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दिल्ली में और गहरा सकता है जल संकट, हरियाणा के बाद यूपी और हिमाचल भी पीछे हटे

Mon, 23 May 2022 02:00 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 23 May 2022 02:00 AM IST
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Water crisis may deepen in Delhi, after Haryana, UP and Himachal also retreat
नई दिल्ली। राजधानी में जल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि दिल्ली को उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश अतिरिक्त पानी देने की योजना से पीछे हट गए हैं। हरियाणा भी दिल्ली के साथ पानी के आदान-प्रदान के प्रस्ताव पर तैयार नहीं है। हिमाचल और उत्तर प्रदेश से संबंधित प्रस्तावों पर वर्ष 2019 से बात चल रही थी। दोनों राज्य लगभग छह से आठ महीने पहले इन प्रस्तावों से पीछे हट चुके हैं।
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दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, उत्तर प्रदेश के पानी के बदले 14 एमजीडी उपचारित अपशिष्ट जल प्रदान करने की योजना बनाई थी। उत्तर प्रदेश ने कहा था कि वह मुरादनगर से गंगा का 270 क्यूसेक पानी दे सकता है और दिल्ली ने उत्तर प्रदेश से सिंचाई के लिए ओखला से इतनी ही मात्रा में उपचारित अपशिष्ट जल प्रदान करने का वादा किया था। कई बैठकों और निरीक्षणों के बाद उत्तर प्रदेश ने लगभग छह महीने पहले इस विचार को त्याग दिया। हालांकि, केंद्र इस प्रस्ताव के पक्ष में था, लेकिन उत्तर प्रदेश ने इसे अस्वीकार कर दिया। उत्तर प्रदेश ने यह प्रस्ताव अस्वीकार करने का कोई कारण नहीं बताया।
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दिल्ली ने हरियाणा के साथ भी एक प्रस्ताव पर चर्चा की। इसके तहत सिंचाई के लिए 20 एमजीडी उपचारित अपशिष्ट जल के बदले हरियाणा से कैरियर लाइंड कैनाल (सीएलसी) और दिल्ली सब ब्रांच (डीएसबी) के माध्यम से पानी मांगा गया था। हरियाणा ने अभी तक इस प्रस्ताव पर सहमति नहीं जताई है। अब ऐसा होने की बहुत कम संभावना लग रही है। इसी तरह दिसंबर 2019 में हिमाचल प्रदेश ने यमुना के अपने हिस्से का पानी दिल्ली को 21 करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से बेचने के लिए एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत (हरियाणा के यमुना नगर जिले में स्थित) ताजेवाला से दिल्ली तक पानी पहुंचाना था। हालांकि, हरियाणा ने हिमाचल प्रदेश की इस योजना का विरोध किया था। हरियाणा ने तर्क दिया था कि उसकी नहरों में हिमाचल प्रदेश से दिल्ली तक अतिरिक्त पानी ले जाने की क्षमता नहीं है। इस कारण हिमाचल प्रदेश भी लगभग छह महीने पहले समझौते से पीछे हट गया।
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इसके पीछे राजनीतिक कारण : जल बोर्ड
दिल्ली जल बोर्ड का मानना है कि उसके इंजीनियरों ने इन योजनाओं को हकीकत में बदलने के लिए कड़ी मेहनत की, लेकिन पड़ोसी राज्य राजनीतिक कारणों से पीछे हट गए। दिल्ली को लगभग 1,200 एमजीडी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि दिल्ली जल बोर्ड लगभग 950 एमजीडी की आपूर्ति करता है।
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