{"_id":"60dcaaff8070b376536cd019","slug":"seven-accused-of-delhi-violence-case-gets-bail-trial-may-get-delayed-due-to-corona-pandemic","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली दंगा: हत्या मामले में सात आरोपियों को मिली जमानत, अदालत ने कहा कोरोना के कारण ट्रायल में होगी देरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली दंगा: हत्या मामले में सात आरोपियों को मिली जमानत, अदालत ने कहा कोरोना के कारण ट्रायल में होगी देरी
Wed, 30 Jun 2021 11:03 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: प्राची प्रियम
Updated Wed, 30 Jun 2021 11:03 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि उन्हें ट्रायल के अंत तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता क्योंकि कोविड महामारी के कारण ट्रायल में देरी होने की संभावना है। यह मामला पिछले साल 24 फरवरी को हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में विनोद कुमार की कथित हत्या से जुड़ा हुआ है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अदालत ने बुधवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़े हत्या के एक मामले में सात आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि उन्हें ट्रायल के अंत तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता क्योंकि कोविड महामारी के कारण ट्रायल में देरी होने की संभावना है।
विज्ञापन
यह मामला पिछले साल 24 फरवरी को हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान दिल्ली के ब्रह्मपुरी इलाके में विनोद कुमार की कथित हत्या से जुड़ा है। इस मामले में 12 आरोपी हैं। कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने सात आरोपियों को राहत देते हुए कहा कि अधिकांश आरोपी एक साल से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने कहा तथ्यों और परिस्थितियों, हिरासत की अवधि को देखते हुए सभी आरोपियों की वे जमानत स्वीकार करते हैं।
विज्ञापन
अदालत ने सागीर अहमद, नावेद खान, जावेद खान, अरशद, गुलजार, मोहम्मद इमरान और चांद बाबू को जमानत की शर्त के रूप में समान राशि के एक स्थानीय जमानती के साथ 20 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके को जमा करवाने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
अदालत ने आरोपियों को निर्देश दिया कि वे किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि में लिप्त न हों, कोर्ट की अनुमति के बिना दिल्ली-एनसीआर न छोड़ें या न सबूतों से छेड़छाड़ करें।
इनके खिलाफ दंगों के बाद भारतीय दंड संहिता और शस्त्र अधिनियम के तहत धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने, हत्या के प्रयास, दंगे जैसे अपराधों के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं। दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी।