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Delhi: दिल्ली में ठोस कचरा प्रबंधन फेल, सीपीसीबी के वैज्ञानिक ने एनजीटी में दाखिल हलफनामे में किया खुलासा
Tue, 06 Jan 2026 06:09 AM IST
Digvijay Singh
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 06 Jan 2026 06:09 AM IST
सार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की सालाना रिपोर्ट 2024-25 ने चिंता बढ़ा दी है। शहर में हर दिन निकलने वाले कचरे को संभालने की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। दिल्ली में रोजाना करीब 11,852 टन ठोस कचरा पैदा हो रहा है।
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(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की सालाना रिपोर्ट 2024-25 ने चिंता बढ़ा दी है। शहर में हर दिन निकलने वाले कचरे को संभालने की व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। दिल्ली में रोजाना करीब 11,852 टन ठोस कचरा पैदा हो रहा है। इसे संभालने की क्षमता सिर्फ 8,173 टन है (वास्तव में 7,611 टन) है। ऐसे में करीब 64 फीसदी ही प्रोसेस होता है जबकि 4,241 टन (36 फीसदी) कचरा भलस्वा और गाजीपुर जैसे डंपसाइट्स पर फेंक दिया जाता है, जो समस्या की जड़ है। यह खुलासा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के वैज्ञानिक (एफ) जी. तिरुमूर्ति ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में हलफनामा दाखिल किया है।
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सीमित संसाधनों और अधूरी व्यवस्थाओं के कारण दिल्लीवासियों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। सीपीसीबी ने रिपोर्ट में माना है कि कचरे और उसके वैज्ञानिक निपटान के बीच बड़ा अंतर है। ठोस कचरा प्रबंधन नियम 2016 के तहत जिम्मेदारियां साफ हैं। इसमें दिल्ली की शहरी विकास विभाग (यूडीडी) को नियमों को लागू करवाना है। एमसीडी को कचरा इकट्ठा करना, अलग-अलग करना, ले जाना, स्टोर करना और ट्रीटमेंट करना है। यही नहीं, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को नियमों की पालना करवानी है।
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2025 से 2028 तक अतिरिक्त 7,750 टन प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ेगी
रिपोर्ट में सीपीसीबी ने बताया कि 2025 से 2028 तक अतिरिक्त 7,750 टन प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाई जाएगी, ताकि कचरा पूरी तरह संभाला जा सके। एनजीटी के एक दूसरे मामले में दिल्ली के लिए एक समिति बनाई गई है, जिसकी अगुवाई उपराज्यपाल करते हैं। इसमें मुख्य सचिव, विभिन्न विभागों के सचिव, डीडीए के उपाध्यक्ष और अन्य अधिकारी शामिल हैं। यह समिति नए प्लांट बनाने, पुराने सुधारने और पुराने कचरे को साफ करने पर काम कर रही है। बोर्ड ने वादा किया कि वे अदालत के आदेशों का पालन करेंगे।
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दक्षिण-पूर्वी दिल्ली में हालात बदतर
यह मामला खास तौर पर दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के शाहीन बाग और सरिता विहार जैसे इलाकों से जुड़ा है, जहां शिकायत की गई है कि कई-कई दिनों तक कचरा नहीं उठाया जाता, जिससे दुर्गंध फैलती है और लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है। सीपीसीबी ने याद दिलाया है कि जल और वायु अधिनियम के तहत गठित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियां अपने-अपने क्षेत्रों में इन कानूनों को लागू कराने और उनका पालन सुनिश्चित कराने के लिए सशक्त हैं। एनजीटी ने 16 जुलाई, 2025 को इस पर सुनवाई शुरू की और सीपीसीबी को पक्षकार बनाया।
मामला एक मीडिया रिपोर्ट से शुरू हुआ
मामला 12 जून 2025 को मीडिया रिपोर्ट से शुरू हुआ। शीर्षक था कि हम घरों के अंदर भी बदबू महसूस कर सकते हैं। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के इलाके कचरे से घुट रहे हैं। इसमें बताया गया है कि शाहीन बाग की सड़कें, जहां आमतौर पर खाने की दुकानें लगती हैं, अब सड़े कचरे की बदबू से भरी हैं। 40-फुट्टा रोड से नाम से मशहुर हाई टेंशन रोड पर घरों के पास कचरे के ढेर लगे हैं, जहां मक्खियां भिनभिना रही हैं। लोगों का आरोप है कि बाहर निकलने के लिए मुंह ढकना पड़ता है, और बदबू घरों में घुस आती है। दुकानदारों का आरोप था कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की गाड़ियां 5 दिनों से नहीं आईं।
किसकी क्या जिम्मेदारी?
देश में ठोस कचरे के सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 लागू किए हैं। इसके नियम 11(1) के अनुसार, दिल्ली सरकार का शहरी विकास विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि दिल्ली के संबंधित स्थानीय निकाय इन नियमों का पालन करें। इसके साथ ही, स्थानीय निकाय के रूप में दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पर नगर निगम क्षेत्र में पैदा होने वाले कचरे के संग्रह, छंटाई, परिवहन, भंडारण और प्रसंस्करण की मुख्य जिम्मेदारी है। साथ ही, कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों और डंपसाइटों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी एमसीडी की है।