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फर्जी दस्तावेज की मदद से डीडीए प्लॉट बेचने वाली महिला गिरफ्तार
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने फर्जी कागजात के जरिए डीडीए प्लॉट बेचने वाली एक महिला को गिरफ्तार किया है। अदालत ने महिला को भगोड़ा करार दिया था। जिसे पुलिस ने सात साल बाद अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद गिरफ्तार किया है। इस फर्जीवाड़ा में शामिल महिला के छह साथी पहले ही पकड़े जा चुके हैं। उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि मॉडल टाउन निवासी संजय गोयल ने वर्ष 2013 में इसकी शिकायत की थी। जिसमें कहा गया कि प्रॉपर्टी डीलर जितेंद्र गुप्ता ने उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर डीडीए प्लॉट खरीदवाए। बाद में पता चला कि प्लॉट को फर्जी कागजात और फर्जी मालिक के जरिए बेचा गया है। इस तरह से प्रॉपर्टी डीलर और अन्य आरोपियों ने संजय गोयल से सात करोड़ रुपये की ठगी की।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और डीडीए से इन प्लॉटों के बारे में जानकारी हासिल की। जिसमें पता चला कि ठगी करने वाले प्लॉट के असली मालिक नहीं हैं। इन लोगों ने फर्जी कागजात बनाकर प्लॉट को बेचकर ठगी की है और इनका मास्टर माइंड जितेंद्र गुप्ता है। आर्थिक अपराध शाखा ने जांच करते हुए छह आरोपी जितेंद्र गुप्ता, धीरज कुमार, हर्ष कुमार, पवन शर्मा, विनोद शर्मा और सुरेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इस साजिश में एक महिला भी शामिल थी, जिसने अपनी पहचान गुरिंद्र बेदी बताकर रोहिणी का प्लॉट बेचा था। आरोपी महिला पुलिस की तफ्तीश में शामिल नहीं हुई और फरार हो गई।
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वर्ष 2014 में अदालत ने महिला को भगोड़ा करार दिया। उसके बाद से पुलिस लगातार उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। पुलिस का दबाव बढ़ता देख महिला ने पांच जून को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ कर रही है। महिला आठवीं पास है और इस मामले में उसका पति और बेटा गिरफ्तार हो चुका है।
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शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि मॉडल टाउन निवासी संजय गोयल ने वर्ष 2013 में इसकी शिकायत की थी। जिसमें कहा गया कि प्रॉपर्टी डीलर जितेंद्र गुप्ता ने उनके और परिवार के सदस्यों के नाम पर डीडीए प्लॉट खरीदवाए। बाद में पता चला कि प्लॉट को फर्जी कागजात और फर्जी मालिक के जरिए बेचा गया है। इस तरह से प्रॉपर्टी डीलर और अन्य आरोपियों ने संजय गोयल से सात करोड़ रुपये की ठगी की।
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पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और डीडीए से इन प्लॉटों के बारे में जानकारी हासिल की। जिसमें पता चला कि ठगी करने वाले प्लॉट के असली मालिक नहीं हैं। इन लोगों ने फर्जी कागजात बनाकर प्लॉट को बेचकर ठगी की है और इनका मास्टर माइंड जितेंद्र गुप्ता है। आर्थिक अपराध शाखा ने जांच करते हुए छह आरोपी जितेंद्र गुप्ता, धीरज कुमार, हर्ष कुमार, पवन शर्मा, विनोद शर्मा और सुरेश शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। इस साजिश में एक महिला भी शामिल थी, जिसने अपनी पहचान गुरिंद्र बेदी बताकर रोहिणी का प्लॉट बेचा था। आरोपी महिला पुलिस की तफ्तीश में शामिल नहीं हुई और फरार हो गई।
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वर्ष 2014 में अदालत ने महिला को भगोड़ा करार दिया। उसके बाद से पुलिस लगातार उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। पुलिस का दबाव बढ़ता देख महिला ने पांच जून को अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ कर रही है। महिला आठवीं पास है और इस मामले में उसका पति और बेटा गिरफ्तार हो चुका है।