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कमिश्नर दीपक रावत ने हल्द्वानी में सफलता डिजिटल सेंटर का किया उद्घाटन, युवाओं को दिये जॉब एंड स्किलिंग टिप्स

Thu, 21 Sep 2023 10:24 PM IST
Pushpendra Mishra Media Solution Initiative
Media Solution Initiative Published by: Pushpendra Mishra Updated Thu, 21 Sep 2023 10:24 PM IST
सार

कहा, डिजिटल सेक्टर में हैं एंडलेस अपॉरचुनिटी

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Commissioner Deepak Rawat inaugurated Safalta's Center in Haldwani, gave job and skilling tips to the youth
IAS, Deepak Rawat At Safalta Haldwani Centre - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डिजिटल की ताकत बहुत बड़ी है, इसने हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। नौकरी पेशे के जो आयाम इसने खोले हैं वो पहले नहीं थे। भारत में ही डिजिटल सेक्टर में ढेरों अपॉरचुनिटी हैं। हम अभी कल्पना भी नहीं कर सकते कि कहां तक इसमें जा सकते हैं। अगर युवा इस बिंदु पर ध्यान देंगे तो निश्चित रूप से वह सफल होंगे। यह बात वीरवार(21 सितम्बर) को अमर उजाला के एडटेक वेंचर SAFALTA की हल्द्वानी शाखा के उद्घाटन के अवसर पर कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कही। इस अवसर पर सफलता के सीईओ व सह संस्थापक हिमांशु गौतम, हल्द्वानी सेंटर इंचार्ज पारस आर्या समेत कई गणमान्य मौजूद रहे। 
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हर सेक्टर में जॉब्स हो रहे मल्टीप्लाई 

इसके आगे कमिश्नर रावत ने कहा कि युवा आज सरकारी नौकरियों की ओर भाग रहे हैं आज के समय में सिर्फ सरकारी नौकरियां ही नहीं हैं, बल्कि हर सेक्टर में जॉब्स मल्टीप्लाई कर रहे हैं। यंग भारत को डिजिटली स्किल्ड कर रहे सफलता प्लेटफॉर्म पर उन्होंने कहा कि आज के समय में हर सरकारी जॉब का डिजिटल एक हिस्सा बन चुका है। स्किल्ड युवाओं को रोजगार के अवसरों को अलग नजरिये से देखना चाहिए। 

आज की तारीख में बहुत लोगों को हैं डिजिटल मार्केटिंग की आवश्यकताएं 

आज की तारीख में डिजिटल मार्केटिंग की आवश्यकताएं ही बहुत लोगों को हैं। हर क्षेत्र में जहां होटल्स हैं, शोरूम्स हैं, सैलून्स हैं उन्हें स्किल्ड युवाओं को डिजिटल मार्केटिंग की सेवाएं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्किल आजकल बच्चों के करिकुलम का पार्ट बन चुकी है। स्किल इंडिया के तहत भी आज बहुत सी स्कीम चल रही हैं। उसमें डिजिटली स्किल्ड युवाओं को इनरोल किया जा सकता है। इसके अलावा सरकार स्किलिंग के प्रोग्राम एनजीओ बेस पर भी चलाती है। ये एनजीओ गवरमेंट नहीं चलाती लेकिन गवर्नमेंट इन एजीओ को फंड करती है। हर जिले में रोजगार कार्यालय हैं, स्किल का एक अलग विभाग होता है। इन दोनों जगहों पर जाकर युवाओं को अपना पंजीकरण कराना चाहिए।
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कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की सफलता की कहानी 

इस दौरान कुमाऊं कमिश्नर ने अपनी सफलता की पूरी कहानी बताई जिसमें उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में मंसूरी में मेरा जन्म हुआ लेकिन मैं रहने वाला रुद्रप्रयाग का हूं जोकि एक छोटी जगह है। जहां कॅरिअर को लेकर बहुत कुछ था नहीं। लोग उत्तराखंड में सेना को लेकर बहुत जुनून से तैयारी करते हैं। हमारे साथी भी वही कर रहे थे। मेरे पैंरेंट चाहते थे कि देहरादून में जाकर कोचिंग कर ज्वाइन लूं। लेकिन मेरा दिल्ली जाकर पढ़ने का मन था। इस पर मेरा पैरेंट से झगड़ा भी हुआ मैंने कहा कि दिल्ली जाने दीजिये। दिल्ली आ गया। हंसराज कॉलेज से हिस्ट्री ऑनर्स में मैंने ग्रेजुएशन किया। फिर जेएनयू का एंट्रेंस दिया जेएनयू से इतिहास में एमए किया और एमफिल किया। जेएनयू से ही यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहले अटेम्प्ट में प्रीलिम्स हो गया लेकिन मेंस के रिजल्ट में इतिहास विषय में नंबर काफी कम आए। जोकि मेरा कोर विषय था। मैंने गंभीरता से उसे लिया। उसके बाद सिविल की परीक्षा पास की, और आईआरएस बना। कस्टम में काम करते हुए सिविल सेवा परीक्षा का मैंने आखिरी अटेम्प्ट दिया, और तब से उत्तराखंड कैडर में हूं।

यूपीएससी पास नहीं करते तो होते मीडिया कर्मी 

कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने कहा कि अगर मैं यूपीएससी पास नहीं कर पाता तो मीडिया सेक्टर में कॅरिअर बनाने को बी प्लान के तौर पर मैंने रखा था। लेकिन अब पब्लिक सर्विस में मुझे बहुत आनंद आ रहा है। मैं लोगों की शिकायतें दूर करने के लिए काम करता हूं।


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कमिश्रर रावत ने बयां की डिजिटल सेक्टर के उद्भव की कहानी 

उन्होंने डिजिटल के उद्भव पर लंबी बात की। उन्होंने कहा कि पहले पेजर का जमाना था, फिर टेलीफोन बूथ का चलन शुरू हुआ। उसी दौरान कम्प्यूटर कैफे का जमाना आया जहां इंटरनेट का इस्तेमाल काफी महंगा था। हमें एक-एक घंटे के हिसाब से पैसे देने होते थे। फिर मोबाइल फोन का आगमन हुआ। आईएएस दीपक रावत ने कहा कि इसके बाद से मैंने देश में दो रिवोल्यूशन डिजिटल सेक्टर में देखे। जिसमें एक इनकमिंग का फ्री और और दूसरा है डेटा का सस्ता होना। इसके बाद साल भर के पैकेज, महीने भर के पैकेज आये। इन्होंने डिजिटल सेक्टर में क्रांति लाने का काम किया। 
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शुरूआत में लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल दोस्त बनाने के लिए करते थे

जब लोगों के हाथ में टेक्नोलॉजी आयी तो लोग सोशल मीडिया का इतना इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। लोग शुरूआत में सिर्फ पुराने दोस्तों को ढूंढ़ना या टच में रहने का काम कर रहे थे। जब मैं देहरादून में रहा तब इंटरनेट पर आने वाली चीजों को मिलने वाले अच्छे रिस्पांस को देखते हुए मैंने सोशल मीडिया पर आने का फैसला किया। इसके बाद जब मैं हरिद्वार में डीएम बनके गया तब तक सोशल मीडिया की बहुत पहुंच बन गई थी। फिर मैंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना शुरू किया।

बच्चों के लिए समय निकालें अभिभावक, मोबाइल से रखें दूर 

उन्होंने बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने की नसीहत देते हुए कहा कि पहले अभिभावकों को मोबाइल के इस्तेमाल पर पाबंदी लगानी होगी। कई बार अभिभावक बच्चों को खुद ही मोबाइल इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं ताकि वह उन्हें तंग न करे। उन्होंने कहा कि बच्चों को मोबाइल के बजाय आउटडोर गेम्स पर ध्यान देना चाहिए। मोबाइल सशक्तिकरण का टूल जरूर है लेकिन ये ध्यान भटकाने का भी काम करता है। मेरी सभी  अभिभावक से गुजारिश है कि बच्चों के लिए समय जरूर निकालें।
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मोबाइल को जिंदगी कंट्रोल न करने दें 

मोबाइल हमारी जिंदगी को कंट्रोल न करे हम अपनी जिंदगी को कंट्रोल करें। बच्चे मिट्टी में खेलना पसंद करते हैं नाकि मोबाइल से खेलना। लोगों को बच्चों के लिए समय निकालना चाहिेए और तय उम्र के बाद ही मोबाइल का इस्तेमाल करने देना चाहिए।

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सफलता के बारे में 

अमर उजाला समूह का एडटेक वेंचर सफलता देश का अग्रणी स्किल व जॉबटेक प्लेटफॉर्म है। नोएडा, रायबरेली व वाराणसी के बाद सफलता ने देवभूमि उत्तराखंड में अपना सेंटर शुरू किया है। ये सेंटर हल्द्वानी में प्राइड हॉस्पिटल के सामने मुखानी रोड पर स्थित है। युवा भारत को डिजिटली स्किल्ड बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही सफलता के इस सेंटर से हल्द्वानी के हर युवा को विश्वस्तरीय डिजिटल स्किल प्रदान की जाएगी। बिना इंजीनियरिंग या एमबीए करे भी सफलता के डिजिटल स्किल्स प्रोग्राम युवाओं को कॉरपोरेट सेक्टर और एमएनसीज में कॅरिअर शुरू करने का मौका देते हैं। सफलता के इस सेंटर से रजिस्टर होने के बाद युवा घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से डिजिटल स्किल सीखकर डिजिटल सेक्टर में लाखों के पैकेज पर जॉब हासिल कर सकते हैं। इसके लिए आप SAFALTA APP की मदद ले सकते हैं।  
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