उपद्रवियों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान का हर्जाना वसूल पाना कितना आसान?
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नागरिकता कानून 2019 को लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान कई जगहों पर हिंसा भड़की है। उपद्रवी जगह-जगह सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। इन उपद्रवियों ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर कहीं पत्थर फेंक कर तोड़फोड़ किया, तो कई जगहों पर बसों में आग लगा दी। यहां तक की दिल्ली में एक पुलिस चौकी तक फूंक दी गई।
विरोध प्रदर्शन के नाम पर जिस तरह सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, उसे लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नुकसान की भरपाई उपद्रवियों की संपत्ति जब्त करके की जाएगी।
लेकिन सवाल ये है कि क्या सरकार ये कर पाएगी? इस बारे में कानून क्या कहता है? देश में अब तक जितनी बार भी ऐसे प्रदर्शनों में सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया, क्या कभी उपद्रवियों से हर्जाना वसूला गया? इन सभी सवालों के जवाब आप आगे पढ़ सकते हैं। साथ ही हम ये भी बता रहे हैं कि अब तक देश में सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाए जाने की कितनी घटनाएं हुई हैं? इनमें सबसे ज्यादा किन राज्यों में हुईं और उत्तर प्रदेश किस स्थान पर है?
क्या कहता है कानून
- इस संबंध में एक कानून है, जिसका नाम है - प्रवेंशन ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट (Prevention of Damage to Public Property Act 1984)।
- इसके तहत हिंसक विद्रोहों में दोषी पाए जाने पर छह महीने से लेकर 10 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
- सुप्रीम कोर्ट ने भी इस संबंध में दिशा-निर्देश बनाए हुए हैं। इसके अनुसार, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर विद्रोहियों को इसका जम्मेदार ठहराया जा सकता है।
- 2007 में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस केटी थॉमस की अध्यक्षता वाली समिति ने 1984 के कानून में कुछ सख्त प्रावधान भी जोड़े। नियम बने कि विद्रोहों में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की घटनाओं के लिए उसके नेता को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
- वहीं, आंध्र प्रदेश के एक मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल में निर्देश दिए कि 'अगर किसी विरोध प्रदर्शन में बड़े स्तर पर संपत्तियों की तोड़फोड़ व नुकसान को अंजाम दिया जाता है तो हाई कोर्ट स्वतः संज्ञान लेते हुए घटना व नुकसान की जांच के आदेश दे सकता है। साथ ही ऐसा अपराध करने वाले उपद्रवियों को भी जिम्मेदार ठहरा सकता है।'
क्या हो पाती है कार्रवाई
- कानून भी है और सजा का प्रावधान भी, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती है दोषियों की पहचान करना।
- जन विद्रोहों के ज्यादातर मामलों में उनका नेतृत्व या संचालन करने वालों का कोई निश्चित चेहरा नहीं होता। और जहां ऐसा होता है, वहां कोर्ट में आसानी से साबित कर दिया जाता है कि उन्होंने हिंसा नहीं भड़काई या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आह्वान नहीं किया।
- एक आंकड़े के अनुसार, पहचान न हो पाने के कारण सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के मामलों में से महज 29.8 फीसदी मामलों में ही दोषियों को सजा मिल पाती है।
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सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान: देशभर में अब तक कितने मामले, कौन सा राज्य अव्वल
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB - National Crime Record Bureau) की हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 में देशभर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने के करीब 8 हजार मामले दर्ज किए गए। यानी हर दिन करीब 20 ऐसे विद्रोह हुए जिसमें किसी न किसी रूप से सार्वजनिक संपत्ति को उपद्रवियों ने नुकसान पहुंचाया।
किस राज्य में कितने मामले
हरियाणा - 2,562
उत्तर प्रदेश - 1,933
तमिलनाडु - 1,790
केरल - 310
महाराष्ट्र - 249
पश्चिम बंगाल - 151
असम - 140
आंध्र प्रदेश - 128
बिहार - 94
कर्नाटक - 94
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तेलंगाना - 94
राजस्थान - 67
हिमाचल प्रदेश - 62
पंजाब - 50
गुजरात - 27
झारखंड - 23
मध्य प्रदेश - 22
ओडिशा - 20
त्रिपुरा - 16
अरुणाचल प्रदेश - 13
छत्तीसगढ़ - 12
जम्मू-कश्मीर - 12
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मेघालय - 11
गोवा - 6
उत्तराखंड - 6