फायदे भी मिलते हैं।
संस्थान
• इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च, नई दिल्ली, बंगलूरू, अहमदाबाद, हैदराबाद
• आईसीबीआईओ क्लीनिकल रिसर्च, बंगलूरू
• एंपावर स्कूल ऑफ हेल्थ, दिल्ली
• आइडीडीसीआर, हैदराबाद
• जीआइटीएस एकेडमी, बंगलूरू
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बायाइंफॉर्मेटिक्स के क्षेत्र के बढ़ने से इस क्षेत्र में युवाओं की मांग बढ़ने लगी है। विज्ञान वर्ग के छात्र फार्माकोविजिलेंस बनकर डॉक्टर का फर्ज जरूर निभा सकते हैं।
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दुनिया भर में दवाओं का कारोबार बढ़ता जा रहा है। फार्माकोविजिलेंस बनकर दवाइयों में होने वाले किसी भी प्रकार के साइडइफेक्ट की पहचान, आकलन, और बचाव के लिए मदद कर सकते हैं, जिससे कि दवाइयों को ज्यादा सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सके।
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फार्माकोलॉजिकल का संबध दवाइयों की उपलब्धता, वितरण, इस्तेमाल और इससे जुड़ी समस्याओं से भी है। इसके साथ ही दवाइयों के साइडइफेक्ट को जानना भी जरूरी होता है। इस फील्ड से जुड़े लोगों को भारत केसाथ दुनिया भर में रोजगार के भरपूर अवसर हैं।
क्वालिफिकेशन
पचास फीसदी अंकों के साथ केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलोजी, बायोकेमिस्टी, माइक्रोबायोलॉजी, जेनेटिक्स और बायोटेक से ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट या फार्मेसी और मेडिसिन में ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट होना जरूरी है। सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स करके भी इस क्षेत्र में कॅरियर बनाया जा सकता है।
कहां मिलेगी नौकरी
फार्माकोविजिलेंस से संबंधित कोर्स करने के बाद ग्लैक्सी, सन फार्मा, फाइजर, सिप्ला, निकोलस, पिरामल जैसी फार्मास्युटिकल कंपिनयों में नौकरी मिल सकती है। कोर्स करने के बाद छात्र अच्छे पैकेज पर रखे जाते हैं। शुरूआत 15 से 20 हजार रुपये से हो सकती है लेकिन धीरे-धीरे प्रमोशन केसाथ कई और फायदे भी मिलते हैं।
संस्थान
• इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च, नई दिल्ली, बंगलूरू, अहमदाबाद, हैदराबाद
• आईसीबीआईओ क्लीनिकल रिसर्च, बंगलूरू
• एंपावर स्कूल ऑफ हेल्थ, दिल्ली
• आइडीडीसीआर, हैदराबाद
• जीआइटीएस एकेडमी, बंगलूरू
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