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Curiosity: उम्र, पेशा या सामाजिक भूमिका चाहे जो भी हो, नई चीजें जानने की चाह रखें जिंदा; यही है विकास की कुंजी

Sat, 03 Jan 2026 11:16 AM IST
शाहीन परवीन स्कॉट शिगेओका, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू
स्कॉट शिगेओका, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 03 Jan 2026 11:16 AM IST
सार

Lifelong Learning: तेजी से बदलती दुनिया में आगे बढ़ने के लिए जिज्ञासा सबसे बड़ी ताकत है। उम्र, पेशा या सामाजिक भूमिका चाहे जो भी हो, नई चीज़ें जानने की इच्छा बनाए रखना ही निरंतर सीखने और विकास का आधार है।

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Curiosity Fuels Growth: Keep the Desire to Learn Alive at Every Stage of Life
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

Life Inspiration: जब हम अपने आसपास किसी नई या अलग चीज को देखते हैं, तो मन स्वतः ही सवाल करने लगता है कि यह क्या है, ऐसा क्यों है, और इसके पीछे क्या कहानी है। यही सवाल पूछने की प्रवृत्ति जिज्ञासा कहलाती है, जो उम्र, पेशे या भूमिका से परे हर इन्सान के भीतर होती है।

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जिज्ञासा का दायरा केवल जानकारी पाने तक सीमित नहीं होता। यह हमें लोगों और परिस्थितियों को गहराई से समझने का अवसर देती है और उनकी सोच, अनुभव, संवेदनाओं और मूल्यों से जुड़ने का रास्ता खोलती है। ऐसी जिज्ञासु मानसिकता न सिर्फ सीखने और नवाचार को बढ़ावा देती है, बल्कि अनावश्यक मानसिक थकान और तनाव से भी बचाती है।

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खुद से सवाल करें

कई बार किसी बात का उत्तर न होना ही जिज्ञासा को और गहरा कर देता है। ऐसे में ‘मुझे नहीं पता’ कहना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। यह बौद्धिक विनम्रता को दर्शाता है, यानी यह स्वीकार करना कि हर सवाल का जवाब हमारे पास नहीं होता। जब हम यह मान लेते हैं, तो हमारा अहं कम होता है और दूसरों से सीखने की गुंजाइश बढ़ती है। हर बात जानने का दिखावा करने के बजाय यदि हम खुद से यह पूछें कि मैं इसे और बेहतर कैसे समझ सकता हूं, तो न केवल सहयोग की भावना बढ़ती है, बल्कि बेहतर समाधान भी सामने आते हैं।

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जानने की भावना

जब कोई व्यक्ति आपसे कोई नई या अलग बात साझा करता है और आप उससे कहते हैं, ‘इसके बारे में थोड़ा और बताइए’ तो यह साफ संकेत होता है कि आप सच में उसकी बात समझना चाहते हैं। ऐसी प्रतिक्रिया सामने वाले को सुना-समझा महसूस कराती है। इस तरह का संवाद न केवल आपसी तनाव को कम करता है, बल्कि नए विचारों और रचनात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है, जिससे बेहतर नतीजे सामने आते हैं।

अलग पृष्ठभूमि के लोगों से मिले

आमतौर पर हम सलाह उन्हीं लोगों से करते हैं, जिन्होंने जीवन में कुछ मुकाम हासिल किया हो या अपने क्षेत्र में अच्छा कर रहे हों, क्योंकि हमें लगता है कि वही सही दिशा दिखा पाएंगे। उनका अनुभव उपयोगी होता है, लेकिन वह अक्सर एक ही क्षेत्र तक सीमित रहता है। यदि आप अलग-अलग पृष्ठभूमि और क्षेत्रों के लोगों से बातचीत करते हैं, तो आपकी सोच में नई दृष्टि और विविधता आती है।

सीखने का तरीका जानें

हर व्यक्ति जानकारी हासिल करने और चीजों को समझने का अपना अलग तरीका रखता है। सबसे पहले यह पहचानना जरूरी है कि आप किस तरह सीखते और समझते हैं-सुनकर, देखकर, सवाल पूछकर या अनुभव से। जब यह स्पष्ट हो जाता है, तो आप सही लोगों से जुड़ पाते हैं और आपका नेटवर्क स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है। साथ ही, इसका असर पेशेवर जीवन के साथ निजी जीवन में भी बेहतर समझ बनाते हैं।

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