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दिल्ली: नाबालिगा से दुष्कर्म मामले में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Fri, 26 Nov 2021 07:58 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Fri, 26 Nov 2021 07:58 PM IST
सार

न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने दिल्ली पुलिस का पक्ष सुनने के बाद फैसले पर रोक लगाई है। अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण बताया था।

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Stay on decision to take action against police officers in separate chargesheet filed in minor rape case
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक नाबालिगा से दुष्कर्म मामले में दो अलग-अलग आरोप पत्र दाखिल करने के लिए जांच अधिकारी और एसएचओ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्देश देने वाले निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी।

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न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने दिल्ली पुलिस का पक्ष सुनने के बाद फैसले पर रोक लगाई है। अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण बताया था। ट्रायल कोर्ट ने संबंधित आईओ और एसएचओ के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया था।
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एसएचओ और आईओ ने फैसले को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी है। याचिका में उन्होंने अपने खिलाफ उक्त टिप्पणी और निर्देश को हटाने की भी मांग की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गीता लूथरा ने कहा याचिकाकर्ताओं की ओर से कोई जानबूझकर या प्रेरित कार्य नहीं किया गया और यह केवल एक अनजाने में हुई त्रुटि थी। 
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उन्होंने कहा कि पुलिस फाइल पर रखा गया आरोप पत्र कुछ भिन्न है, जिसके लिए संशोधन किए गए और इसे अदालत के रिकॉर्ड पर दायर किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस फ़ाइल में रखी गई चार्जशीट की प्रति अदालत के रिकॉर्ड पर दर्ज नहीं की गई। इसके अलावा जो न्यायालय के रिकॉर्ड में रखा गया है वह केवल संशोधित आरोप पत्र है। याचिकाकर्ताओं की ओर से केवल एक अनजाने में त्रुटि हुई।

उन्होंने कहा कि अदालत के रिकॉर्ड पर केवल फिजिकल संशोधित आरोप पत्र दायर किया गया है। अनजाने में उसी का ई-चालान पुलिस ने पेश किया है। लूथरा ने कहा कि जब शिकायतकर्ता के वकील ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष आरोप पत्र की प्रति मांगने के लिए एक आवेदन किया तो अदालत के कर्मचारियों ने अनजाने में संशोधित चार्जशीट की आपूर्ति करने के बजाय जांच अधिकारी से परामर्श किए बिना पुलिस फाइल से चार्जशीट की प्रति दे दी।


अदालत ने फैसले पर रोक लगाते हुए दिल्ली सरकार को अपना पक्ष रखने व निचली अदालत के रिकॉर्ड को पेश करने का निर्देश दिया है। ट्रायल कोर्ट ने 18 नवंबर के आदेश में पुलिस के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था यदि अधिकारियों से सख्ती से नहीं निपटा गया तो जनता पुलिस प्रणाली में अपना विश्वास खो देगी।

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