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दिल्ली में सड़क दुर्घटना : जिसने भी देखा सहम गया वो, भीड़ को हटाने में हुई खासी मशक्कत

Sun, 19 Dec 2021 05:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 19 Dec 2021 05:44 AM IST
सार

पिछली सीट पर बैठे मामा-भांजे के शव बुरी तरह कुचले। 

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Road accident in Delhi Whoever saw shocked
हादसे के बाद... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पलक झपकते ही ऑटो सवार चारों लोग मौत के आगोश में समा गए, जिसने भी ऑटो को देखा, वह सिहर उठा। आठ दिसंबर को आरके पुरम इलाके में हयात होटल के पास गिट्टी से भरे डंपर के कार पर पलटने की घटना को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि शनिवार सुबह कंटेनर सवारी ऑटो पर पलट गया। हादसे की सूचना मिलते ही बचाव दल वहां पहुंच गया। सबसे पहले पुलिस व एंबुलेंस की गाड़ियां पहुंचीं। 

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हालात देखकर मौके पर दमकल विभाग के अलावा आपदा प्रबंधन की टीम को मौके पर बुलाया गया। आईएसबीटी से काले खां के बीच रिंग रोड पर ट्रैफिक को बंद कर दिया गया। चूंकि कंटेनर में 50 टन के करीब चावल भरा था। इसलिए उसको हटाने के लिए पुलिस ने ट्रैफिक पुलिस की दो क्रेन के अलावा दो अन्य बड़ी क्रेनों को बुलाया। कड़ी मशक्कत के बाद करीब ढाई घंटे में चारों शवों को निकाला जा सका। इस दौरान मौके पर लोगों की भारी भीड़ भी जुटी रही। पुलिस को लोगों को हटाने में मशक्कत करने पड़ी।
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दमकल विभाग के सब ऑफिसर राजेश कुमार ने बताया कि सुबह उनकी टीम को खबर मिली तो कनॉट प्लेस से उनकी टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। ऑटो बुरी तरह कंटेनर के नीचे दबा था। शवों को निकालने के लिए पहले कंटेनर को ऑटो से हटाना जरूरी था। रोड को ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद कंटेनर में बड़े-बड़े हुक व बेल्ट को फंसाकर एक साथ सभी क्रेनों ने मिलकर कंटेनर को हटाया। 
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करीब डेढ़ घंटे बाद सबसे पहले कटर से ऑटो की बॉडी को काटकर जय किशोर यादव का शव निकाला गया। इसके कुछ ही देर बाद सुरेंद्र का शव भी निकाल लिया गया। पिछली सीट पर मौजूद कोमल सिंह और उसके भांजे के शव बुरी तरह क्रैश हो चुके थे। दोनों के शवों को निकालने के लिए दमकल विभाग और आबदा प्रबंधन की टीम को अलग तरह के टूल्स का इस्तेमाल करना पड़ा। एक घंटे बाद शवों को निकाला गया। ट्रक को सीधा कर उसे थाने पहुंचवाया गया। क्राइम सीन से साक्ष्य जुटाने के बाद रिंग रोड को करीब तीन घंटे बाद आम ट्रैफिक के लिए खोल दिया गया। पुलिस घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से हादसे के सही कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

मोड़ पर ट्रैफिक मर्ज होने की वजह से बिगड़ा संतुलन...
दिल्ली पुलिस सूत्रों का कहना है कि रिंग रोड के बाईपास पर आईएसबीटी से आईटीओ की ओर आते समय ट्रैफिक काफी तेज गति से आता है। यहां यह रोड समाप्त होकर पुराने रिंग रोड से मर्ज होता है, वहां पर काफी तीव्र मोड़ है। ऐसे में अक्सर वाहन चालक वहां पर गच्चा खा जाते हैं। तेज गति होने के कारण उनका संतुलन बिगड़ता है और हादसे का शिकार होते हैं। शनिवार सुबह हुए हादसे के लिए भी यही कारण माना जा रहा है।

घर से हंसी-खुशी निकला था सुरेंद्र, मिली मौत की खबर

शनिवार सुबह सुरेंद्र कुमार यादव हंसी-खुशी घर से निकला था। शास्त्री पार्क ऑटो स्टैंड पर भी वह साथियों से मजाक कर रहा था। कुछ ही देर बाद सुरेंद्र की मौत की खबर परिजनों को मिली। घर में एक साथ दो मौतों ने पूरे परिवार को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। हादसे में सुरेंद्र के भतीजे जय किशोर यादव की भी मौत हो गई। दोनों के परिजनों का रोते-रोते बुरा हाल है। 

दूसरी ओर फिरोजाबाद से मामा के साथ दिल्ली घूमने आए टाटा प्रकाश तो शायद मौत ही यहां खींचकर ला रही थी। हादसे में टाटा और उसके मामा कोमल सिंह दोनों की मौत हुई। उनके परिवार में भी मातम छाया हुआ है। दो साल पूर्व ही टाटा के पिता भंवर सिंह ने पंजाब में आत्महत्या कर ली थी। परिवार अभी उस सदमे से भी नहीं उभरा था कि अब दूसरा हादसा हो गया।

सुरेंद्र कुमार के भतीजे दीपक ने बताया कि उसके चाचा पिछले करीब 25 साल से दिल्ली के शास्त्री पार्क में रहकर ऑटो चला रहे हैं। सुरेंद्र के तीन अन्य भाई हैं। परिवार में पत्नी मालती देवी के अलावा चार बच्चे खुशबू कुमारी, चंदा कुमारी, अविनाश और गिरीराज कुमार (4) हैं। दो माह पूर्व सुरेंद्र ने कर्ज लेकर हरियाणा के एक अस्पताल में अपने बेटे गिरिराज के दिल का ऑपरेशन करवाया था। 

वहीं दूसरी ओर सुरेंद्र का भतीजा भी जय किशोर के बराबर में अपने परिवार के साथ रहता था। इसके परिवार में पत्नी निर्मला देवी के अलवा दो बच्चे अंश यादव व नव्या यादव हैं। जय किशोर इलाके में ही पर्स बनाने की फैक्टरी चलाता था। शनिवार को वह अपने चाचा के साथ फैक्टरी का माल लेने के लिए निकला था। चाचा ने सवारी छोड़ने के बाद उसे सदर बाजार मार्केट छोड़ने की बात की थी।

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