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वर्ष 2011 के दिल्ली हाईकोर्ट बम धमाकों में था शामिल

Tue, 12 Oct 2021 08:09 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 08:09 PM IST
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Was involved in the 2011 Delhi High Court bomb blasts
नई दिल्ली। मोहम्मद अशरफ देश में हुई कई आतंकी वारदात में शामिल रहा है। वर्ष 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट के सामने बम धमाके उसकी रेकी के आधार पर हुए थे। उसने दिल्ली हाईकोर्ट की कई बार रेकी की थी। वह पूर्वी दिल्ली से वहां गया था। उसने पूछताछ में पुलिस को बताया कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने उसके सामने ही सेना के कई जवानों का अपहरण कर लिया था। कुछ समय बंधक बनाकर रखने के बाद उनकी गला रेतकर हत्या कर दी थी।
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स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वह भारत में कहीं भी तभी जाता था, जब पाकिस्तान में बैठा उसका हैंडलर निर्देश देता था। उसके कहने पर ही वह जम्मू-कश्मीर जाकर आतंकियों से मिलता था। वहां वह सेना की मूवमेंट पर नजर रखता और वीडियो बनाने के साथ नारिसर और आतंकियों को अन्य खुफिया जानकारी देता था। इस जानकारी के आधार पर जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले होते थे। उसने पूछताछ में खुलासा किया कि नासिर ने सोमवार को पाकिस्तान से व्हाट्स एप किया था कि हथियारों की खेप पहुंच गई है। वह इसे सुरक्षित जगह पहुंचा दे। वह जैसी ही घर से निकला, इंस्पेक्टर विनोद बडोला, इंस्पेक्टर रविंद्र त्यागी, एसआई यशपाल भाटी, सुंदर गौतम की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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पाकिस्तान ने हैंडलर ने भेजी थी लोकेशन
पाकिस्तानी हैंडलर नासिर ने अशरफ के मोबाइल पर कालिंदी कुंज के उस घाट की लोकेशन भेजी थी, जहां हथियार छिपाए गए थे। इस जगह पर एक छोटा सा पिलर भी है। उसे पिलर का फोटो भेजा गया था। उसे व्हाट्स एप किया गया था कि भाईजान सामान की डिलीवरी लेने जाना है। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने कालिंदी कुंज के यमुना घाट से पत्थर के नीचे जमीन में दबाकर रखे गए हथियार व विस्फोटक बरामद कर लिए।
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नाम लेने के बजाय भाईजान कहता था हैंडलर
हैंडलर नासिर मोहम्मद अशरफ से बात करता तो उसका नाम नहीं लेता था। वह उसे भाईजान कहता था। हैंडलर ने हथियार लाने के लिए भी व्हाट्स एप कर लिखा था कि भाईजान सामान की डिलीवरी लेने जाना है। अशरफ दो मोबाइल फोन रखता था। पुलिस ने ये दोनों बरामद कर लिए हैं। हथियारों की डिलीवरी लाने के लिए हैंडलर दो दिन से फोन कर रहा था।
जम्मू-कश्मीर के लिए मिलती थी ज्यादा रकम
मोहम्मद अशरफ को हैंडलर उसके काम के हिसाब से पैसा देता था। वह भारत से जब भी कोई सूचना भेजता, तभी उसे पैसे मिलते थे। जम्मू-कश्मीर जाने के लिए उसे ज्यादा रकम दी जाती थी। वह हैंडलर के कहने पर ही जम्मू-कश्मीर जाता था। वहां से वह सूचनाएं हैंडलर को भेजता था। अशरफ ने बताया कि वह अब तक 30 से ज्यादा बार जम्मू-कश्मीर जा चुका है।

ई-मेल से करता था ज्यादातर संपर्क
मोहम्मद अशरफ ने पुलिस को बताया कि वह ई-मेल के जरिए हैंडलर से ज्यादा बात करता था। हालांकि कभी-कभार व्हाट्स एप से भी बात करता था। वह व्हाट्स एप चैटिंग को डिलीट कर देता था। पुलिस इसे रीट्राइव कराने के लिए दोनों मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए भेजेगी।
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