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यूक्रेन के पुलतावा में फंसे छात्रों की दास्तां: न बस मिल रही और न ही ट्रेन का कोई इंतजाम, हमें बहुत डर लग रहा

Tue, 01 Mar 2022 12:01 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 01 Mar 2022 12:01 AM IST
सार

दिल्ली के नजफगढ़ की रहने वाली सिमरन सहगल ने बताया कि हमें बहुत ज्यादा डर लग रहा है। हम वतन वापसी के लिए हॉस्टल से 30-35 के ग्रुप में जाना चाहते हैं, लेकिन बॉर्डर तक जाने के लिए न तो बस मिल रही है और न ही ट्रेन। दो-तीन के ग्रुप में टैक्सी में जाने में डर लगता है। 

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Russia Ukraine War Students trapped in Ukraine Pultava told tales neither bus is available nor any arrangement of train
सिमरन सहगल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हमारा यूक्रेन बॉर्डर तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है। इसके अलावा हम हॉस्टल में भी सुरक्षित नहीं हैं। हमें सायरन बजते ही जान बचाने के लिए बंकर की तरफ भागना पड़ता है। दिन में दो-तीन बार ऐसा होता है। हमें बहुत ज्यादा डर लग रहा है। हम वतन वापसी के लिए हॉस्टल से 30-35 के ग्रुप में जाना चाहते हैं, लेकिन बॉर्डर तक जाने के लिए न तो बस मिल रही है और न ही ट्रेन। दो-तीन के ग्रुप में टैक्सी में जाने में डर लगता है। 
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यह कहना है सिमरन का। वह इस वक्त पुलतावा की अपनी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में फंसी हैं। दिल्ली के नजफगढ़ की रहने वाली सिमरन सहगल ने अमर उजाला को सोमवार सुबह फोन पर बताया कि उन्होंने रविवार को हंगरी बॉर्डर तक जाने के लिए एक बस की व्यवस्था की थी। 
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बस उनके हॉस्टल में आ भी गई। जल्द ही भारत पहुंचने की उम्मीद में खुशी में उछलते हुए उनके ग्रुप के 30-35 विद्यार्थी बस में बैठे। इस बीच उसमें कुछ खराबी आ गई और बस नहीं चली। फिर, बस सही करने के लिए मैकेनिक नहीं मिले और वह खराब हालत में अभी तक उनके हॉस्टल में ही खड़ी है। इस तरह उनके हंगरी बॉर्डर तक पहुंचने के अरमानों पर पानी फिर गया। वह बहुत ही निराश एवं परेशान है।
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उधर, कीव से करीब 500 किलोमीटर दूर एक मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे विभु के परिजनों ने बताया कि वह यूक्रेन के हालातों से जुड़ी पल-पल की खबरों पर नजर बनाए हुए है। वहां भारत के विद्यार्थियों को हो रही दिक्कत के बारे में मालूम होते ही अपने बेटे से बात करते हैं। 

उनका बेटा रविवार को भारत आने के दौरान पोलैंड बॉर्डर पर पहुंच गया था, लेकिन वहां हवाई जहाज में जगह नहीं मिलने के कारण वह वापस अपने हॉस्टल आ गया। उनके बेटे ने उन्हें बताया कि हवाई जहाज में प्रवेश करने के लिए कुछ विद्यार्थी मारा मारी कर रहे थे। पुलिस के लिए उनको संभालना मुश्किल हो रहा है। इसी बीच पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज भी कर दिया। इससे कई छात्रों को चोट भी आई है।

हंगरी बॉर्डर पहुंचने के लिए कोई इंतजाम नहीं
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी मानिक कटोच भी सिमरन की तरह भारत आने के लिए हाथ पैर मारने वालों में शामिल है। वह बताते हैं कि उन्हें हंगरी बॉर्डर तक जाने के लिए न बस मिल रही है और न ही ट्रेन के लिए व्यवस्था हो रही है। हालांकि उन्हें टैक्सी मिल रही है, मगर टैक्सी भी पर्याप्त संख्या में नहीं मिली है और उन्हें टैक्सी में सफर करने में डर लग रहा है। 

इसी तरह पंजाब के लुधियाना की दामिनी ठाकुर के अनुसार उनका हॉस्टल में रहना मुश्किल हो गया है, क्योंकि रूस की ओर से हमले करने के कारण दिन में दो-तीन बार सायरन बजता है और उन्हें अपने कमरे से निकलकर बंकर में जाना पड़ता है। इतना ही नहीं, सायरन बजते ही सभी विद्यार्थी डर जाते है और बंकर में वे एक-दूसरे के साथ सटकर बैठते है।

विद्यार्थियों को प्रताड़ित करने का वीडियो वायरल हुआ
यूक्रेन में भारत के विद्यार्थियों पर अत्याचार होने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ युवक बता रह है कि यूक्रेन में फंस भारत के विद्यार्थियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन पर फायरिंग की गई है और मोबाइल तोड़ दिया गया। विद्यार्थियों को गाली भी दी गई है।
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