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यूआईडीएआई: लूट-हत्या के आरोपी की पहचान के लिए भी नहीं दे सकते बायोमीट्रिक डाटा

Fri, 06 May 2022 06:41 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 06 May 2022 06:41 AM IST
सार

यूआईडीएआई ने बताया कि अंगुलियों के निशान, आंखों की पुतलियों के स्कैन और दूसरी जैविक विशेषताओं को कोर-बायोमीट्रिक डाटा श्रेणी में रखा गया है। इसे किसी को देने या किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग करने पर सख्त कानूनी पाबंदी है।

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UIDAI Biometric Data cannot be given even for the identity of robbery and Murder accused
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

हत्या और लूट के एक मामले में आरोपी की पहचान के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अभियोजन पक्ष द्वारा मांगा गया कोर बायोमीट्रिक डाटा देने से भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने इनकार कर दिया। उसने कहा, यह डाटा आधार अधिनियम के तहत केवल आधार कार्ड नंबर बनाने और कार्ड प्रमाणित करने में काम आता है। इसे किसी अपराध की जांच के उद्देश्य से जमा नहीं किया जाता।

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यूआईडीएआई ने बताया कि अंगुलियों के निशान, आंखों की पुतलियों के स्कैन और दूसरी जैविक विशेषताओं को कोर-बायोमीट्रिक डाटा श्रेणी में रखा गया है। इसे किसी को देने या किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग करने पर सख्त कानूनी पाबंदी है। लूट और हत्या का यह मामला 2018 का है। अभियोजन पक्ष ने अपराध स्थल से जुटाए कुछ अंगुलियों के निशान व तस्वीरों से अपराधियों को पकड़ने के लिए यूआईडीएआई से संबंधित जानकारी मांगी थी।
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डाटा देने के लिए व्यक्ति की अनुमति जरूरी
यूआईडीएआई ने कहा कि किसी व्यक्ति की बायोमीट्रिक जानकारियां बेहद विशिष्ट और संवेदनशील होती हैं। इसका दुरुपयोग हर हाल में रोकने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। आधार कार्ड का बाकी डाटा भी किसी दूसरे व्यक्ति या संस्था को देने से पहले संबंधित व्यक्ति की अनुमति अनिवार्य होती है।
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यह वैसे भी फॉरेंसिक जांच में कारगर नहीं : यह भी बताया कि आधार कार्ड के लिए आंखों की पुतलियों व अंगुलियों को स्कैन कर जमा किया गया बायोमीट्रिक डाटा वैसे भी सभी तरह की तकनीकी, मानकों व फॉरेंसिक जरूरतों के अनुसार नहीं होता। संभव है कि यह डाटा फॉरेंसिक जांच के लिए कारगर न हो।

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