यौन शोषण मामला: कोर्ट में बोली दिल्ली पुलिस, निगरानी पैनल ने बृजभूषण सिंह को बरी नहीं किया
राउज एवेन्यू कोर्ट में बृजभूषण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि यौन उत्पीड़न मामले में निगरानी पैनल ने पूर्व डब्ल्यूएफआई प्रमुख को बरी नहीं किया है।
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महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी डब्ल्यूएफआई के पूर्व प्रमुख और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित निगरानी समिति ने क्लीनचिट नहीं दी है। ऐसे में स्पष्ट है कि कमेटी ने उन्हें कहीं न कहीं दोषी माना है और उनके खिलाफ अभियोग तय करने के पर्याप्त साक्ष्य है। दिल्ली पुलिस ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल के समक्ष मामले में सिंह व एक अन्य आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए जाएं या नहीं, इस मुद्दे पर बहस जारी है। पुलिस के अधिवक्ता अतुल श्रीवास्तव ने कहा समिति ने सिफारिशें दी थीं, निर्णय नहीं। कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि ये आरोप प्रमाणित नहीं हैं या झूठे हैं।
उन्होंने अदालत से सिंह के खिलाफ आरोप तय करने का आग्रह किया। यह भी कहा कि केवल इशारा करना भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल प्रयोग) के तहत अपराध माना जा सकता है।
दिल्ली पुलिस ने सांसद के खिलाफ 15 जून को धारा 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल), 354 ए (यौन उत्पीड़न), 354 डी (पीछा करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप पत्र दायर किया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी सिंह शनिवार को मामले की कार्यवाही के दौरान अदालत में पेश हुए। दिल्ली पुलिस सिंह के खिलाफ आरोपों पर 23 सितंबर को अपनी दलीलें फिर से शुरू करेगी। केंद्रीय खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शन के बाद सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए भारतीय मुक्केबाज महान एमसी मैरी कॉम की अध्यक्षता में एक निरीक्षण समिति का गठन किया था।
इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई लेकिन एक प्रति दिल्ली पुलिस को दी गई जो सिंह के खिलाफ आरोपों की जांच कर रही है।अदालत ने 20 जुलाई को सिंह को जमानत दे दी थी और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के सहायक सचिव विनोद तोमर को निलंबित कर दिया था। मामले में उन्हें कभी गिरफ्तार नहीं किया गया।