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उपहार सिनेमा अग्निकांड: ‘ट्रायल बाय फायर’ किताब में बयां की संघर्ष की आपबीती

Sat, 09 Oct 2021 06:18 AM IST
Jeet Kumar धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली।
धीरज बेनीवाल, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 09 Oct 2021 06:18 AM IST
सार

‘ट्रायल बाय फायर’ में करीब एक दर्जन अध्यायों में कृष्णामूर्ति दंपती ने अपने बच्चों उन्नति और उज्जवल को खोने, उनके बाद उनकी जिंदगी में आई उदासी और खामोशी को कागज पर उतारा है।

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Uphaar Cinema Fire, story of the struggle narrated in the book by couple
उपहार सिनेमा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपने दोनों बच्चों उन्नति और उज्ज्वल को खोने वाली नीलम कृष्णामूर्ति और शेखर कृष्णामूर्ति की जिंदगी इस हादसे के बाद ठहर गई थी।

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उन्होंने अपने और हादसे के दूसरे पीड़ितों के लिए इंसाफ की लड़ाई का बीड़ा उठाया और कानूनी लड़ाई लड़ी। इस मामले के होने से लेकर इसे अंजाम तक पहुंचाने के संघर्ष की कहानी को कृष्णामूर्ति दंपती ने 2016 में प्रकाशित किताब ‘ट्रायल बाय फायर’ के जरिये लोगों के सामने रखा है।
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उनकी इस किताब में हादसे के पीड़ित परिवारों से मिलने और उन्हें एकजुट कर एसोसिएशन ऑफ विक्टिम्स ऑफ उपहार ट्रेजेडी (अवूत) बनाने और कानूनी जंग के दौरान आई दिक्कतों का इस किताब में चित्रण किया गया है।
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नीलम कृष्णामूर्ति ने इस किताब में लिखा है कि शुक्रवार 13 जून 1997 को किस तरह उनके बच्चे उपहार सिनेमा में बॉर्डर फिल्म देखने गए थे। उन्हें शाम तक वापस आना था लेकिन वे लौटे नहीं। जब सिनेमा हॉल में आग लगने की जानकारी मिली तो उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उस समय वह अपने ऑफिस में थीं। वह पीड़ितों की भीड़ में अपने बच्चों की तलाश में निकल पड़ीं।

उन्होंने किताब में जिक्र किया कि एम्स में हताहतों को भर्ती करवाया गया था। उन्हें कैसे अपने बच्चों के इस हादसे में चले जाने की जानकारी मिली। इसके बाद उनकी जिंदगी में मानो वज्रपात हो गया। उन्होंने लिखा कि पीड़ितों में सभी उम्र के लोग थे। इनमें से ज्यादातर की मौत आग के कारण धुआं फैलने और उससे दम घुटने के कारण हुई थी।

उपहार मामले में आई कानूनी लड़ाई और उसमें वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी के सहयोग का भी कृष्णामूर्ति दंपती ने जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि तुलसी इस केस को पीड़ितों की ओर से लड़ने के लिए तैयार हुए तो उन्हें उससे काफी हौसला मिला था।


उन्होंने मुख्य केस और लंबी खिंचती सुनवाई, उसके बाद साक्ष्यों से छेड़छाड़ के मामले और कोर्ट में अंसल के लोगों द्वारा कथित रूप से धमकी मिलने की घटनाओं का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि दो मामलों में तो फैसला आ चुका है लेकिन धमकी मिलने वाले तीसरे मामले में सुनवाई चल रही है। दिसंबर में इस केस की सुनवाई होनी है।

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