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दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियां 2023 तक हो जाएंगी वैध, 1.35 करोड़ आबादी को मिलेगी राहत

Tue, 09 Feb 2021 08:45 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 09 Feb 2021 08:45 PM IST
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Delhis unauthorized colonies to be valid by 2023, bill passed in Rajya Sabha
राज्यसभा - फोटो : ANI

दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों में रहने वाले लोगों के लिए संसद से मंगलवार को अच्छी खबर आई है। 2014 तक की सभी अनधिकृत कालोनियां 2023 तक वैध हो जाएंगी। राज्यसभा में मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली कानून (विशेष प्रावधान) दूसरा (संशोधन) विधेयक ध्वनिमत से पारित किया गया। 

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केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को उच्च सदन में विधेयक पेश किया था। इस पर मंगलवार को चर्चा के बाद मुहर लग गई। विधेयक पारित होने के बाद दिल्ली में 2014 तक किए गए अनधिकृत निर्माणों को वैध करना आसान होगा। बिल पर चर्चा के दौरान पुरी ने कहा, मोदी सरकार हर सिर पर छत के सपने को साकार करने की ओर लगातार काम कर रही है। 
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 30 दिसंबर 2020 को ही इस संदर्भ में अध्यादेश को मंजूरी दी थी। पुरी ने कहा, राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र विशेष प्रावधान अधिनियम 2011 में पारित हुआ था और यह 30 दिसंबर 2020 तक ही वैध था। अब दूसरे संशोधन के बाद इसकी समय सीमा 2023 तक बढ़ गई है। इस संशोधन के बाद 2002 तक बनी सभी अनधिकृत कालोनियों को नियमित किया जा सकेगा।
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इसके अलावा इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (अनधिकृत कालोनियों में रहने वालों की संपत्तियों के अधिकारों की पहचान) नियमितीकरण 2019 की मदद से कालोनियों में मकान मालिकों की पहचान की जा सकेगी। इतना ही नहीं, जून 2014 तक कटी अनधिकृत कालोनियों और जनवरी 2015 तक 50 फीसदी बसावट वाली कालोनियों को भी वैधता का जामा पहनाने में आसानी होगी। इन्हें नियमित किया जा सकेगा।

1.35 करोड़ लोगों को मिलेगा घर के स्वामित्व का अधिकार
पुरी ने कहा, इस विधेयक के साथ ही 2023 तक दिल्ली की अवैध कालोनियों में बसे 1.35 करोड़ लोगों को घर के स्वामित्व का अधिकार मिलेगा। पुरी ने बताया कि जहां झुग्गी वहीं मकान योजना के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई हैं। उन्होंने साथ ही कहा कि न सिर्फ दिल्ली के 1.35 करोड़ लोगों की जीवन शैली सुधरेगी, बल्कि सेंट्रल विस्टा के निर्माण से दिल्ली दुनिया के शानदार शहरों में से एक बनेगा।

2023 तक अवैध कालोनियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हो सकेगी
यह विधेयक दिल्ली की अनधिकृत कालोनियां बनाने वाले लोगों को किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से भी सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके तहत 2023 तक उन कालोनियाें पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो सकेगी जिन्हें नियमित करने के लिए अभी कदम उठाए जाने बाकी हैं।

भाकपा ने अध्यादेश का रास्ता अपनाने पर उठाया सवाल
बिल पर चर्चा के दौरान माकपा सांसद बिकाश रंजन ने सरकार द्वारा एक बार फिर अध्यादेश का रास्ता अपनाने पर सवाल उठाया। रंजन ने कहा, केंद्र सरकार अध्यादेश राज चला रही है।

दिल्ली की अनधिकृत कालोनियों का मुद्दा बेहद गंभीर है और इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए लेकिन सरकार ने इसे जरूरी नहीं समझा। पिछले बिल की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले ही सरकार अध्यादेश लेकर आई है। उन्होंने कहा, इस तरह अध्यादेश के जरिये बार बार अवधि में विस्तार करना निंदनीय है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जहां झुग्गी वहीं मकान योजना से लाभ होगा और करीब 75 लाख लोगों को लैंड पूलिंग से लाभ मिलेगा।

अवधि न बढ़ाते तो सीलिंग जैसी समस्याएं फिर होती
पुरी ने कहा, अध्यादेश के जरिये अवधि बढ़ाना जरूरी था। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो दिल्ली में दोबारा सीलिंग की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। उन्होंने कहा कि जहां तक मैं समझता हूं सदन नहीं चाहेगा कि दिल्ली को एक बार फिर ऐसी अनिश्चितता के दौर में डाला जाए।

40 लाख लोग झुग्गियों में रह रहे
आप सांसद संजय सिंह ने सदन में कहा कि अकेले दिल्ली की झुग्गियों में 40 लाख लोग रहते है। सरकार ने पिछले साल वादा किया था कि इन लोगों को घर का स्वामित्व दिया जाएगा। हम सरकार से मांग करते हैं कि अपना वादा पूरा करे।

2006 में बना था कानून
पुरी ने सदन में बताया कि 2006 में संसद ने दिल्ली कानून विशेष प्रावधान अधिनियम बनाया था, ताकि इसके जरिये अतिक्रमण को सीलिंग या ढहाने जैसी दंडात्मक कार्रवाइयों से बचाया जा सके। बाद में 2007, 2009, 2014 और 2017 में कई अध्यादेशों के जरिये इस अधिनियम की अवधि को बढ़ाया गया।

पुरी ने कहा कि 1947 में आठ लाख से दिल्ली की आबादी 2011 तक 1.6 करोड़ हो गई। इस तरह दिल्ली में बढ़ती जनसंख्या के लिहाज से संसाधनों में इजाफा नहीं हुआ और मांग व आपूर्ति के बीच अंतर बढ़ता गया।

50 लाख लोगों को मिलेगा पीएम-उदय का लाभ
पुरी ने बताया कि प्रधानमंत्री अवैध कालोनी दिल्ली अवास अधिकार योजना से 50 लाख लोग लाभांवित होंगे। इसके अलावा 10 लाख लोगों को

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