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प्याज के भाव में ढाई गुणा तक वृद्धि
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नई दिल्ली। राजधानी में सब्जियां फिर थाली से दूर हो रही हैं। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला प्याज फिर आंसू निकाल रहा है। पिछले 15 दिन में ही इसकी कीमत में ढाई गुना बढ़ोतरी हुई है। अब यह थोक में भी 45 रुपये प्रतिकिलो जा पहुंचा है। फुटकर में इसकी कीमत 20 रुपये प्रतिकिलो से बढ़कर 50-60 रुपया पहुंच गई है। हालांकि अगले 10 दिन में भाव गिरने की उम्मीद है।
इन दिनों प्याज की कीमत में लगातार उछाल दिख रहा है। महंगा होने के कारण अच्छे किस्म का प्याज खुदरा बाजार तक पहुंच भी नहीं पा रहा है। महंगाई की वजह से दिल्ली के होटलों, ढाबों पर रेहड़ी-पटरी पर बिकने वाली भोजन की थाली से तो सलाद की प्लेट लगभग गायब हो गई है। सलाद के नाम पर प्याज की जगह खीरा व गाजर से काम चलाया जा रहा है। थोक कारोबारियों का कहना है कि नई खेप का प्याज आने पर ही दाम में राहत मिलेगी। गुजरात, बंगाल, नसिक से जैसे ही बड़ी मात्रा में प्याज दिल्ली पहुंचना शुरू होगा, कीमत में गिरावट आएगी।
दो फसलों के अंतर की वजह से बढ़ी कीमत
प्याज की कीमत में उछाल दो फसलों के अंतर की वजह से आया है। पिछले सप्ताह तो थोक में प्याज 45 रुपये प्रतिकलो के पार चला गया था। अब इसकी कीमत में काफी गिरावट है। शनिवार रात प्याज की कीमत थोक में 20-33 रुपये प्रतिकिलो रही। इस साल प्याज की फसल काफी अच्छी है। अगले 10 दिन में भाव में काफी गिरावट की उम्मीद है।
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- राजेंद्र शर्मा, आजादपुर आलू-प्याज मर्चेंट एसोसिएशन के महासचिव।
आलू के थोक भाव में बंपर कमी
आलू ने इस बार महंगाई के रिकॉर्ड तोड़े थे। अब आलू की थोक कीमत में भारी गिरावट है। आजादपुर मंडी में तो यह महज 6-7 रुपये प्रतिकिलो है। हालांकि खुदरा में यह 20 रुपये प्रतिकिलो तक है। इस बार आलू की फसल बंपर है।
- संदीप खंडेलवाल, आजादपुर के आलू-प्याज विक्रेता।
आलू थोक में सस्ता, फुटकर में महंगा
खुदरा बाजार में पहुंचते ही आलू-प्याज के तेवर अलग हो जाते हैं। रेहड़ी-पटरी पर इनकी कीमत दोगुनी तक वसूली जाती है। थोक में 30 रुपये प्रतिकिलो वाला प्याज फुटकर बाजार में पहुंचते ही 60 रुपया किलो हो जाता है। थोक में 6 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाला आलू खुदरा में पहुंचकर 15-20 रुपये किलो हो जाता है। हालांकि साप्ताहिक बाजार में भाव में कमी दिख रही है। उधर, मटर, गोभी, मूली, गाजर का भाव भी फुटकर बाजार में कम नहीं हो रहा है। पिछले एक सप्ताह में इसमें 10 से 20 प्रतिशत तक उछाल दिखा है। एक खुदरा विक्रेता बंशी का कहना है कि थोक में आलू-प्याज जरूर कम कीमत पर मिलता है, लेकिन रेहड़ी पर खरीदार चुनकर सब्जियां लेते हैं। थोक भाव में कट्टा लेने पर 10 प्रतिशत सब्जियां खराब निकलती हैं।
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इन दिनों प्याज की कीमत में लगातार उछाल दिख रहा है। महंगा होने के कारण अच्छे किस्म का प्याज खुदरा बाजार तक पहुंच भी नहीं पा रहा है। महंगाई की वजह से दिल्ली के होटलों, ढाबों पर रेहड़ी-पटरी पर बिकने वाली भोजन की थाली से तो सलाद की प्लेट लगभग गायब हो गई है। सलाद के नाम पर प्याज की जगह खीरा व गाजर से काम चलाया जा रहा है। थोक कारोबारियों का कहना है कि नई खेप का प्याज आने पर ही दाम में राहत मिलेगी। गुजरात, बंगाल, नसिक से जैसे ही बड़ी मात्रा में प्याज दिल्ली पहुंचना शुरू होगा, कीमत में गिरावट आएगी।
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दो फसलों के अंतर की वजह से बढ़ी कीमत
प्याज की कीमत में उछाल दो फसलों के अंतर की वजह से आया है। पिछले सप्ताह तो थोक में प्याज 45 रुपये प्रतिकलो के पार चला गया था। अब इसकी कीमत में काफी गिरावट है। शनिवार रात प्याज की कीमत थोक में 20-33 रुपये प्रतिकिलो रही। इस साल प्याज की फसल काफी अच्छी है। अगले 10 दिन में भाव में काफी गिरावट की उम्मीद है।
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- राजेंद्र शर्मा, आजादपुर आलू-प्याज मर्चेंट एसोसिएशन के महासचिव।
आलू के थोक भाव में बंपर कमी
आलू ने इस बार महंगाई के रिकॉर्ड तोड़े थे। अब आलू की थोक कीमत में भारी गिरावट है। आजादपुर मंडी में तो यह महज 6-7 रुपये प्रतिकिलो है। हालांकि खुदरा में यह 20 रुपये प्रतिकिलो तक है। इस बार आलू की फसल बंपर है।
- संदीप खंडेलवाल, आजादपुर के आलू-प्याज विक्रेता।
आलू थोक में सस्ता, फुटकर में महंगा
खुदरा बाजार में पहुंचते ही आलू-प्याज के तेवर अलग हो जाते हैं। रेहड़ी-पटरी पर इनकी कीमत दोगुनी तक वसूली जाती है। थोक में 30 रुपये प्रतिकिलो वाला प्याज फुटकर बाजार में पहुंचते ही 60 रुपया किलो हो जाता है। थोक में 6 रुपये प्रतिकिलो बिकने वाला आलू खुदरा में पहुंचकर 15-20 रुपये किलो हो जाता है। हालांकि साप्ताहिक बाजार में भाव में कमी दिख रही है। उधर, मटर, गोभी, मूली, गाजर का भाव भी फुटकर बाजार में कम नहीं हो रहा है। पिछले एक सप्ताह में इसमें 10 से 20 प्रतिशत तक उछाल दिखा है। एक खुदरा विक्रेता बंशी का कहना है कि थोक में आलू-प्याज जरूर कम कीमत पर मिलता है, लेकिन रेहड़ी पर खरीदार चुनकर सब्जियां लेते हैं। थोक भाव में कट्टा लेने पर 10 प्रतिशत सब्जियां खराब निकलती हैं।