इंजीनियरिंग रिसर्च और साइंटिफिक रिसर्च कोर्स के बीच चयन में आप उलझे हैं तो यहां है समाधान
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ये सवाल पाठक निखिल का है। वे पूछते हैं, क्या आप मेरी इंजीनियरिंग रिसर्च और साइंटिफिक रिसर्च कोर्स के बीच चयन करने में मदद कर सकते हैं, क्या मैं दोनों क्षेत्रों में पीएचडी करने के योग्य हूं?
साइंटिस्ट पूछता है क्यों और जवाबों की खोज करने के लिए रिसर्च करता है, जबकि एक इंजीनियर पूछता है कैसे समस्या हल होगी और उसका क्या समाधान होगा। दूसरे शब्दों में साइंटिस्ट घटनाओं की जांच करते हैं, जबकि इंजीनियर उसका समाधान या बेहतर समाधान ढूंढते हैं। हालांकि इंजीनियरिंग और साइंस के बीच अक्सर एक अधिव्यापन कि स्थिति बनी रहती है।
अक्सर साइंटिस्ट इंजीनियर की खोज के व्यावहारिक अनुप्रयोग में अपनी योग्यता दिखाते हैं। इसके विपरीत वैज्ञानिक का आवरण मानते हुए तकनीकी विकास के दौरान इंजीनियर खुद नई घटनाओं की खोज करते हैं। उदाहरण के लिए संख्यात्मक अनुमानों का उपयोग कर नेवीयर स्टोक्स समीकरणों के लिए एक विमान पर वायुगतिकीय प्रवाह को हल करने का कार्य या किसी इंजीनियरिंग संरचना की थकान क्षति गणना करने के लिए मामूली नियम लागू करते हैं।
जबकि इंजीनियरिंग रिसर्च शायद साइंस के साथ ओवरलैप करें यह हमेशा एक या अधिक एप्लिकेशन को ध्यान में रख कर किया जाता है। भारत में टॉप तीस रिसर्च इंस्टीट्यूट में फिजिक्स या थेओरिटिकल कंप्यूटर साइंस एंड न्यूरोसाइंस में पीएचडी करने के लिए ज्वॉइंट एंट्रेंस इंजीनियरिंग टेस्ट (JEST) का आयोजन होता है।
वेबसाइटः www.jest.org.in
शैक्षणिक योग्यताः इंटीग्रेटेड पीएचडी- बीएससी इन मैथ्स एंड फिजिक्स
रेगुलर पीएचडी- एमएससी इन फिजिक्स एंड एप्लाइड फिजिक्स, बीटेक, बीई, एमई, एमटेक या चार वर्षीय बीएस, एमसीए भी कुछ इंस्टीट्यूट में रेगुलर पीएचडी कर सकते हैं। इन कोर्स में अंतिम वर्ष के छात्र भी ज्वॉइंट एंट्रेंस इंजीनियरिंग टेस्ट (JEST) के लिए आवेदन कर सकते हैं, जोकि आमतौर पर फरवरी में होता है।
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