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जब बुजुर्ग हिंदू की अर्थी को मुस्लिम पड़ोसियों ने दिया कंधा
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नई दिल्ली। कोरोना जैसी महामारी में ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां किसी की मौत हो जाने पर उनके अपनों ने मृतक से मुंह मोड़ लिया। लेकिन कहते हैं न इंसानियत हमेशा रहती है। कुछ ऐसा ही मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कबीर नगर इलाके में देखने को मिला। यहां दंगे वाले इलाके में एक बुजुर्ग हिंदू की मौत हो गई। बुजुर्ग के रिश्तेदारों ने लॉकडाउन व दूसरे बहाने बनाकर मुंह मोड़ लिया।
मुस्लिम बहुल इलाके में रहने वाले बुजुर्ग के दोनों बेटे परेशान होने लगे तो इंसानियत का फर्ज निभाते हुए पड़ोसी मुस्लिम परिवार सामने आए। न सिर्फ इन लोगों ने बुजुर्ग की अर्थी का इंतजाम, सजाने और कंधा दिया, बल्कि श्मशान पहुंचकर उसकी चिता भी सजाई। यहां तक श्मशान घाट के कई क्रियाकलाप भी किए। परिवार को अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं देने दिए।
इतना प्यार पाकर बुजुर्ग के बेटों की आंखों से आंसू छलकने लगे। किसी ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दी जो शनिवार को खूब वायरल हुई। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल बता रहे हैं। पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें तो बस रमजान के महीने में पड़ोसी की मदद कर सवाब (पुण्य) कमाने का मौका मिला है।
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जानकारी के अनुसार बुजुर्ग 60 वर्षीय बलबीर कबीर नगर के उसी मोहल्ले में रहते हैं, जो वर्ष 2020 के फरवरी में सांप्रदायिकता की आग में जल रहा था। बलबीर का परिवार गली नंबर-1 में रहता है। इसके परिवार में दो बेटे अरविंद और अर्जुन व अन्य सदस्य हैं। अरविंद ने बताया कि उसके पिता को हार्ट की बीमारी थी। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत भी खराब थी। शुक्रवार को अचानक उनकी मौत हो गई।
लॉकडाउन और कोरोना की बात कह कर रिश्तेदारों ने घर आने से मना कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। बुजुर्ग की मौत का जब उनके पड़ोसियों को पता चला तो फौरन कई परिवार उनके घर पहुंचे। मोहल्ले में बलबीर का अकेला परिवार था। वह पड़ोसियों से मिलता-जुलता भी कम था।
नासिर चौधरी ने बताया कि इस्लाम में साफ कहा गया है कि यदि किसी शख्स के पड़ोसी को कोई परेशानी है तो उसकी रोजी हराम है जब तक वह उसकी परेशानी का हल निकालने की कोशिश न करे। इसी हक से कई परिवार बलबीर के घर पहुंचे। उसके दोनों बेटों को मदद का भरोसा दिया। बाद में अर्थी का इंतजाम कर उसे सजाया गया। मुस्लिम पड़ोसियों ने अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचाया।
पड़ोसियों का कहना है कि जैसा मुसलमानों में होता है कि जब किसी पड़ोसी की मौत होती है तो तीन दिनों तक पड़ोसी ही उनके घर खाने का इंतजाम करते हैं। बलबीर के घर भी ऐसे ही तीन दिन तक खाना भेजकर पड़ोसी का धर्म निभाया जाएगा।
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मुस्लिम बहुल इलाके में रहने वाले बुजुर्ग के दोनों बेटे परेशान होने लगे तो इंसानियत का फर्ज निभाते हुए पड़ोसी मुस्लिम परिवार सामने आए। न सिर्फ इन लोगों ने बुजुर्ग की अर्थी का इंतजाम, सजाने और कंधा दिया, बल्कि श्मशान पहुंचकर उसकी चिता भी सजाई। यहां तक श्मशान घाट के कई क्रियाकलाप भी किए। परिवार को अंतिम संस्कार के पैसे भी नहीं देने दिए।
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इतना प्यार पाकर बुजुर्ग के बेटों की आंखों से आंसू छलकने लगे। किसी ने पूरे घटनाक्रम की वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दी जो शनिवार को खूब वायरल हुई। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल बता रहे हैं। पड़ोसियों का कहना है कि उन्हें तो बस रमजान के महीने में पड़ोसी की मदद कर सवाब (पुण्य) कमाने का मौका मिला है।
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जानकारी के अनुसार बुजुर्ग 60 वर्षीय बलबीर कबीर नगर के उसी मोहल्ले में रहते हैं, जो वर्ष 2020 के फरवरी में सांप्रदायिकता की आग में जल रहा था। बलबीर का परिवार गली नंबर-1 में रहता है। इसके परिवार में दो बेटे अरविंद और अर्जुन व अन्य सदस्य हैं। अरविंद ने बताया कि उसके पिता को हार्ट की बीमारी थी। पिछले कुछ दिनों से उनकी तबीयत भी खराब थी। शुक्रवार को अचानक उनकी मौत हो गई।
लॉकडाउन और कोरोना की बात कह कर रिश्तेदारों ने घर आने से मना कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। बुजुर्ग की मौत का जब उनके पड़ोसियों को पता चला तो फौरन कई परिवार उनके घर पहुंचे। मोहल्ले में बलबीर का अकेला परिवार था। वह पड़ोसियों से मिलता-जुलता भी कम था।
नासिर चौधरी ने बताया कि इस्लाम में साफ कहा गया है कि यदि किसी शख्स के पड़ोसी को कोई परेशानी है तो उसकी रोजी हराम है जब तक वह उसकी परेशानी का हल निकालने की कोशिश न करे। इसी हक से कई परिवार बलबीर के घर पहुंचे। उसके दोनों बेटों को मदद का भरोसा दिया। बाद में अर्थी का इंतजाम कर उसे सजाया गया। मुस्लिम पड़ोसियों ने अर्थी को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचाया।
पड़ोसियों का कहना है कि जैसा मुसलमानों में होता है कि जब किसी पड़ोसी की मौत होती है तो तीन दिनों तक पड़ोसी ही उनके घर खाने का इंतजाम करते हैं। बलबीर के घर भी ऐसे ही तीन दिन तक खाना भेजकर पड़ोसी का धर्म निभाया जाएगा।