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नागरिकता कानून और एनआरसी में क्या है अंतर, यहां जानें हर सवाल का जवाब

Fri, 20 Dec 2019 09:53 AM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रत्नप्रिया रत्नप्रिया Updated Fri, 20 Dec 2019 09:53 AM IST
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What is the Difference between Citizenship Act and NRC, Everything about CAA amid CAB protest
सीएए और एनआरसी - फोटो : अमर उजाला

जब से देश की संसद में नागरिकता कानून (Citizenship Act) 2019 पारित हुआ है, तब से ही इसे लेकर दिल्ली समेत देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ये प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि सरकार इस कानून को रद्द करे। लेकिन केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह इस पर पीछे नहीं हटेगी। इस बीच कई जगहों पर नागरिकता कानून 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC - National Register of Citizens) को लेकर भ्रम भी फैलाए जा रहे हैं। देशवासियों के मन में भी इन दोनों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।


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जब से देश की संसद में नागरिकता कानून (Citizenship Act) 2019 पारित हुआ है, तब से ही इसे लेकर दिल्ली समेत देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ये प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि सरकार इस कानून को रद्द करे। लेकिन केंद्र सरकार ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह इस पर पीछे नहीं हटेगी। इस बीच कई जगहों पर नागरिकता कानून 2019 और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC - National Register of Citizens) को लेकर भ्रम भी फैलाए जा रहे हैं। देशवासियों के मन में भी इन दोनों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।



इसलिए हम आपके सवालों के जवाब लेकर आए हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं कि नागरिकता कानून और एनआरसी दरअसल है क्या और इन दोनों में क्या अंतर है।

क्या कहता है नागरिकता कानून 

  • 31 दिसंबर, 2014 या उससे पहले भारत आने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के छह धर्मों के अल्पसंख्यकों (हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी और ईसाई) को घुसपैठिया नहीं माना जाएगा। 
  • ऐसे लोग, जिनके पास अब तक भारत की नागरिकता नहीं है, उन्हें कुछ शर्तों के आधार पर नागरिकता लेने में आसानी होगी। लेकिन उन्हें कम से कम छह साल भारत में बिताने होंगे। पहले ये समय सीमा 11 साल की थी।

आसान शब्दों में ये कहा जा सकता है कि इस कानून के जरिए मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम लोगों को भारत की नागरिकता देने के नियम आसान बनाए गए हैं।

ये भी पढ़ें : क्या नागरिकता कानून 2019 को लागू करने से इनकार कर सकती हैं राज्य सरकारें?

इन राज्यों में कानून लागू नहीं

  • संविधान की छठी अनुसूची में शामिल राज्य व आदिवासी क्षेत्रों में नागरिकता कानून 2019 लागू नहीं होगा। ये प्रावधान बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन, 1873 के तहत अधिसूचित ‘इनर लाइन’ क्षेत्रों पर भी लागू नहीं होंगे।
  • असम : कारबी आंगलोंग जिला, बोडोलैंड, नार्थ चाछर हिल्स जिला 
  • मेघालय : खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और गारो हिल्स जिले 
  • मेघालय में सिर्फ शिलॉन्ग को छोड़कर बाकी क्षेत्रों में कानून लागू नहीं होगा
  • त्रिपुरा के आदिवासी जिले 
  • मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड

क्या है NRC?

सीएए और एनआरसी में अंतर
सीएए और एनआरसी में अंतर - फोटो : अमर उजाला
  • राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानि NRC में सभी भारतीयों का विवरण शामिल है। एनआरसी उन सभी लोगों की बात करता है जो गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रहे हैं। इसमें किसी के धर्म को आधार नहीं बनाया गया है।
  • अब तक सिर्फ असम में एनआरसी लागू किया गया है। यहां 24 मार्च 1971 को कटऑफ डेट बनाया गया। यानी जो लोग या जिनके पूर्वज इस तारीख से पहले से भारतीय नागरिक रहे हैं, सिर्फ उन्हें ही यहां का नागरिक माना जाएगा। वही नागरिकता पाने का दावा कर सकते हैं।
  • हालांकि केंद्र सरकार ने कहा है कि बाद में इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।
  • एनआरसी के तहत लोगों को ये साबित करना है कि वो खुद या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 या उससे पहले से भारत में रह रहे हैं। ये भारत में रह रहे किसी भी इंसान के लिए यहां का नागरिक बने रहने का आधार बनाया गया है। 

कानून के तहत कौन हैं अवैध प्रवासी

  • जिसने वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया हो।
  • जो अपने निर्धारित समय-सीमा से अधिक समय तक भारत में रह रहा है।
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