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जीएलए यूनिवर्सिटी के भाई बहन पटल पर चमके
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Sat, 05 Mar 2016 10:05 AM IST
सार
- परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं
- देखा था बीटेक का सपना
- सगे भाई-बहन सुधीर और विनीता
- जीएलए ने दिलाया आईआईटी में प्रवेश
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जीएलए
- फोटो : GLA website
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विस्तार
मथुरा की जीएलए यूनिवर्सिटी अपने होनहार छात्र-छात्राओं के सपने पूरा करने में यकीन करती है। इसके लिए वे उनका पूरी तरह सहयोग भी देती है। इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं मथुरा के ही रहने वाले सगे भाई-बहन सुधीर और विनीता।
इन दोनों ने देश के नंबर वन इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी से साथ में बीटेक करने का सपना देखा था। दोनों की कड़ी मेहनत ने उन्हें आईआईटी रुड़की में दाखिला भी दिलवाया। लेकिन परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण वे अपने सपने को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
आगे की पढ़ाई के लिए पैसे न जुटा पाने पर सुधीर और विनीता तो जैसे हताश ही हो गए थे। ऐसे में जीएलए यूनिवर्सिटी इनकी मदद के लिए आगे आई। जीएलए के स्कॉलरशिप प्रोगाम के तहत इनकी पढ़ाई का खर्चा यूनिवर्सिटी ने उठाने का फैसला किया।
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आज सुधीर और विनीता बिना किसी चिंता के आईआईटी में पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों ने ही जीएलए का नाम रोशन किया है। ये जीएलए की मदद के बिना शायद मुमकिन नहीं होता। खुद सुधीर भी इस बात को मानते हैं।
सुधीर का कहना है कि उन्हें कहीं से मदद की उम्मीद नहीं थी लेकिन जब जीएलए ने हाथ बढ़ाया तो वे अपने साथ साथ अपने परिवार का भी सपना पूरा कर पाए। उन्हें यह सोच कर बहुत खुशी होती है कि वे आईआईटी का हिस्सा बन पाए।
विनीता भी जीएलए का धन्यवाद करते नहीं थकतीं। वे मानती हैं कि उनके आने वाले कल को सुधारने में जीएलए यूनिवर्सिटी का बहुत बड़ा हाथ है।
विनीता और सुधीर इकलौते ऐसे छात्र नहीं हैं। पहले भी जीएलए के ऐसे कई प्रतिभाशाली स्टूडेंट रहे हैं जिनकी अच्छी पढ़ाई के लिए जीएलए उनके साथ खड़ी रही। जीएलए बच्चों की पढ़ाई के साथ साथ उनके व्यक्तित्व को भी उभारती है।
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इन दोनों ने देश के नंबर वन इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी से साथ में बीटेक करने का सपना देखा था। दोनों की कड़ी मेहनत ने उन्हें आईआईटी रुड़की में दाखिला भी दिलवाया। लेकिन परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण वे अपने सपने को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
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आगे की पढ़ाई के लिए पैसे न जुटा पाने पर सुधीर और विनीता तो जैसे हताश ही हो गए थे। ऐसे में जीएलए यूनिवर्सिटी इनकी मदद के लिए आगे आई। जीएलए के स्कॉलरशिप प्रोगाम के तहत इनकी पढ़ाई का खर्चा यूनिवर्सिटी ने उठाने का फैसला किया।
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आज सुधीर और विनीता बिना किसी चिंता के आईआईटी में पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों ने ही जीएलए का नाम रोशन किया है। ये जीएलए की मदद के बिना शायद मुमकिन नहीं होता। खुद सुधीर भी इस बात को मानते हैं।
सुधीर का कहना है कि उन्हें कहीं से मदद की उम्मीद नहीं थी लेकिन जब जीएलए ने हाथ बढ़ाया तो वे अपने साथ साथ अपने परिवार का भी सपना पूरा कर पाए। उन्हें यह सोच कर बहुत खुशी होती है कि वे आईआईटी का हिस्सा बन पाए।
विनीता भी जीएलए का धन्यवाद करते नहीं थकतीं। वे मानती हैं कि उनके आने वाले कल को सुधारने में जीएलए यूनिवर्सिटी का बहुत बड़ा हाथ है।
विनीता और सुधीर इकलौते ऐसे छात्र नहीं हैं। पहले भी जीएलए के ऐसे कई प्रतिभाशाली स्टूडेंट रहे हैं जिनकी अच्छी पढ़ाई के लिए जीएलए उनके साथ खड़ी रही। जीएलए बच्चों की पढ़ाई के साथ साथ उनके व्यक्तित्व को भी उभारती है।
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