Ambedkar Jayanti 2020: हर साल 14 अप्रैल को आंबेडकर जयंती मनाई जाती है। केंद्र सरकार ने इस साल बाबा साहब आंबेडकर जंयती के मौके पर सभी सरकारी कार्यालयों में छुट्टी की घोषणा की है। आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ। उनका मूल नाम भीमराव था। आंबेडकर के पिता रामजी वल्द मालोजी सकपाल महू में ही मेजर सूबेदार के पद पर तैनात थे। आंबेडकर का परिवार मराठी था और वो मूल रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के आंबडवेकर गांव के रहने वाले थे।
Ambedkar Jayanti 2020: इस किताब को पूरा करने के तीन दिन बाद हो गई थी संविधान निर्माता डॉ आंबेडकर की मृत्यु
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आंबेडकर बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। स्कूल में उनका उपनाम गांव के नाम के आधार पर आंबडवेकर लिखवाया गया था। लेकिन स्कूल शिक्षक ने आंबडवेकर को आंबेडकर कर दिया। उनकी प्रारंभिक शिक्षा दापोली और सतारा में हुई। आंबेडकर ने बंबई के एलफिन्स्टोन स्कूल से 1907 में मैट्रिक पास की। 1912 में आंबेडकर ने बड़ौदा नरेश सयाजी राव गायकवाड़ की फेलोशिप पाकर मुबई विश्वविद्यालय से स्नातक परीक्षा पास की। संस्कृत पढ़ने पर मनाही की वजह से आंबेडकर फारसी लेकर पास हुए।
आंबेडकर ने अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय से बी.ए पास किया और बड़ौदा नरेश सयाजी गायकवाड़ की पुन: फेलोशिप पाकर एमए में दाखिला लिया। 1915 में आंबेडकर ने स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की। उन्होंने अपना शोध 'प्राचीन भारत का वाणिज्य' पर लिखा । 1916 में कोलंबिया विश्वविद्यालय अमेरिका से ही उन्होंने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। पीएच.डी में आंबेडकर का शोध का विषय था 'ब्रिटिश भारत में प्रातीय वित्त का विकेन्द्रीकरण'। आंबेडकर को लंदन यूनिवर्सिटी ने डॉक्टर्स ऑफ साइंस की उपाधि दी। 1927 में कोलंबंनिया यूनिवर्सिटी ने भी उन्हें पीएचडी की उपाधि दी। उन्होंने जीवन भर समाज में अनुसूचित वर्ग को समानता दिलाने के लिए संघर्ष किया।
29 अगस्त 1947 को उन्हें भारत के संविधान मसौदा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। संविधान का फाइनल ड्राफ्ट तैयार करने में आंबेडकर को 2 साल 11 महीने और 17 दिन लगे। बाबा साहेब ने 1952 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वो हार गए। 1952 में उन्हें राज्य सभा के लिए नियुक्त किया गया और अपनी मृत्यु तक वो इस सदन के सदस्य रहे। डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की लिखी आखिरी किताब का नाम 'द बुद्ध एंड हिज़ धम्म' था।
इस किताब को पूरा करने के तीन दिन बाद 6 दिसंबर 1956 को दिल्ली में आंबेडकर का निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मुंबई में बौद्ध रीति-रिवाज के साथ हुआ। 'द बुद्ध एंड हिज़ धम्म' पुस्तक आंबेडकर की मृत्यु के बाद 1957 में प्रकाशित हुई।
कमेंट
कमेंट X