टुकड़ों में जानकारी
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मेला क्षेत्र कुल चौदह सेक्टर में विभाजित है। इसमें से बारह सेक्टर त्रिवेणी संगम से उत्तरी क्षेत्र और दो सेक्टर अरैल क्षेत्र में बसाए जा रहे हैं। पूरे क्षेत्र में स्थान-स्थान पर उपयोगी सूचनाओं के लिए सूचना केंद्र स्थापित किए जाएंगे। नदियों को प्रदूषणमुक्त करने के लिए अनेक संस्थाओं की मदद ली जाएगी और मेला क्षेत्र को पॉलीथिन मुक्त रखा जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था सतर्क
दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन को किसी भी आपदा से बचाने का जिम्मा नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) को सौंपा गया है। एनडीआरएफ की नौवीं बटालियन के यह 300 रेस्क्यूअर की दो कंपनियां 26 दिसंबर को गंगा की रेती पर आ जाएंगी और मेला खत्म होने तक यहीं रहेंगी। ये टुकड़ी हाल ही में जापान के फुकूशीमा में हुई परमाणु त्रासदी के बाद राहत व बचाव कार्य में शामिल होकर लौटी थी। इन्हें अब प्रयाग पहुंचने का निर्देश दिया गया है। इस दल में एक कमांडेंट, एक असिस्टेंट कमांडेंट और एक डिप्टी कमांडेंट तैनात रहेंगे।
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