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Delhi News: चिड़ियाघर में वन्यजीवों की देखरेख के लिए एसएससी ने भर्ती किए 93 एमटीएस
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जू कीपर, गार्डिंग, सुरक्षा व वर्कशॉप सेक्शन में की गई भर्ती
अधिकतर पदों पर पढ़े-लिखे कर्मचारी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। चिड़ियाघर में घूमने आने वाले दर्शकों व वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। यहां जू कीपर, गार्डिंग, सुरक्षा व वर्कशॉप सेक्शन में रिक्त पदों की भर्ती की गई है। ऐसे में स्थायी पदों पर नियुक्ति से वन्यजीवों के संरक्षण में आ रही लापरवाही दूर होने की संभावना है। वन्य जीवों की देखभाल अब मानकों के अनुसार की जाएगी। इसमें 93 मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) को भर्ती किया गया है। यह भर्ती प्रक्रिया स्टाफ सलेक्शन कमिशन (एसएससी) के तहत की गई है। इसमें अधिकतर पदों पर पढ़े-लिखे कर्मचारी शामिल हैं, जिसमें कुछ तो एमएससी व बीटेक पास हैं।
बतादें कि दिसंबर 2003 के बाद से जू में रिक्त पड़े स्थायी पदों में नियुक्ति शुरू की गई है। 20 साल बाद शुरू हुई भर्ती की प्रक्रिया में स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने बृहस्पतिवार तक 93 डोजियर जू को भेज दिए हैं। चिड़ियाघर का एक नवंबर 1959 में गठन के बाद 45 पदों के लिए 203 कर्मचारी व अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। ऐसे में वर्ष 2021-22 तक सभी वर्ग के 136 पद रिक्त पड़े थे, जो दिसंबर 23 तक करीब 150 तक पहुंच गए हैं। स्थायी नियुक्ति नहीं होने की वजह से वन्यजीवों की देखरेख अस्थायी में आए लोगों के भरोसे हो रही थी। ऐसे में अब वन्यजीवों की देखभाल व संरक्षण करने में मदद मिलेगी। चिड़ियाघर प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनको अभी दो से तीन माह तक अलग-अलग चिड़ियाघर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद भी इन्हें जो पहले से जू कीपर हैं, उनके साथ लगाया जाएगा।
कई उम्मीदवार भर्ती को लेकर मायूस
पटना से आए चंदन कुमार ने बताया कि वह बीएसी गणित ऑनर्स से पास हैं। वह कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि एमटीएस में जू में नौकरी लगेगी। वह मायूसी के साथ कहते हैं कि इतनी परेशानी से यह परीक्षा पास की, उम्मीद मंत्रालय में काम करने की थी। वहां भर्ती होती तो भविष्य में किसी और परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिलती। वहीं, पश्चिम बंगाल से आईं रिनी घोष ने कहा कि एक तरफ तो खुशी है कि वन्यजीवों के बीच काम करना होगा, लेकिन यहां जानवरों की देखरेख व सफाई भी करनी पड़ सकती है, यह नहीं पता था। वहीं, रामानंद यादव ने बताया कि वह एम.कॉम व बीएड कर चुके हैं। वह कहते हैं कि यहां काम करने का अलग अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही विशाल कुमार कहते हैं कि अगर इसी तरह वन्यजीवों के बाड़े में काम करना पड़ेगा, तो शायद कुछ माह बाद ही नौकरी से इस्तीफा देना पड़े। वह कहते हैं कि कमिशन हमें कहीं और भेज देता तो अच्छा रहता, जू में काम करना होगा यह कभी नहीं सोचा था।
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वर्जन
एसएससी को 107 कर्मचारियों का प्रस्ताव भेजा गया था, इसमें से 101 के डोजियर भेजने में सहमति जताई थी। 28 दिसंबर तक 93 डोजियर मिल चुके हैं। उम्मीदवारों के शैक्षणिक दस्तावेज की जांच, स्वास्थ्य जांच और पुलिस वेरिफिकेशन होने के बाद वन्यजीवों के देखभाल का प्रशिक्षण देने के बाद उनकी ज्वॉइनिंग होगी। इस पर भी विचार किया जा रहा है कि यह कर्मचारी इतने पढ़े-लिखे हैं कि एक समय बाद इनकी पदोन्नति कर रेंजर पद तक पहुंचाया जाए। -आकांक्षा महाजन, निदेशक, चिड़ियाघर
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अधिकतर पदों पर पढ़े-लिखे कर्मचारी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। चिड़ियाघर में घूमने आने वाले दर्शकों व वन्यजीव प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। यहां जू कीपर, गार्डिंग, सुरक्षा व वर्कशॉप सेक्शन में रिक्त पदों की भर्ती की गई है। ऐसे में स्थायी पदों पर नियुक्ति से वन्यजीवों के संरक्षण में आ रही लापरवाही दूर होने की संभावना है। वन्य जीवों की देखभाल अब मानकों के अनुसार की जाएगी। इसमें 93 मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) को भर्ती किया गया है। यह भर्ती प्रक्रिया स्टाफ सलेक्शन कमिशन (एसएससी) के तहत की गई है। इसमें अधिकतर पदों पर पढ़े-लिखे कर्मचारी शामिल हैं, जिसमें कुछ तो एमएससी व बीटेक पास हैं।
बतादें कि दिसंबर 2003 के बाद से जू में रिक्त पड़े स्थायी पदों में नियुक्ति शुरू की गई है। 20 साल बाद शुरू हुई भर्ती की प्रक्रिया में स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने बृहस्पतिवार तक 93 डोजियर जू को भेज दिए हैं। चिड़ियाघर का एक नवंबर 1959 में गठन के बाद 45 पदों के लिए 203 कर्मचारी व अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। ऐसे में वर्ष 2021-22 तक सभी वर्ग के 136 पद रिक्त पड़े थे, जो दिसंबर 23 तक करीब 150 तक पहुंच गए हैं। स्थायी नियुक्ति नहीं होने की वजह से वन्यजीवों की देखरेख अस्थायी में आए लोगों के भरोसे हो रही थी। ऐसे में अब वन्यजीवों की देखभाल व संरक्षण करने में मदद मिलेगी। चिड़ियाघर प्रबंधन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इनको अभी दो से तीन माह तक अलग-अलग चिड़ियाघर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद भी इन्हें जो पहले से जू कीपर हैं, उनके साथ लगाया जाएगा।
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कई उम्मीदवार भर्ती को लेकर मायूस
पटना से आए चंदन कुमार ने बताया कि वह बीएसी गणित ऑनर्स से पास हैं। वह कहते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि एमटीएस में जू में नौकरी लगेगी। वह मायूसी के साथ कहते हैं कि इतनी परेशानी से यह परीक्षा पास की, उम्मीद मंत्रालय में काम करने की थी। वहां भर्ती होती तो भविष्य में किसी और परीक्षा की तैयारी करने में मदद मिलती। वहीं, पश्चिम बंगाल से आईं रिनी घोष ने कहा कि एक तरफ तो खुशी है कि वन्यजीवों के बीच काम करना होगा, लेकिन यहां जानवरों की देखरेख व सफाई भी करनी पड़ सकती है, यह नहीं पता था। वहीं, रामानंद यादव ने बताया कि वह एम.कॉम व बीएड कर चुके हैं। वह कहते हैं कि यहां काम करने का अलग अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही विशाल कुमार कहते हैं कि अगर इसी तरह वन्यजीवों के बाड़े में काम करना पड़ेगा, तो शायद कुछ माह बाद ही नौकरी से इस्तीफा देना पड़े। वह कहते हैं कि कमिशन हमें कहीं और भेज देता तो अच्छा रहता, जू में काम करना होगा यह कभी नहीं सोचा था।
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एसएससी को 107 कर्मचारियों का प्रस्ताव भेजा गया था, इसमें से 101 के डोजियर भेजने में सहमति जताई थी। 28 दिसंबर तक 93 डोजियर मिल चुके हैं। उम्मीदवारों के शैक्षणिक दस्तावेज की जांच, स्वास्थ्य जांच और पुलिस वेरिफिकेशन होने के बाद वन्यजीवों के देखभाल का प्रशिक्षण देने के बाद उनकी ज्वॉइनिंग होगी। इस पर भी विचार किया जा रहा है कि यह कर्मचारी इतने पढ़े-लिखे हैं कि एक समय बाद इनकी पदोन्नति कर रेंजर पद तक पहुंचाया जाए। -आकांक्षा महाजन, निदेशक, चिड़ियाघर