फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   The court has convicted the person who gave shelter to the one who pointed pistol at the police

दिल्ली दंगा: अदालत ने कहा- हेड कांस्टेबल पर पिस्टल तानने के आरोपी को शरण देने वाला है दोषी

Sat, 11 Dec 2021 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 11 Dec 2021 05:49 AM IST
सार

दरअस्ल आरोपी ने अदालत के समक्ष अपराध स्वीकार कर लिया है। दंगों के बाद पठान ने फरार होने के बाद यूपी के शामली में कलीम के घर शरण ली थी।

विज्ञापन
The court has convicted the person who gave shelter to the one who pointed pistol at the police
शाहरुख पठान - फोटो : amar ujala

विस्तार

अदालत ने दिल्ली दंगो के दौरान हेड कांस्टेबल पर पिस्टल तानने के आरोपी शाहरुख पठान को शरण देने के मामले में आरोपी कलीम अहमद को दोषी ठहराया है। दरअस्ल आरोपी ने अदालत के समक्ष अपराध स्वीकार कर लिया है। दंगों के बाद पठान ने फरार होने के बाद यूपी के शामली में कलीम के घर शरण ली थी।

विज्ञापन


पुलिस के अनुसार पठान ने 24 फरवरी 2020 को दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल दीपक दहिया को मारने के इरादे से पिस्तौल का निशाना बनाया था। अदालत ने हाल ही में उसके खिलाफ अभियोग तय किए हैं। इस घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पठान फरार हो गया और 3 मार्च 2020 को उत्तर प्रदेश के शामली जिले के बस स्टैंड से उसे पकड़ लिया गया। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है।
विज्ञापन


पुलिस ने दावा किया कि पठान ने फरार होने के बाद दोषी कलीम अहमद के शामली स्थित घर में शरण ली थी, जिसकी उनके मोबाइल फोन लोकेशन से पुष्टि होती है। पुलिस के अनुसार पठान 26-27 फरवरी से 3 मार्च की रात तक अहमद के घर पर रहा। अहमद ने दंगा आरोपी को नया मोबाइल फोन खरीदने में भी मदद की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने आरोपी कलीम के खिलाफ 7 दिसंबर को धारा 216 के तहत अपराधी को शरण देने के आरोप में अभियोग तय करते हुए आरोपी से पूछा कि क्या वह अपना अपराध स्वीकार करते है। अदालत के पूछने पर आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया।

अदालत ने कहा कि आरोपी ने अपने वकील की उपस्थिति में स्वेच्छा से उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वीकार किया है ऐसे में उसे दोषी ठहरया जाता है। अदालत ने उसे सजा सुनाने के मुद्दे पर सुनवाई 16 दिसंबर की तारीख तय की है। इस आरोप में अधिकतम सजा सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

एसपीपी के पेश न होने पर अदालत ने जताई नाराजगी

अदालत ने दिल्ली दंगों के एक मामले में विशेष लोक अभियोजकों के पेश न होने के कारण संबंधित मामलों के निपटान में देरी पर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेतते हुए संबंधित डीसीपी को मामले में एसपीपी नियुक्त करने व रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा इससे पहले भी मैंने इस स्थिति से डीसीपी को सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश दिया था। अदातल ने आदेश की एक प्रति डीसीपी को भेजने का निर्देश देते हुए उन्हें इस पहलू को गंभीरता से लेने और दंगो के मामलों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए एसपीपी नियुक्त करने को कहा है। अदालत ने डीसीपी को एक सप्ताह में इस मुद्दे पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

अदालत करावल नगर थाने में दर्ज प्राथमिकी पर गवाहों के बयान दर्ज कर रही है। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने मामले में पेश होने में असमर्थता व्यक्त करते हुए कहा कि वह उच्च न्यायालय में व्यस्त है।

अदालत ने कहा दिलचस्प बात यह है कि जब मामले में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व करने के लिए दो अन्य विशेष लोक अभियोजकों को बुलाया गया, तो उन्होंने भी पेश होने में असमर्थता व्यक्त की और सकारात्मक जवाब नहीं दिया।

अदालत ने कहा इन दंगा मामलों के संबंध में यह स्थिति है जो प्रकृति में बहुत संवेदनशील हैं और जिसके लिए यह विशेष अदालत बनाई गई है। इन मामलों को पुलिस द्वारा गठित विशेष पीपी के एक पैनल को सौंपा गया है ताकि उचित और अभियोजन सुनिश्चित किया जा सके। 

अदालत ने कहा कई मामलों में पाया है कि विशेष पीपी जिन्हें मामले सौंपे गए हैं अदालत में पेश नहीं होते, जिसके कारण मामलों को बिना किसी कार्यवाही के स्थगित करना पड़ता है जिसके मामलों के निपटान में देरी हो रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी सीएमएम कोर्ट ने दिल्ली दंगों के मामलों के अभियोजन के लिए उचित उपाय करने में अपने पुलिस अधिकारियों की विफलता के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी, जिससे मामलों की सुनवाई या सुनवाई में देरी से बचा जा सके।

अदालत ने दंगों के मामलों में अभियोजन पक्ष के साथ-साथ जांच एजेंसी की ओर से इस तरह के ढुलमुल रवैये को बार-बार न केवल डीसीपी संयुक्त सीपी के संज्ञान में लाया गया है, बल्कि पुलिस आयुक्त के ध्यान में भी लाया गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed