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सरकार ने 32 मेडिकल कॉलेजों में दाखिले पर लगाई रोक

Sun, 04 Jun 2017 03:57 PM IST
amarujala.com- Presented by: आकांक्षा सिंह
amarujala.com- Presented by: आकांक्षा सिंह Updated Sun, 04 Jun 2017 03:57 PM IST
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32 Medical Colleges Is Banned By Government For Two Years Due To Lack Of Facilities
मेडिकल कॉलेजों में दाखिले पर रोक
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 32 निजी मेडिकल कॉलेजों को अगले दो साल के लिए एडमिशन लेने से बैन कर दिया है। मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल के उस फैसले के रद्द कर दिया है जिसमें उन्होंने कथित बेकार सुविधाओं को मंजूरी दे दी थी।
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मंत्रालय ने सभी कॉलेजों की 2 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट को भी जब्त कर दिया है। ये सभी कॉलेज अब दो साल तक नए एडमिशन नहीं ले पाएंगे लेकिन जो 4,000 बच्चे इन कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं वो अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
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हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के ज्वाइंट सेक्रेटरी अरुण सिंघस ने हिंदुस्तान टाइम्स को कहा, 'हमारा निर्णय रिपोर्ट पर आधारित है जिसमें इन कॉलेजों के अंदर सुविधाओं की कमी बताई गई है। हालांकि ये फैसला उन छात्रों को प्रभावित नहीं करेगा जो अभी वहां पढ़ाई कर रहे हैं।'
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पिछले साल मई में सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल काउंस में कथित भ्रष्टाचार की जांच के लिए पूर्व चीफ जस्टिस एमएल लोढ़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पर्यवेक्षक समिति का गठन किया था। जिस समय कोर्ट द्वारा पैनल गठित किया गया तभी मेडिकल काउंसिल ने 109 नए कॉलेजों का निरिक्षण किया था जिन्होंने साल 2016 से छात्रों के एडमिशन के लिए आवेदन दिया था। काउंसिल ने इनमें से केवल 17 कॉलेजों को ही अनुमति दी थी लेकिन पैनल ने इन कॉलेजों की दोबारा समीक्षा करते हुए 34 अन्य कॉलेजों को भी एडमिशन की इजाजत दे दी थी। पैनल ने इन कॉलेजों को उस आधार पर अनुमति दी थी कि वे सभी मानदंडो को पूरा करेंगे। उन्हें तभी ये चेतावनी दी गई थी कि अगर वे निरिक्षण में फेल हो जाते हैं तो उन्हें दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाएगा और उनकी जमा राशि भी जब्त कर दी जाएगी।


अधिकतर निजी कॉलेजों ने इस बैन को अवैध कहा है। उनका कहना है कि, 'पिछले साल पैनल ने 34 कॉलेजों को एडमिशन और कॉलेज में सुविधाओं को ठीक करने की अनुमति दी थी। अब काउंसिल ने 32 कॉलेजों को बैन कर दिया है जो इस प्रक्रिया का उल्लंघन है।' इस बात से सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों का हुआ है। वो खुद को पीड़ित महसूस कर रहे हैं और उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी।
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