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Bangalore University: दलित शिक्षकों ने कुलपति को लिखा पत्र, भेदभाव और पदोन्नति में अनदेखी का लगाया आरोप

Sun, 06 Jul 2025 08:25 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवम गर्ग Updated Sun, 06 Jul 2025 08:25 PM IST
सार

Bangalore University News: बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के दलित शिक्षकों ने कुलपति को पत्र लिखकर प्रशासनिक पदों पर भेदभाव का आरोप लगाया है। शिक्षकों ने नियुक्तियों में पारदर्शिता की मांग की है। इस संबंध में वे कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध कर चुके हैं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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Bangalore University: Dalit Faculty Allege Discrimination in Promotions, Write to Vice Chancellor
Bangalore University - फोटो : Bangalore University (https://bangaloreuniversity.karnataka.gov.in/)

विस्तार

Bangalore University Dalit Faculty Discrimination: बेंगलुरु यूनिवर्सिटी के दलित समुदाय से जुड़े शिक्षकों ने कुलपति को एक गंभीर शिकायत पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने प्रशासनिक पदों की नियुक्तियों में जातिगत भेदभाव और कार्यभार की अनदेखी का आरोप लगाया है। शिक्षकों का कहना है कि वर्षों से वे न केवल शैक्षणिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में भी बराबरी से सहयोग कर रहे हैं।

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पत्र में लिखा गया है, "बीते वर्षों में हमने यूनिवर्सिटी की सर्वांगीण प्रगति के लिए न सिर्फ अपने शैक्षणिक कर्तव्यों का पालन किया, बल्कि कई अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालीं। लेकिन हाल के दिनों में देखा गया है कि यूनिवर्सिटी में वैधानिक पदों की नियुक्ति में भेदभाव की नीति अपनाई जा रही है।"

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सिर्फ कार्य, नहीं मिलता अधिकार

शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि जो अतिरिक्त जिम्मेदारियां उन्हें सौंपी गई हैं, वे केवल प्रशासनिक ‘स्टेवार्डशिप’ तक सीमित हैं, जिनमें कोई निर्णायक अधिकार नहीं होता। इसके बावजूद उन्हें पहले की तरह कोई एलिवड लीव (EL) या वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे, जिनकी व्यवस्था पहले से चली आ रही थी।

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उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में वे कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से अनुरोध कर चुके हैं, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

क्या हैं शिक्षकों की मांगें?

दलित शिक्षकों की मांग है कि विश्वविद्यालय में वैधानिक पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, जिससे सभी को समान अवसर मिल सके। इसके अलावा उन्हें जो अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां दी जाती हैं, उनके लिए उचित वित्तीय लाभ और अवकाश (छुट्टी) की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। 


शिक्षकों का यह भी कहना है कि उन्हें केवल नाम मात्र की भूमिका नहीं, बल्कि निर्णयात्मक और प्रभावशाली पदों पर भी अवसर दिए जाने चाहिए। साथ ही, विश्वविद्यालय में कार्यरत सभी शिक्षकों को समान अधिकार, गरिमा और सम्मान का माहौल मिलना चाहिए ताकि वे बिना किसी भेदभाव के अपने शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।


फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन इस मुद्दे को लेकर छात्रों और शिक्षक संगठनों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

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