Black Holes: ब्लैक होल भौतिकी के क्षेत्र में प्रो. सुशांत घोष को मिली वैश्विक शीर्ष रैंकिंग, पढ़ें पूरी खबर
JMI: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. सुशांत घोष को 2024 की जीपीएस रेटिंग में ब्लैक होल भौतिकी में दुनिया की सबसे ऊंची रैंक मिली है। उनका शोध ब्लैक होल के बारे में नई और गहरी बातें बताता है, जिसे दुनियाभर में सराहा गया है।
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Black Holes: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सैद्धांतिक भौतिकी केंद्र के निदेशक प्रो. सुशांत जी घोष को ब्लैक होल शोध में स्कॉलर जीपीएस द्वारा 2024 के उच्च रैंक वाले स्कॉलर की मान्यता दी गई है, जो ब्लैक होल भौतिकी के प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में दूसरी सबसे ऊंची वैश्विक रैंकिंग हासिल करता है। प्रो. घोष का शोध पोर्टफोलियो ब्लैक होल भौतिकी के सैद्धांतिक और अवलोकन संबंधी पहलुओं पर केंद्रित है।
इसमें रोटेटिंग ब्लैक होल के चारों ओर स्पेस टाइम के क्वांटम सुधारों की जांच, ब्लैक होल द्वारा डाली गई फोटॉन रिंग और शैडो का विस्तृत मॉडलिंग और स्ट्रांग ग्रेविटेशनल लेंसिंग अध्ययन शामिल हैं, जो अत्यधिक ग्रेविटेशनल क्षेत्रों में लाइट बेंडिंग की समझ को गहरा करते हैं।
जामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ ने प्रो. सुशांत घोष को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बधाई दी और ब्लैक होल भौतिकी में दुनिया भर में दूसरे सबसे उच्च रैंक वाले स्कॉलर के रूप में उनकी रैंकिंग पर गर्व व्यक्त किया। कुलपति ने कहा कि जामिया के संकाय सदस्यों की ऐसी उपलब्धियां वैश्विक मंच पर अत्याधुनिक विज्ञान और अकादमिक नेतृत्व के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
जामिया में ईरानोलॉजी हॉल का हुआ उद्घाटन
नई दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रोफेसर मजहर आसिफ और भारत में ईरान के राजदूत डॉ. इराज इलाही की ओर से जामिया के मोहिबुल हसन ब्लॉक में नए पुनर्निर्मित ईरानोलॉजी हॉल का उद्घाटन किया गया। राजदूत इराज इलाही ने भारत और ईरान के बीच समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के बारे में बात की और सांस्कृतिक समझ और संवाद को बढ़ावा देने में ईरानी अध्ययनों की स्थायी प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने ईरानोलॉजी हॉल के जीर्णोद्धार में जामिया के सकारात्मक दृष्टिकोण, समर्थन और रुचि की सराहना की।
इसे अकादमिक सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना। जामिया के कुलपति प्रो. आसिफ ने कहा, जिस तरह के हॉल का उद्घाटन किया जा रहा है वैसा ही एक विशेष हॉल प्रत्येक विदेशी भाषा के लिए आवश्यक है ताकि छात्र उस भाषा और संस्कृति को समझ सकें, जिसे उन्होंने अध्ययन करने के लिए चुना है।
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