नई दिल्ली। किसान संगठनों और सरकार के बीच शुक्रवार को हुई 9वें चरण की बातचीत बेनतीजा रहने से किसानों में आक्रोश है। गाजीपुर बॉर्डर पर डटे किसानों ने बड़े तल्ख लहजे में कहा कि अब हमलोगों ने कुछ करने के लिए ठान लिया है तो इतनी आसानी से हार नहीं मानेंगे। बिना तीनों कृषि कानूनों को वापस कराए दिल्ली से नहीं लौटेंगे। 26 जनवरी को दुनिया देश के किसानों की ताकत देखेगी। किसान पूरी तैयारी के साथ दिल्ली में प्रवेश करेंगे और ट्रैक्टर परेड करने के बाद फिर दिल्ली की सीमाओं पर आकर डट जाएंगे।
किसानों ने कहा कि उन्हें पता था सरकार उनकी बात नहीं मानेगी। बावजूद इसके वह आगे भी सरकार से बातचीत जारी रखेंगे ताकि सरकार यह न कह सके कि किसान बातचीत करने को राजी नहीं हैं। किसानों ने कहा कि हम 18 जनवरी को फिर सरकार से बातचीत करेंगे। लेकिन बातचीत तीनों कानूनों की समाप्ति और एमएसपी पर कानून बनाने पर ही होगी। अमेठी से आए किसान राकेश सिंह ने कहा कि जो लोग घर-बार छोड़कर आंदोलन में शामिल हैं, वह तभी घर वापस जाएं जब उनके बदले घर से दूसरा सदस्य यहां आए। लोग घर के काम काज निपटाकर यहां आते जाते रहें। यह तय है कि आंदोलन अभी और लंबा चलेगा। गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंची महिला संगठनों ने कहा कि सरकार ने कभी नोटबंदी, कभी कोरोना के नाम पर गरीबों और किसानों केे साथ छल किया है। चंडीगढ़ से आईं गुरजीत कौर ने कहा कि किसानों का दर्द अब देश के हर नागरिक की समझ में आ रहा है।