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सुप्रीम कोर्ट: कालकाजी मंदिर मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से इनकार, जानें पूरा मामला

Wed, 27 Apr 2022 09:41 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Wed, 27 Apr 2022 09:41 PM IST
सार

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मंदिर के दिन-प्रतिदिन के प्रशासन और सुरक्षा के मुद्दों की देखभाल के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जेआर मिधा की मंदिर के प्रशासक के रूप में नियुक्ति के हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया।

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Supreme Court refuses to stay High Court's order in Kalkaji temple case
दिल्ली के कालकाजी मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ी भक्तों की भीड़ - फोटो : ANI-फाइल फोटो

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कालकाजी मंदिर के प्रशासन और रखरखाव के संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर नोटिस जारी किया। साथ ही मंदिर में सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए बरीदारों के बीच बारी अधिकारों से संबंधित विवादों के समाधान को लेकर भी नोटिस जारी किया गया है।

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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मंदिर के दिन-प्रतिदिन के प्रशासन और सुरक्षा के मुद्दों की देखभाल के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति जेआर मिधा की मंदिर के प्रशासक के रूप में नियुक्ति के हाईकोर्ट के निर्देश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि पूरा मंदिर परिसर प्रशासक के नियंत्रण में होगा।

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हाईकोर्ट ने कहा था कि मंदिर परिसर के इर्दगिर्द अनधिकृत कब्जा करने वाले या दुकानदार जिनके पास कब्जा करने का कोई वैध कानूनी अधिकार (तहबाजारी ली लायसेंस) नहीं है, उन्हें दिल्ली पुलिस और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) के समन्वय से हटाया जा सकता है।

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान महंत सुरेंद्र नाथ (अपीलार्थी) की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने पीठ के समक्ष कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष मामला विवाहित बेटी के पूजा सेवा में हिस्सा लेने व पूजा सेवा करने के अधिकारों के संबंध में था लेकिन हाईकोर्ट ने मामले के दायरे का विस्तार किया और मंदिर को अपने कब्जे में ले लिया। इसे रिसीवर के नीचे रख दिया। धवन ने प्रस्तुत किया कि आदेश के खिलाफ पहली अपील में हाईकोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र को पार कर लिया।

उन्होंने कहा कि हमारे पूरे मंदिर पर कब्जा कर लिया गया है। एक पुनर्विकास योजना चल रही है। उन्होंने कहा कि यह अनसुना है कि महंत का मंदिर के प्रबंधन पर अधिकार नहीं है। यह कहते हुए वरिष्ठ वकील धवन ने 27 सितंबर, 2021 के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। लेकिन पीठ ने उक्त राहत देने से इनकार कर दिया। हालांकि पीठ ने इस नए मामले में नोटिस जारी किया और कहा कि छुट्टियों के बाद सुनवाई होगी।

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