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एसआईआर बना सिर दर्द!: तीन दिन में दो बार बदले बीएलओ, नंबर आयोग ने भेजा, फोन किया तो बोले-आप कौन?
Wed, 30 Sep 2026 07:55 AM IST
अनुज कुमार
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 30 Sep 2026 07:55 AM IST
सार
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू होते ही आवेदकों को नई उलझनों का सामना करना पड़ रहा है। फॉर्म-6 भरने के बाद चुनाव आयोग के संदेशों में सत्यापन के लिए अलग-अलग बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के नाम और नंबर आ रहे हैं।
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दिल्ली एसआईआर
- फोटो : अमर उजाला GFX
विस्तार
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया शुरू करते ही आवेदक नई उलझन में फंस रहे हैं। फॉर्म-6 भरने के बाद चुनाव आयोग की ओर से मोबाइल पर भेजे जा रहे संदेशों में सत्यापन के लिए अलग-अलग बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के नाम और नंबर सामने आ रहे हैं।
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परेशानी तब बढ़ जाती है, जब आवेदक संदेश में दिए गए नंबर पर संपर्क करते हैं और संबंधित बीएलओ उन्हें अपना आवेदक मानने से ही इन्कार कर देते हैं। यानी आयोग के संदेश में जिस अधिकारी को सत्यापन की जिम्मेदारी दी जा रही है, फोन पर वही अधिकारी इससे अनजान नजर आता है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां मतदाता बनने की पहली सीढ़ी पर ही आवेदकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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नजफगढ़ के रोशन गार्डन के पंकज को एक ही दिन में तीन बार बीएलओ बदलने के संदेश मिले। उन्होंने सभी बीएलओ को फोन किया, लेकिन जवाब मिला कि उन्हें नहीं पता कि आवेदक कौन हैं और उनका नाम सूची में नहीं है। इसी तरह राज को भी बीएलओ बदलने का संदेश मिलने के बाद नए अधिकारी को फोन करने पर ऐसा ही जवाब सुनने को मिला।
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राज ने जब कहा कि चुनाव आयोग ने ही उनका नाम और नंबर भेजा है, तो वह किससे संपर्क करें? इस पर बीएलओ ने जवाब दिया कि उनके पास आवेदक का नाम नहीं है। वहीं, संगम विहार के विवेक ने अपने बीएलओ से जानकारी लेने के लिए फोन किया तो नाम और पता बताते ही अधिकारी ने कह दिया कि उनका पता उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
तीन दिन में दो बार बदले बीएलओ
नजफगढ़ निवासी सन्नी के अनुसार, किसी कारणवश विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में उनका नाम मतदाता सूची से हट गया था। इसके बाद उन्होंने कुछ दिन पहले चुनाव आयोग की वेबसाइट के माध्यम से फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया। 24 सितंबर को उनके मोबाइल पर संदेश आया कि आवेदन के सत्यापन के लिए एक बीएलओ नियुक्त किया गया है। अभी वह प्रक्रिया को समझ ही रहे थे कि 27 सितंबर को एक और संदेश आ गया। इसमें पहले बताए गए बीएलओ की जगह दूसरे अधिकारी का नाम और नंबर दिया गया था। सन्नी के मुताबिक, यह परेशानी केवल उनकी नहीं, बल्कि सैकड़ों आवेदकों की है।
सत्यापन की जिम्मेदारी से अनजान अधिकारी
नजफगढ़ निवासी राहुल बताते हैं कि संदेश में जिस अधिकारी का नंबर दिया गया था, उससे संपर्क करने पर पता चला कि वह संबंधित क्षेत्र का बीएलओ ही नहीं है। लोग सवाल कर रहे हैं कि सत्यापन के लिए संबंधित अधिकारी आवेदक को पहचानने से इन्कार क्यों कर रहे हैं।