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कोरोना: पोस्ट कोविड के पांच लक्षण नहीं छोड़ रहे मरीजों का पीछा, संक्रमण से स्वस्थ होने के छह महीने बाद भी सांस लेने में तकलीफ
Wed, 18 Aug 2021 12:26 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 18 Aug 2021 12:26 AM IST
सार
राजधानी के कई अस्पतालों में पोस्ट कोविड के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, कोरोना से स्वस्थ होने के छह माह बाद भी सांस लेने में तकलीफ, थकावट, शरीर में दर्द जैसी परेशानियां बनी हुई है।
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फाइल फोटो
- फोटो : istock
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विस्तार
कोरोना से स्वस्थ होने के छह माह बाद भी पांच समस्याएं मरीजों का पीछा नहीं छोड़ रही हैं। इनमें सांस लेने में परेशानी, थकावट, शरीर में दर्द, आंखों की समस्या, लंग फाईब्रोसिस शामिल है। अस्पतालों में जो मरीज भर्ती हैं। उनमें भी अधिकतर को इन्हीं बीमारियों से जकड़ा हुआ है।
डॉक्टरों का कहना है कि साल की शुरुआत में जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए थे। उनमें कुछ अभी तक भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाए हैं। यह मरीज इन पांच परेशानियां में से एक या दो से जरूर पीड़ित हैं। एम्स के क्रिटिकल केयर विभाग के डॉक्टर युद्धवीर सिंह बताते हैं कि जो पोस्ट कोविड समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती है उन्हें लॉग कोविड इफेक्टस कहा जाता है।
कई मरीज ऐेसे हैं जिन्हें स्वस्थ होने के चार से पांच महीने बाद भी सांस लेने में तकलीफ और थकावट की समस्या बनी हुई है। देखा गया है कि 75 से 80 फीसदी पोस्ट कोविड मरीजों ने शिकायत की है कि उनमें कम से कम एक लक्षण कायम है। स्वस्थ होने के एक साल बाद भी ऐसे लोगों पर निगरानी रखनी जरूरी है।
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राजीव गांधी अस्पताल के डॉक्टर विकास कुमार का कहना है कि अस्पताल में पिछले साल पोस्ट कोविड क्लीनिक शुरू हुआ था। दूसरी लहर के बाद से पोस्ट कोविड के मरीजों की संख्या काफी अधिक हो गई है। इन मरीजों को उनकी स्थिति के हिसाब से अलग- अलग विभागों में इलाज किया जा रहा है।
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डॉक्टरों का कहना है कि साल की शुरुआत में जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए थे। उनमें कुछ अभी तक भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पाए हैं। यह मरीज इन पांच परेशानियां में से एक या दो से जरूर पीड़ित हैं। एम्स के क्रिटिकल केयर विभाग के डॉक्टर युद्धवीर सिंह बताते हैं कि जो पोस्ट कोविड समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती है उन्हें लॉग कोविड इफेक्टस कहा जाता है।
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कई मरीज ऐेसे हैं जिन्हें स्वस्थ होने के चार से पांच महीने बाद भी सांस लेने में तकलीफ और थकावट की समस्या बनी हुई है। देखा गया है कि 75 से 80 फीसदी पोस्ट कोविड मरीजों ने शिकायत की है कि उनमें कम से कम एक लक्षण कायम है। स्वस्थ होने के एक साल बाद भी ऐसे लोगों पर निगरानी रखनी जरूरी है।
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राजीव गांधी अस्पताल के डॉक्टर विकास कुमार का कहना है कि अस्पताल में पिछले साल पोस्ट कोविड क्लीनिक शुरू हुआ था। दूसरी लहर के बाद से पोस्ट कोविड के मरीजों की संख्या काफी अधिक हो गई है। इन मरीजों को उनकी स्थिति के हिसाब से अलग- अलग विभागों में इलाज किया जा रहा है।
अस्पतालों में बढ़ रहे पोस्ट कोविड मरीज
राजधानी के कई अस्पतालों में पोस्ट कोविड के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी मे कई मरीज पोस्ट कोविड समस्याओं वाले आ रहे हैं। दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल ने मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल से जुड़े हुए रामलीला कोविड केयर केंद्र में भी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया है।
राजधानी के कई अस्पतालों में पोस्ट कोविड के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ओपीडी मे कई मरीज पोस्ट कोविड समस्याओं वाले आ रहे हैं। दिल्ली सरकार के लोकनायक अस्पताल ने मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल से जुड़े हुए रामलीला कोविड केयर केंद्र में भी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया है।