Safalta Talk Master Class : एक जीवन में किताबों के जरिये जी सकते हैं कई महान हस्तियों का जीवन : अरविंद जोशी
Master Class Session Guest : Arvind Joshi Founder Adgini
विस्तार
पॉवर ऑफ रीडिंग विषय पर सफलता डॉट कॉम द्वारा आयोजित किये गए मास्टर क्लास सेशन में Adgini के फाउंडर अरविंद जोशी ने कहा कि एक जीवन में कैसे आप एक ओलंपिक रनर, एक लेखक, एक पेंटर, मल्टीमिलेनियर एलन मस्क जीवन जी सकते हैं किताबों के जरिये। क्योंकि वास्तव में एक जीवन में कई जीवन जीना संभव नहीं है। जोशी ने छात्रों को कहा कि उनके घरों में महात्मा गांधी, जेएल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस या अमिताभ बच्चन तो पैदा नहीं हुए तो आपको ये कैसे पता चलेगा कि ये लोग दिक्कत में कैसे स्थिति संभालते थे। या सचिन तेंदुलकर बुरे वक्त में कैसे खुद को संभालते थे। ये सब जानकारी आप किताबों से जान सकते हैं।
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मानव सभ्यता की सबसे जादुई खोज हैं किताबें
दरअसल किताबें मानव सभ्यता की सबसे जादुई खोज है। किताब पर उन्होंने कहा कि किताब क्या है ? लकड़ी के लुगदे से बनी हुई एक सपाट आकृति, जिसपर इंसानों ने तय किया कि कुछ चिन्ह होंगे, उन चिन्हों के सुरों का कुछ मायना होगा। इन किताबों ने पूरी सभ्यता बदल दी। सिर्फ इन चिन्हों(निशानों) से एक व्यक्ति की आत्मा, भाव, सब कुछ किताब के अंदर बंध जाता है। जब आप सेल्फ में से किताब पढ़ने के लिए निकालते हैं। तो उसे निर्जीव न समझें, कभी जड़ वस्तु न समझें, किताबें जीवंत होती हैं। यानी आप जब सेल्फ से एक किताब निकाल रहे हैं तब ऐसा मानें कि आप एक व्यक्ति से मिल रहे हैं। यूं तो आप एक दिन में अपने परिवार, बाजार में दुकानदार, ऑफिस में सहकर्मी आदि से मिलते हैं। जिसमें दो तरह से मिलना होता है एक प्रकार में ये तय होता है कि आप जहां जा रहे हैं वहां किससे मिलेंगे। जैसे बाजार में, ऑफिस में, घर में। दूसरे प्रकार में ये तय नहीं होता कि किन किन से मुलाकात हो सकती है जैसे किसी शादी पार्टी में जाना और दोस्तों के दोस्तों से मुलाकात हो जाना। पार्टी में कुछ रोचक हो जाना जिसकी आपने कल्पना न की हो।
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अर्जुन और एकलव्य के उदाहरण से बताया किताब पढ़ने का महत्व
कई बार आप आप किताब केवल एक सूचना के लिये पढ़ते हैं। दूसरी वो किताबें हैं जिनसे संवाद एक अनजान मित्र या व्यक्ति से संवाद होता है। दोनों तरह के संवाद से आपको फायदा है। उन्होंने कहा कि जैसे आप अपना किसी फायदा नुकसान के लिए कोई मित्र नहीं बनाते हैं बल्कि जिसके साथ आपको रुचि हो उसे मित्र बनाते हैं। उसी तरह जिन किताबों से आपको रुचि है वो आपके साथ रह जाती हैं। उन्होंने एकलव्य और अर्जुन का उदाहरण दिया और कहा कि अर्जुन को किताबों की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके पास द्रोणाचार्य हैं। वो हमेशा उनके साथ रहेंगे जो अर्जुन को उनके जीवन में हर जरूरत पर उसे वो चीज देंगे। इसके अलावा ऐसी चीजें जो अर्जुन जानता भी नहीं है लेकिन उसे उसकी जरूरत होगी वो भी द्रोणाचार्य अर्जुन को देंगे। तो अर्जुन की किताब द्रोणाचार्य हैं। लेकिन एकलव्य के पास तो द्रोणाचार्य है नहीं। तो उसे किताबों की जरूरत पड़ेगी।
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90 के दशक के बाद लोगों में कम हो गया किताब पढ़ने का चलन, पाश्चात्य संस्कृति बनी वजह
उन्होंने कहा कि पुराने समय में जब हम बचपन में होते थे तो कॉमिक्स, कहानियां, पढ़ने की आदत होती थी। 60-70 के दशक में चाचा चौधरी, रोमांस नोवल हिंदी, इंद्रजाल सीरीज, अमर चित्रकथा जैसी कॉमिक्स होती थीं। कॉमिक्स में फोटो के साथ साथ लिखा होता है तो वो पढ़ने में मूवी जैसी लगती है। थोड़े बड़े यानी युवा होने पर जासूसी कहानियां, उपन्यास पढ़ने की आदत लगती थी। बच्चों के नोवल्स होते थे 3 इन्वेस्टीगेटर, हार्डी ब्वायज जैसे। उन्होंने कहा कि पॉपुलर किताबों का चलन 80 के दशक तक बहुत अच्छा चला। 90 के दशक में जब ग्लोबलाइजेशन हो गया। तब देश में पाश्चात्य संस्कृति का आगमन हुआ। एमटीवी, वी चैनल आ गए तो उसके बाद हिंदी पढ़ने में लोगों को झिझक होने लगी। इसकी वजह से जो पॉपुलर फिक्शन हिंदी में लिखा जाता था उसका चलन कम हो गया। जिसके बाद लोगों में पढ़ने की आदत कम होती रही।
रुचि से पढ़ी गई किताबें जिंदगी भर रहती हैं याद
अब सिर्फ मतलब से किताबें पढ़ी जा रही हैं। जैसे एग्जाम पास करने के लिए पढ़ी गई किताब जिससे आपको नॉलेज तो मिलती है लेकिन वो ट्राजेक्शनल होती है। उससे आपका मतलब खत्म होते ही आप अगली कक्षा में आगे बढ़ जाओगे। अरविंद ने कहा कि जो किताब आप ट्रांजेक्शनल वर्क के लिए उठाओगे वो लंबे समय तक आपसे नहीं जुड़ी रहेगी। बल्कि जो किताब आप रुचि से पढ़ोगे तो उससे सीखी आदत जीवन भर आपके साथ रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी सभ्यता से जुड़ना है तो उनका रहन सहन, खान पान, बोलचाल, कहानियां, साहित्य, संगीत आदि सब पता करना होता है तभी आप किसी सभ्यता से जुड़ सकते हैं। क्योंकि हम अपनी सभ्यता तो परिवार के वरिष्ठ सदस्यों दादा दादी, नाना नानी व मां-बाप से श्रुति और स्मृति से सीख लेते हैं, क्योंकि हमारी वाचक परंपरा रही है।
किताबों से आप सीख सकते हैं देश विदेश की संस्कृति, खान पान, रहन-सहन
लेकिन अगर आपको पाश्चात्य संस्कृति सीखनी है या कोई अन्य सभ्यता सीखनी है तो आप किताबें पढ़ सकते हैं। उनका संगीत सुन सकते हैं। जैज, रैंक, फंक, सोल कोई भी संगीत आप सुनकर सीख सकते हैं। धीरे धीरे आपको रुचि आने लगेगी। उन्होंने कहा कि इसी तरह किताब खोलने पर हो सकता है आपको पसंद न आये क्योंकि शुरूआत में हम सब चीजें अच्छी नहीं लगतीं। चाहे वो गणित हो, विज्ञान हो या अन्य कोई विषय हो। शुरूआत में कड़वा लग सकता है लेकिन लगातार अभ्यास से आपको रुचि आने लगेगी। जैसे आप जानना चाहते हैं कि न्यूयार्क या लंदन में नाश्ते में क्या खाते हैं। लोग विश्व में कैसे रहते हैं। उन्हें कौन सी चीज पसंद है। ये सब आपको कहानियों से पता चलेगा। स्टोरीज से आप सीख सकते हैं कि कैसे लोग रहते हैं और वो क्या महसूस करते हैं।
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