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10वीं के अंक मूल्यांकन के तरीके और आधार को सार्वजनिक करने की मांग

Mon, 28 Jun 2021 09:03 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 09:03 PM IST
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petition filed in high court seeking disclosure of marking pattern and its basis of class tenth
नई दिल्ली। 10वीं बोर्ड परीक्षा के अंक मूल्यांकन करने के तरीके और उसके आधार को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया गया है। याची ने मांग की है कि सीबीएसई अपने सभी स्कूलों को निर्देश देकर स्पष्ट करे कि वह किस आधार पर छात्रों के विषयों के अंक का निर्धारण कर रहे हैं ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
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याची ने अदालत से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने और सभी स्कूलों द्वारा सभी दस्तावेज अपनी वेबसाइट पर उसे डालें, जिससे छात्र उसके तरीके को समझ सकें और कोई भी शिकायत हो तो वह अपनी बात रख सकें।
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इस आवेदन पर न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद व न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ के पास सुनवाई तय हुई। न्यायमूर्ति शंकर ने याचिका पर व्यक्तिगत कारणों से सुनवाई से इनकार कर दिया। अब सुनवाई दूसरी पीठ के समक्ष 30 जून को होगी।
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यह आवेदन एक गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल ने अपने अधिवक्ता खगेश झा एवं शिखा शर्मा बग्गा के माध्यम से दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि रिजल्ट निकाले जाने से पहले ही अगर अंक निर्धारण से संबंधित दस्तावेज एवं नीति को सार्वजनिक कर दिया जाता है तो सभी छात्र उसे समझ सकेंगे और अपनी शिकायत संबंधित अधिकारी को भेज सकेंगे। इससेेेे अंक निर्धारण में पारदर्शिता भी आएगी।
यह आवेदन उस लंबित जनहित याचिका में दाखिल किया गया है जिसमें जिसमें कहा गया है कि दसवीं बोर्ड के मूल्यांकन की नीति ही गलत है। सरकार ने यह अंक निर्धारण का जिम्मा स्कूलों पर छोड़ दिया है। बोर्ड भी छात्रों का मूल्यांकन नहीं कर स्कूलों का मूल्यांकन कर रहे हैं। इससे आर्थिक एवं सामाजिक स्तर के छात्रों के साथ भेदभाव होता है। यह सब स्कूलों के मनमानी पर छोड़ दिया है। उसकी शिकायत निवारण नीति भी त्रुटि पूर्ण है।
याचिका में तर्क रखा गया है कि पिछली कक्षाओं में बच्चों के प्रदर्शन के आधार पर कक्षा 10 के छात्र के अंकों का आकलन करने की सीबीएसई नीति ‘असंवैधानिक’ है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए), 21 और 21 ए के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।
कोविड-19 के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल को 10वीं कक्षा की होने वाली बोर्ड परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। तय किया गया था कि सीबीएसई द्वारा विकसित किए जाने वाले वस्तुनिष्ठ मापदंड के आधार पर परिणाम तैयार किए जाएंगे।
याचिका में कहा गया है कि बच्चों के अंकों का निर्धारण करने के लिए बोर्ड द्वारा नीति इस तरह से बनाई गई है कि सीबीएसई पिछले तीन वर्षों से स्कूल के प्रदर्शन को आधार बनाएगी न कि छात्रों के व्यक्तिगत प्रदर्शन को। सीबीएसई ने पहले घोषणा की थी कि प्रत्येक विषय के लिए कुल 100 अंकों में से कक्षा 10 के छात्रों का मूल्यांकन किया जाएगा। 20 अंक इंटरनल असेसमेंट से होंगे, जबकि 80 अंकों की गणना साल भर में आयोजित अलग-अलग परीक्षाओं के आधार पर की जाएगी।

मूल्यांकन मापदंड पर सीबीएसई की अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं में स्कूल के पिछले प्रदर्शन के अनुरूप अंक होने चाहिए। बोर्ड ने प्रत्येक संबद्ध स्कूल को कक्षा 10 के परिणाम को अंतिम रूप देने के लिए प्रिंसिपल और सात शिक्षकों की एक परिणाम समिति गठित करने का निर्देश दिया था। याचिका पर सुनवाई 27 अगस्त तय है।
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