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Hindi News ›   Education ›   A Kerala School's Innovative Seating to end back bencher system; Malayalam Movie Inspired

Classroom Sitting: बैकबेंचर-फ्रंटबेंचर कल्चर को खत्म करने की अनूठी पहल, उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ

Mon, 14 Jul 2025 08:09 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Mon, 14 Jul 2025 08:09 PM IST
सार

Kerala: केरल के कोल्लम स्थित रामविलासम स्कूल ने अनोखा कदम उठाया है। यहां हर बच्चा अब फ्रंट रो में बैठता है। चारों दीवारों पर कुर्सियां लगाकर हर छात्र को बराबरी का ध्यान और शिक्षक से जुड़ाव मिल रहा है। यह मॉडल अब अन्य स्कूलों में भी अपनाया जा रहा है।
 

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A Kerala School's Innovative Seating to end back bencher system; Malayalam Movie Inspired
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विस्तार

Kerala: केरल के कोल्लम जिले में स्थित रामविलासम वोकेशनल हायर सेकेंडरी स्कूल (RVHSS) ने देशभर में ध्यान आकर्षित किया है। इस स्कूल ने कक्षा के पारंपरिक बैठने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। अब यहां हर छात्र "फ्रंट रो" में बैठता है। स्कूल ने कक्षा की चारों दीवारों के सहारे कुर्सियों को इस तरह से लगाया है कि हर बच्चे को शिक्षक स्पष्ट रूप से दिखाई दे और सभी को बराबरी से ध्यान मिल सके। 

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फिल्म से मिली प्रेरणा

यह विचार हाल ही में आई मलयालम फिल्म 'स्थानार्थी श्रीकुट्टन' से प्रेरित है, जिसमें एक कक्षा 7 का छात्र पीछे बैठने पर उपहास का सामना करता है और फिर नई व्यवस्था का सुझाव देता है।

फिल्म के निर्देशक विनेश विश्वनाथन ने बताया, "यह विचार हमारा नहीं है, बल्कि पहले भी 'जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम (DPEP)' के तहत ऐसा मॉडल इस्तेमाल होता था, जिसे हमने समय के साथ खो दिया। फिल्म के जरिए यह फिर सामने आया।"

उन्होंने यह भी बताया कि पंजाब के एक स्कूल ने भी यह व्यवस्था अपनाई है। वहां के प्रिंसिपल ने फिल्म को ओटीटी पर देखकर न केवल इसे देखा, बल्कि छात्रों को भी दिखाया और क्लासरूम में यह बदलाव किया।

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मंत्री का भी मिला समर्थन

इस नवाचार को केरल के मंत्री के. बी. गणेश कुमार का भी समर्थन मिला है, जिनके परिवार द्वारा यह स्कूल संचालित होता है। उन्होंने फिल्म रिलीज से पहले ही इसे देखा और स्कूल के शिक्षकों के साथ विचार-विमर्श कर एक प्राइमरी कक्षा में इसे लागू किया। परिणाम उत्साहजनक रहे, जिससे यह व्यवस्था अब स्कूल की सभी कक्षाओं में अपनाई जा चुकी है।

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बैक बैंचर जैसी धारणा को तोड़ती है ये व्यवस्था

स्कूल के प्रधानाध्यापक सुनील पी. शेखर ने कहा कि यह व्यवस्था हर छात्र को समान रूप से ध्यान देने में मदद करती है और ‘बैक बेंचर’ जैसी धारणा को तोड़ती है। वहीं, 30 वर्षों से पढ़ा रहीं शिक्षिका मीरा मैडम ने बताया, "अब मैं हर छात्र से जुड़ पाती हूं। सभी बच्चों को एक-दूसरे का चेहरा भी दिखता है और वे शिक्षक की बातों पर भी पूरा ध्यान देते हैं।"

सोशल मीडिया पर हो रही खूब चर्चा

यह मॉडल केरल के कम से कम आठ अन्य स्कूलों में फैल चुका है और देश के अन्य हिस्सों के शिक्षक भी इसे लेकर रुचि दिखा रहे हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भीड़भाड़ वाली कक्षाओं में इसकी व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं, लेकिन निर्देशक विश्वनाथन ने कहा कि भीड़भाड़ खुद स्कूल के नियमों का उल्लंघन है और इस पर अब अधिकारी ध्यान दे रहे हैं।

इस पहल को उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी सराहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे "स्वागत योग्य कदम" बताया, भले ही उन्होंने खुद को 'बैकबेंचर' कहलवाना पसंद किया हो।

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