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Hindi Diwas 2017: अब विश्व भी जान रहा 'हिंदी' की ताकत, पढ़ें और पढ़ाएं

Fri, 15 Sep 2017 11:27 AM IST
amarujala.com- Written by: पूर्णिमा आचार्य
amarujala.com- Written by: पूर्णिमा आचार्य Updated Fri, 15 Sep 2017 11:27 AM IST
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Hindi Diwas 2017 NOW WORLD KNOW THE POWER OF HINDI

हिंदी एक ऐसी भाषा है जो दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाती है। ये एक ऐसी भाषा है जो सभी लोगों को एक साथ जोड़कर रख सकती है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि हिंदी जैसे लिखी जाती है, वैसे बोली भी जाती है। दूसरी भाषाओं में कई अक्षर साइलेंट होते हैं और उनके उच्चारण भी लोग अलग-अलग करते हैं लेकिन हिंदी के साथ ऐसा नहीं होता। इसीलिए हिंदी को सरल भाषा भी कहा जाता है। हिंदी भाषा को कोई भी बहुत आसानी से सीख सकता है। इसी के चलते इसे देश की राष्ट्रभाषा का नाम दिया गया है।

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पूरब से पश्चिम या उत्तर से दक्षिण, देश के किसी कोने में चले जाइए, दो अलग-अलग भाषा के लोग जब एक दूसरे से बात करेंगे तो केवल हिंदी का ही प्रयोग करते मिलेंगे। अगर आप दक्षिण भारत के किसी इलाके में चले जाते हैं तो राजनीतिक रूप से हिंदी का विरोध करने के बावजूद भी वहां लोग धड़ल्ले से हिंदी बोलते नजर आते हैं। 
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हिंदी विश्व वाणी बनने के पथ पर अग्रसर

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हिंदी जल्द ही विश्व वाणी बनने के पथ पर अग्रसर है। विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्र अमेरिका भी हिंदी भाषा के महत्व को समझता है। तभी तो अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा कई अवसरों पर अमेरिकी नागरिको को हिंदी सीखने की सलाह देते थे। उनका कहना था कि भविष्य में हिंदी सीखे बिना कोई काम नहीं चलेगा। आज भारत उभरती हुई विश्व-शक्ति के रूप में पूरे विश्व में जाना जा रहा है। यहां संस्कृत और हिंदी भाषा को ध्वनि-विज्ञान और दूर संचारी तरंगों के माध्यम से अंतरिक्ष में अन्य सभ्यताओं को संदेश भेजे जाने के नजरिए से सर्वाधिक सही पाया गया है।

हिंदी भाषा के इतिहास की बात करें तो ये भाषा लगभग एक हजार साल पुरानी मानी जाती है। आज भी भारत में भले ही अंग्रेजी बोलना सम्मान की बात मानी जाती हो, पर विश्व के बहुसंख्यक देशों में अंग्रेजी का इतना महत्त्व नहीं है। 

बच्चे आसानी से अपनी मातृभाषा को ही ग्रहण कर पाते हैं

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आज भी भारत में अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों का एडमिशन ऐसे स्कूलों में करवाना चाहते हैं जो अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्रदान करते हैं। वहीं मनोवैज्ञानिकों के अनुसार शिशु सर्वाधिक आसानी से अपनी मातृभाषा को ही ग्रहण कर पाता है और मातृभाषा में किसी भी बात को भली-भांति समझ सकता है। अंग्रेजी भारतीयों की मातृभाषा नहीं है। अत: भारत में बच्चों की शिक्षा का सर्वाधिक उपयुक्त माध्यम हिंदी ही है।

हिंदी के अनेक रूप देश में आंचलिक या स्थानीय भाषाओं और बोलिओं के रूप में प्रचलित हैं। इस कारण भाषिक नियमों, क्रिया-कारक के रूपों, कहीं-कहीं शब्दों के अर्थों में अंतर स्वाभाविक है लेकिन हिंदी को वैज्ञानिक विषयों की अभिव्यक्ति में सक्षम विश्व भाषा बनाने के लिए इस अंतर को खत्म कर मानक रूप लेना होगा। 

तकनीकी विषयों में भी हिंदी मौजूद

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अंग्रेजी के नए शब्दकोशों में हिंदी के हजारों शब्द समाहित किए गए हैं लेकिन कई जगह उनके अर्थ, भावार्थ गलत हैं। तकनीकी विषयों और गतिविधियों को हिंदी भाषा के माध्यम से संचालित करने का सबसे बड़ा लाभ ये है कि उनकी पहुंच असंख्य लोगों तक हो सकेगी। हिंदी में तकनीकी शब्दों के विशिष्ट अर्थ सुनिश्चित करने की जरूरत है। तकनीकी विषयों के रचनाकारों को हिंदी का प्रामाणिक शब्द कोष और व्याकरण की पुस्तकें अपने साथ रखकर जब और जैसे समय मिले, पढ़ने की आदत डालनी होगी। 

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