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विवाह के पंजीकरण के लिए दंपती को पेश होना अनिवार्य: दिल्ली सरकार
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नई दिल्ली। विवाह के पंजीकरण के लिए दंपती को संबंधित अथॉरिटी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से नहीं की जा सकती। दिल्ली सरकार ने बुधवार को उच्च न्यायालय के समक्ष यह तथ्य रखा। अदालत ने सरकार के तर्क पर असहमति जताते हुए शपथपत्र सहित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष पेश दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि विवाह के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर में संबंधित पक्ष के पेश होने पर पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा न ही संबंधित नियमों में ऐसी कोई छूट है। उन्होंने कहा पंजीकरण की प्रक्रिया में एसडीएम कार्यालय में संबंधित पक्षों यानि जोड़े की फोटो ली जाती है।
अदालत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी शादी के पंजीकरण की मांग करने वाले एक जोड़े की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
अदालत ने सरकार के तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया केवल एक विवाह के पंजीकरण से संबंधित है जो पहले ही हो चुका है। उन्होंने सरकार से कहा कि आप केवल इसे पंजीकृत कर रहे हैं, वे आपकी उपस्थिति में शादी नहीं कर रहे हैं। सॉफ्टवेयर में व्यक्ति रूप से पेश न होने की अनुमति न होना आपकी समस्या है।
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अदालत ने दिल्ली सरकार को इस मामले में अपना जवाब तीन दिन में शपथपत्र सहित दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सुनवाई 6 सितंबर तय की है।
वहीं दंपती की ओर से पेश वकील ने उनके मुवक्किलों का विवाह बिना उपस्थिति के पंजीकरण करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार को पुन: जवाब के लिए समय प्रदान न किया जाए।
याची दंपती के अधिवक्ता ने कहा सभी संबंधित जरूरी दस्तावेज पहले ही दायर किए जा चुके हैं। गवाह संबंधित अधिकारी के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा राजधानी में कुछ अधिकारियों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पंजीकरण किया जा रहा है।
वर्तमान मामले में दंपति ने दावा किया कि उनका विवाह 2012 में हुआ था और वर्तमान में वे यूएसए में रह रहे हैं। ऐसे में उनका व्यक्तिगत रूप से पेश होना असंभव है।
याची ने अदालत से आग्रह किया कि दिल्ली सरकार को दिल्ली (विवाह का अनिवार्य पंजीकरण) आदेश, 2014 के तहत विवाह के पंजीकरण के लिए उनके ऑनलाइन आवेदन को स्वीकार किया जाए और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनकी उपस्थिति को माना जाए।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली के समक्ष पेश दिल्ली सरकार के वकील ने बताया कि विवाह के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर में संबंधित पक्ष के पेश होने पर पंजीकरण का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा न ही संबंधित नियमों में ऐसी कोई छूट है। उन्होंने कहा पंजीकरण की प्रक्रिया में एसडीएम कार्यालय में संबंधित पक्षों यानि जोड़े की फोटो ली जाती है।
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अदालत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी शादी के पंजीकरण की मांग करने वाले एक जोड़े की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
अदालत ने सरकार के तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि यह प्रक्रिया केवल एक विवाह के पंजीकरण से संबंधित है जो पहले ही हो चुका है। उन्होंने सरकार से कहा कि आप केवल इसे पंजीकृत कर रहे हैं, वे आपकी उपस्थिति में शादी नहीं कर रहे हैं। सॉफ्टवेयर में व्यक्ति रूप से पेश न होने की अनुमति न होना आपकी समस्या है।
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अदालत ने दिल्ली सरकार को इस मामले में अपना जवाब तीन दिन में शपथपत्र सहित दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सुनवाई 6 सितंबर तय की है।
वहीं दंपती की ओर से पेश वकील ने उनके मुवक्किलों का विवाह बिना उपस्थिति के पंजीकरण करने का निर्देश देने का आग्रह करते हुए कहा कि सरकार को पुन: जवाब के लिए समय प्रदान न किया जाए।
याची दंपती के अधिवक्ता ने कहा सभी संबंधित जरूरी दस्तावेज पहले ही दायर किए जा चुके हैं। गवाह संबंधित अधिकारी के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा राजधानी में कुछ अधिकारियों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पंजीकरण किया जा रहा है।
वर्तमान मामले में दंपति ने दावा किया कि उनका विवाह 2012 में हुआ था और वर्तमान में वे यूएसए में रह रहे हैं। ऐसे में उनका व्यक्तिगत रूप से पेश होना असंभव है।
याची ने अदालत से आग्रह किया कि दिल्ली सरकार को दिल्ली (विवाह का अनिवार्य पंजीकरण) आदेश, 2014 के तहत विवाह के पंजीकरण के लिए उनके ऑनलाइन आवेदन को स्वीकार किया जाए और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनकी उपस्थिति को माना जाए।