{"_id":"5f0e0b6d8ebc3e636c664a07","slug":"structural-audit-of-buildings-in-delhi-to-be-done-ashram-news-noi523361593","type":"story","status":"publish","title_hn":"भूकंप से लगातार हिलती दिल्ली में भवनों का होगा संरचनात्मक ऑडिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भूकंप से लगातार हिलती दिल्ली में भवनों का होगा संरचनात्मक ऑडिट
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली। सीस्मिक जोन चार में आने वाली राजधानी में लगातार भूकंप के झटकों को देखते हुए अब सभी भवनों का संरचनात्मक ऑडिट किया जाएगा। इसमें निजी और सरकारी दोनों ही संपत्तियां शामिल हैं। इस संबंध में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अपनी वेबसाइट पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार आदेश भी जारी किया है।
दरअसल, राजधानी में भवनों के संरचनात्मक ढांचे की मजबूती को परखने के लिए हाईकोर्ट ने कुछ समय पहले सभी सिविक एजेंसियों को संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट जमा कराने के लिए कहा था। इसे देखते हुए डीडीए ने 21 मार्च 2001 तक बनी हुई सभी सरकारी व गैर सरकारी भवनों के लिए संरचनात्मक ऑडिट को जरूरी बताया है। इस संबंध में संपत्ति मालिकों को अपने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराकर छह महीने के भीतर रिपोर्ट को डीडीए में जमा कराना होगा। यदि संपत्ति मालिक ऐसा नहीं करते हैं तो डीडीए द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
डीडी अनुसार, 2001 तक बनी 15 मीटर और इससे ऊंची इमारतों के मालिकों को भवन का ऑडिट मान्यता प्राप्त किसी सरकारी संस्थान के अभियंता से कराना होगा। जिसमें यह पता चलेगा कि इमारत भूकंप अथवा किसी अन्य प्राकृतिक आपदा सहने में कितनी सक्षम है। यदि भवन में कोई खामी पाई जाती है तो इसके लिए संरचानात्मक अभियंताओं द्वारा बताए गए सुझावों के तहत भवन मालिकों को स्वयं उसकी मरम्मत समेत अन्य काम कराने होंगे। इसके बाद ऑडिट रिपोर्ट को छह महीने के भीतर डीडीए में जमा कराना होगा। यह उन सभी भवनों पर लागू है जिन्हें राजधानी में बने हुए 30 साल पूरे हो चुके हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली के तीनों नगर निगम भी अपने अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में संपत्ति मालिकों से आग्रह कर भवन संरचनात्मक ऑडिट करवा रहे हैं। इस संबंध में तीनों नगर निगमों द्वारा नोटिस भी जारी किया गया है। इसके बाद नगर निगम को भवनों के संरचनात्मक रूप को लेकर शिकायतें मिलनी भी शुरू हो चुकी हैं।
----------------
विज्ञापन
दरअसल, राजधानी में भवनों के संरचनात्मक ढांचे की मजबूती को परखने के लिए हाईकोर्ट ने कुछ समय पहले सभी सिविक एजेंसियों को संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट जमा कराने के लिए कहा था। इसे देखते हुए डीडीए ने 21 मार्च 2001 तक बनी हुई सभी सरकारी व गैर सरकारी भवनों के लिए संरचनात्मक ऑडिट को जरूरी बताया है। इस संबंध में संपत्ति मालिकों को अपने भवनों का संरचनात्मक ऑडिट कराकर छह महीने के भीतर रिपोर्ट को डीडीए में जमा कराना होगा। यदि संपत्ति मालिक ऐसा नहीं करते हैं तो डीडीए द्वारा उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
विज्ञापन
डीडी अनुसार, 2001 तक बनी 15 मीटर और इससे ऊंची इमारतों के मालिकों को भवन का ऑडिट मान्यता प्राप्त किसी सरकारी संस्थान के अभियंता से कराना होगा। जिसमें यह पता चलेगा कि इमारत भूकंप अथवा किसी अन्य प्राकृतिक आपदा सहने में कितनी सक्षम है। यदि भवन में कोई खामी पाई जाती है तो इसके लिए संरचानात्मक अभियंताओं द्वारा बताए गए सुझावों के तहत भवन मालिकों को स्वयं उसकी मरम्मत समेत अन्य काम कराने होंगे। इसके बाद ऑडिट रिपोर्ट को छह महीने के भीतर डीडीए में जमा कराना होगा। यह उन सभी भवनों पर लागू है जिन्हें राजधानी में बने हुए 30 साल पूरे हो चुके हैं।
विज्ञापन
गौरतलब है कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिल्ली के तीनों नगर निगम भी अपने अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में संपत्ति मालिकों से आग्रह कर भवन संरचनात्मक ऑडिट करवा रहे हैं। इस संबंध में तीनों नगर निगमों द्वारा नोटिस भी जारी किया गया है। इसके बाद नगर निगम को भवनों के संरचनात्मक रूप को लेकर शिकायतें मिलनी भी शुरू हो चुकी हैं।
----------------