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पुलिस अब पीड़ित से नहीं मांगेगी गाड़ी: अभी तक पीड़ित को ही करना पड़ता था वाहन का इंतजाम, सकुर्लर जारी
Sat, 22 Jan 2022 08:44 AM IST
शाहरुख खान
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 22 Jan 2022 08:44 AM IST
सार
दिल्ली पुलिस कर्मी आप से गाड़ी नहीं मांगेगे। पुलिस ने काफी टैक्सी स्टैंड अधिकृत किए हैं, जिनसे पुलिसकर्मी किराए पर गाड़ी लेकर पीड़ित के साथ जा सकेंगे।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अगर किसी के साथ कोई वारदात हो जाती है और कहीं जाना पड़ता है तो पुलिस गाड़ी लाने की बात कहती है, मगर अब ऐसा नहीं होगा। अब दिल्ली पुलिस कर्मी आप से गाड़ी नहीं मांगेगे। पुलिस ने काफी टैक्सी स्टैंड अधिकृत किए हैं, जिनसे पुलिसकर्मी किराए पर गाड़ी लेकर पीड़ित के साथ जा सकेंगे।
ऐसे में गाड़ी लाने के चक्कर में कहीं आने-जाने में देर भी नहीं होगी। विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) देवेश श्रीवास्तव की ओर से यह सकुर्लर जारी किया गया है। यदि कोई पीड़ित से वाहन की मांग करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सकुर्लर में कहा गया है कि कुछ टैक्सी स्टैंड चिह्नित किए हैं। इनसे पुलिसकर्मी टैक्सी किराए पर लेकर पीड़ित की मदद के लिए कहीं भी जा सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ज्यादातर देखने में आता था कि पुलिसकर्मी पीड़ित से गाड़ी लाने के लिए कहते थे। जैसे किसी का बच्चा खो गया और उसे बरामद करने जाना है तो दिल्ली पुलिसकर्मी पीड़ित से गाड़ी लाने के लिए कहते थे। कई बार पीड़ित गरीबी की चलते गाड़ी लाने में असमर्थ होता था। ऐसे में बच्चा मिल नहीं पाता था।
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देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि गाड़ी किराए पर लेकर पीड़ित के साथ जाने का सिस्टम अपराध शाखा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और सभी 15 जिलों की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटों में लागू किया गया है। इसके तहत हर जिले में टैक्सी स्टैंड अधिकृत किए गए हैं। इस प्रक्रिया के लिए टेंडर जारी किए गए थे। टेंडर प्रक्रिया जारी होने के बाद टैक्सी स्टैंड को अधिकृत किया गया है।
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ऐसे में गाड़ी लाने के चक्कर में कहीं आने-जाने में देर भी नहीं होगी। विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) देवेश श्रीवास्तव की ओर से यह सकुर्लर जारी किया गया है। यदि कोई पीड़ित से वाहन की मांग करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सकुर्लर में कहा गया है कि कुछ टैक्सी स्टैंड चिह्नित किए हैं। इनसे पुलिसकर्मी टैक्सी किराए पर लेकर पीड़ित की मदद के लिए कहीं भी जा सकते हैं।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ज्यादातर देखने में आता था कि पुलिसकर्मी पीड़ित से गाड़ी लाने के लिए कहते थे। जैसे किसी का बच्चा खो गया और उसे बरामद करने जाना है तो दिल्ली पुलिसकर्मी पीड़ित से गाड़ी लाने के लिए कहते थे। कई बार पीड़ित गरीबी की चलते गाड़ी लाने में असमर्थ होता था। ऐसे में बच्चा मिल नहीं पाता था।
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देवेश श्रीवास्तव ने बताया कि गाड़ी किराए पर लेकर पीड़ित के साथ जाने का सिस्टम अपराध शाखा की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और सभी 15 जिलों की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटों में लागू किया गया है। इसके तहत हर जिले में टैक्सी स्टैंड अधिकृत किए गए हैं। इस प्रक्रिया के लिए टेंडर जारी किए गए थे। टेंडर प्रक्रिया जारी होने के बाद टैक्सी स्टैंड को अधिकृत किया गया है।
अब टैक्सी स्टैंड मालिक पुलिसकर्मी से बिल साइन करा लेगा और टैक्सी स्टैंड मालिक पुलिस से अपना बिल खुद लेगा। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस आयुक्त राकेश अस्थाना की पहल पर टैक्सी स्टैंड से खुद किराए पर गाड़ी लेने के सिस्टम को लागू किया गया है।
पुलिस मुख्यालय में बैठे अधिकारियों की मानें तो अभी तो इस एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटों में लागू किया गया है, जल्द ही इसे सभी पुलिस थानों व दिल्ली पुलिस की अन्य यूनिटों में लागू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे पुलिस की छवि में भी सुधरेगी।
देरी से मिलता है क्लेम
दिल्ली पुलिस में अभी भी किराए पर गाड़ी लेने का सिस्टम है। इसके तहत पुलिसकर्मी को खुद बिल लेना पड़ता था, मगर बिल लेने में एक साल से ज्यादा का समय लग जाता है। ऐसे में पुलिसकर्मी बिल क्लेम नहीं करते। कई बार उन्हें बिल मिलता भी नहीं था। इस कारण पुलिसकर्मी पीड़ित से गाड़ी व अन्य चीजों का इंतजाम करने के लिए कहते थे।
पुलिस मुख्यालय में बैठे अधिकारियों की मानें तो अभी तो इस एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटों में लागू किया गया है, जल्द ही इसे सभी पुलिस थानों व दिल्ली पुलिस की अन्य यूनिटों में लागू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे पुलिस की छवि में भी सुधरेगी।
देरी से मिलता है क्लेम
दिल्ली पुलिस में अभी भी किराए पर गाड़ी लेने का सिस्टम है। इसके तहत पुलिसकर्मी को खुद बिल लेना पड़ता था, मगर बिल लेने में एक साल से ज्यादा का समय लग जाता है। ऐसे में पुलिसकर्मी बिल क्लेम नहीं करते। कई बार उन्हें बिल मिलता भी नहीं था। इस कारण पुलिसकर्मी पीड़ित से गाड़ी व अन्य चीजों का इंतजाम करने के लिए कहते थे।