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जीएलए में ‘ब्रह्माण्ड विज्ञान‘ पर हुआ दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
Updated Wed, 07 Sep 2016 03:45 PM IST
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जीएलए विश्वविद्यालय
- फोटो : GLA University
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जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में ‘ब्रहमाण्ड विज्ञान‘ पर दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान यादवपुर विश्वविद्यालय कोलकाता के लब्ध प्रतिष्ठित एवं ब्रहमाण्ड विज्ञान के विद्वान प्रो. फारूक रहमान ने वार्महोल डार्कमैटर द्वारा उत्पन्न होता है
तथा यह ब्रहमाण्ड के विकास में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि ब्लैक होल अंतरिक्ष का वह हिस्सा है, जिसका गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि वह अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को अवशोशित कर लेता है और बाहर कुछ भी नहीं आने देता। इस प्रकार ब्रहमाण्ड में कई ब्लैकहोल हैं, जिनका वजन सूर्य से 6. 8 अरब दूना ज्यादा है और यह ब्लैक होल समूचे सौर मंडल को निगल सकता है।
भारतीय विश्वविद्यालय संघ तथा कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान ने सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि कई तरह के प्रदूषण बढ़ने के कारण ही प्रकृति में विकृतियाँ उत्पन्न हुई हैं। वातावरण एवं ब्रह्माण्ड को स्वच्छ रखने के लिए जन जन को
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जागरुक करना होगा। कार्यशाला के माध्यम से वातावरण व ब्रह्माण्ड में हो रहे बदलाव के बारे में जानने का यह एक सुंदर मौका है।
उन्होंने अपने लंबे अनुभव को साझा करते हुए प्राचीन आध्यात्म व आधुनिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च प्रो. अनिरूद्ध प्रधान ने सम्मेलन में अपने शोध अनुभवों का उल्लेख करते हुये स्पष्ट किया कि
मानवआदि काल से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एवं विकास के बारे में सोचता रहा है।
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तथा यह ब्रहमाण्ड के विकास में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि ब्लैक होल अंतरिक्ष का वह हिस्सा है, जिसका गुरूत्वाकर्षण क्षेत्र इतना शक्तिशाली होता है कि वह अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश को अवशोशित कर लेता है और बाहर कुछ भी नहीं आने देता। इस प्रकार ब्रहमाण्ड में कई ब्लैकहोल हैं, जिनका वजन सूर्य से 6. 8 अरब दूना ज्यादा है और यह ब्लैक होल समूचे सौर मंडल को निगल सकता है।
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भारतीय विश्वविद्यालय संघ तथा कुलपति प्रो. दुर्ग सिंह चैहान ने सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि कई तरह के प्रदूषण बढ़ने के कारण ही प्रकृति में विकृतियाँ उत्पन्न हुई हैं। वातावरण एवं ब्रह्माण्ड को स्वच्छ रखने के लिए जन जन को
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जागरुक करना होगा। कार्यशाला के माध्यम से वातावरण व ब्रह्माण्ड में हो रहे बदलाव के बारे में जानने का यह एक सुंदर मौका है।
उन्होंने अपने लंबे अनुभव को साझा करते हुए प्राचीन आध्यात्म व आधुनिकता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।विश्वविद्यालय के डीन रिसर्च प्रो. अनिरूद्ध प्रधान ने सम्मेलन में अपने शोध अनुभवों का उल्लेख करते हुये स्पष्ट किया कि
मानवआदि काल से ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एवं विकास के बारे में सोचता रहा है।
जीएलए विश्वविद्यालय
- फोटो : GLA University
इस विकसित युग में जहां मानव ने चन्द्रमापर कदम रखा है और सौर मण्डल के कई ग्रहों पर अंतरिक्ष यान भेज चुका है फिर भी ब्रह्माण्ड के 95 प्रतिषत भाग के बारे में आज भी वैज्ञानिकों को कुछ भी पता नहीं है। जिसे हम डार्क इनर्जी एवं डार्क मैटर कहते हैं।
डॉ प्रधान ने अपने शोध पर प्रकाष डालते हुये स्पष्ट किया कि आकाश गंगायें ब्रह्माण्ड की मूलभूत इकाईयां हैं तथा आकाश गंगायें मुख्यतः तारों, गैस, अदृष्य पदार्थ 1⁄4डार्क इनर्जी तथा डार्क मैटर1⁄2 से बनीं होती हैं। अदृष्य पदार्थ को जानने के लिए विश्व में शोध कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जीएलए विवि एवं यादवपुर विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से भविश्य में षोध करेंगे जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।
निदेशक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने दैनिक जीवन में गणित के महत्व पर प्रकाष डालते हुए सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। एसोसिएट प्रो. पूजा पाठक ने अपने उद्बोधन में साॅफ्ट कम्प्यूटिंग तथा गणित की अवधारणाओं को ब्र्हमाण्ड विज्ञान से जोड़ने पर कैसे नई अवधारणायें प्राप्त होंगी पर प्रकाश डाला। डाॅ. गोपाल चन्द्र षिट ने डिफरेंटियल इक्वेषन के न्यूमेरिकल सॉल्यूशन की मदद से ब्रहमाण्ड की विषेशताओं के अध्ययन पर अपना षोध प्रस्तुत किया। इनके अतिरिक्त छः
शोध छात्र-छात्राओं ने सम्मेलन में प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों के सर्टिफिकेट का वितरण प्रतिकुलपति प्रो. आनंद मोहन अग्रवाल ने किया। गणित विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो पीके टण्डन ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन के संयोजक डाॅ. पूजा पाठक तथा सह-संयोजक डाॅ. अम्बुज कुमार मिश्रा एवं उमेष कुमार शर्मा रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अल्का एवं जितेन्द्र कौशिक ने किया।
डॉ प्रधान ने अपने शोध पर प्रकाष डालते हुये स्पष्ट किया कि आकाश गंगायें ब्रह्माण्ड की मूलभूत इकाईयां हैं तथा आकाश गंगायें मुख्यतः तारों, गैस, अदृष्य पदार्थ 1⁄4डार्क इनर्जी तथा डार्क मैटर1⁄2 से बनीं होती हैं। अदृष्य पदार्थ को जानने के लिए विश्व में शोध कार्य चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर जीएलए विवि एवं यादवपुर विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से भविश्य में षोध करेंगे जिसके दूरगामी परिणाम होंगे।
निदेशक प्रो. अनूप कुमार गुप्ता ने दैनिक जीवन में गणित के महत्व पर प्रकाष डालते हुए सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। एसोसिएट प्रो. पूजा पाठक ने अपने उद्बोधन में साॅफ्ट कम्प्यूटिंग तथा गणित की अवधारणाओं को ब्र्हमाण्ड विज्ञान से जोड़ने पर कैसे नई अवधारणायें प्राप्त होंगी पर प्रकाश डाला। डाॅ. गोपाल चन्द्र षिट ने डिफरेंटियल इक्वेषन के न्यूमेरिकल सॉल्यूशन की मदद से ब्रहमाण्ड की विषेशताओं के अध्ययन पर अपना षोध प्रस्तुत किया। इनके अतिरिक्त छः
शोध छात्र-छात्राओं ने सम्मेलन में प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों के सर्टिफिकेट का वितरण प्रतिकुलपति प्रो. आनंद मोहन अग्रवाल ने किया। गणित विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो पीके टण्डन ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन के संयोजक डाॅ. पूजा पाठक तथा सह-संयोजक डाॅ. अम्बुज कुमार मिश्रा एवं उमेष कुमार शर्मा रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. अल्का एवं जितेन्द्र कौशिक ने किया।
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