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आपबीती : मैं पढ़ी-लिखी नहीं, पति की मौत के बाद कबाड़ बेचकर पाल रही हूं बच्चे...

Fri, 10 Jun 2022 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 10 Jun 2022 05:49 AM IST
सार

पश्चिम दिल्ली के हरी नगर स्थित झुग्गी निवासी सुनीता ने सुनाई आपबीती, कोरोना से पति की मौत के बाद बंद हो गई थी आमदनी। 
 

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Sunita, a slum resident of Hari Nagar, West Delhi, narrated her ordeal after death of husbad due to corona
सर्वे करती महिला कर्मचारी... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साहब, मैं पढ़ी-लिखी नहीं हूं। पति की कोरोना से मौत के बाद घर की आमदनी बंद हो गई। छह महीने तक मैं और मेरे तीनों बच्चे भरपेट खाना नहीं खा सके। मुझे कोई काम आता भी नहीं। इसलिए मैं कबाड़ का काम कर रही हूं। यहां मेरी जैसी कई महिलाएं हैं जो पति की मौत के बाद ये काम कर रही हैं। यह पीड़ा पश्चिम दिल्ली के हरी नगर स्थित झुग्गी निवासी सुनीता की है। जिनके पति की मौत पिछले वर्ष कोरोना की दूसरी लहर में हुई थी।

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हरी नगर के अलावा मायापुरी, घंटाघर और उत्तम नगर इलाकों में स्थित झुग्गी परिवारों पर महामारी का काफी बुरा असर पड़ा है। ‘अमर उजाला’ ने जब इन परिवारों से बातचीत की तो पता चला कि इन परिवारों पर सामाजिक और आर्थिक स्तर पर काफी प्रभाव पड़ा। इन्हें ठीक से भोजन नहीं मिला। रोजगार छूट गया। बच्चों का स्कूल छूट गया। घरों में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले भी बढ़े।
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दिल्ली सरकार के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के जरिए राशन वितरित कर रही है। दिल्ली सरकार के मंत्री इमरान हुसैन का यहां तक कहना है कि मार्च 2020 से उनकी सरकार मुफ्त राशन उन्हें भी दे रही है जिनके पास राशन कार्ड नहीं हैं। जबकि दिल्ली रोजी रोटी अधिकार अभियान (डीआरआरएए) की ऑडिट रिपोर्ट कहती है कि 110 राशन दुकानों पर जब निरीक्षण किया तो लगभग 40 फीसदी दुकानें काम के घंटों के दौरान बंद थीं। रिपोर्ट में यह भी बताया कि अत्यधिक कठिनाई के समय में केवल 28 फीसदी दुकानों पर पूरा राशन वितरण किया जा रहा था।
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ऑडिट टीम में शामिल खाद्य अधिकार प्रचारक एनी राजा व दीपा सिन्हा बताते हैं कि  जिन लोगों की आजीविका चली गई थी, वे अपना और परिवार का पेट भरने के लिए पीडीएस के तहत दिए जाने वाले खाद्यान्न पर निर्भर थे। लेकिन, राशन वितरण में देरी से लोगों को बाजार से मजबूरन अन्न खरीदना पड़ा।

इससे लोगों पर वित्तीय बोझ पड़ा। झुग्गी के अलावा मध्यम वर्गीय परिवार और कामकाजी महिलाएं भी प्रभावित हुईं। उत्तम नगर निवासी राजकुमारी (36) बताती हैं कि वह  निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं। लॉकडाउन की शुरुआत में अनुभव अलग था लेकिन फिर काफी दिक्कतें होने लगीं। वे दिन भर घर में काम करती रहती थीं और इससे उनके काम पर भी असर पड़ा। राष्ट्रीय अपराध शाखा ब्यूरो रिकॉर्ड के अनुसार साल 2021 में महिलाओं के खिलाफ दिल्ली में अपराध बढ़ा है। साल 2020 की तुलना में 2021 के दौरान दुष्कर्म के मामलों में 21.69 फीसदी की वृद्धि हुई। यह स्थिति तब थी जब दिल्ली सात

महीने से भी अधिक समय तक लॉकडाउन में रहा।
19 से ज्यादा झुग्गियों में 85 हुईं विधवा, 77 के पास रोजगार के लिए कौशल नहीं : अप्रैल में जारी प्रोत्साहन इंडिया संस्था की सर्वे रिपोर्ट बताती है कि पश्चिमी दिल्ली के 19 झुग्गी इलाकों में 85 महिलाओं के पति की मौत कोरोना की चपेट में आने से हुई। इनमें से 77 महिलाओं के पास रोजगार के लिए कौशल नहीं है। इनमें ज्यादातर पढ़ी-लिखी नहीं हैं जबकि 60 से ज्यादा महिलाएं तीन-तीन बच्चों को पाल रही हैं।

...अब मेरे अंदर हिम्मत नहीं रही
हर्षिता (30) कहती हैं कि कोरोना ने पति को छीन लिया। अब मेरे अंदर हिम्मत नहीं रहीं। पहले समझ नहीं आया, क्या करूं? कई जगह नौकरी मांगी लेकिन काम नहीं मिला। कुछ दिन बाद मुझे एक सिलाई दुकान में काम मिल गया। यहां एक पीस बनाने पर मुझे 10 पैसे मिलते हैं।

सरकार को तत्काल देनी चाहिए मदद : सामाजिक कार्यकर्ता स्वाती महापात्रा बताती हैं कि सरकार को ऐसे मामलों में तत्काल मदद पहुंचानी चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों पर हर तरफ से संकट है। इन्होंने अपने परिजनों को खोया है।

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