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दिल्ली: निजी स्कूलों की मनमानी से अभिभावक परेशान, दाखिले में फिर शामिल किया 100 अंकों का फॉर्मूला

Mon, 22 Feb 2021 12:42 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 22 Feb 2021 12:42 PM IST
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Nursery admission in Delhi schools parents faces problems due to 100 point formula
nursery admission - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के निजी स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2021-22 में नर्सरी दाखिले की रेस बीते सप्ताह से शुरू हो चुकी है। स्कूलों ने एक बार फिर अपने 100 अंकों के फॉर्मूले में मनमाने मानकों को शामिल किया है। ये मनमाने और प्रतिबंधित मानक अभिभावकों के लिए समस्या का सबब बने हुए हैं। 

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कुछ स्कूलों ने ‘पहले आओ पहले पाओ’ के लिए अंक तय किए हैं तो कुछ ने अभिभावकों के प्रोफेशन तक के लिए अंक तय कर दिए हैं। हाईकोर्ट और शिक्षा निदेशालय के आदेशानुसार, लगभग 50 ऐसे आधार हैं, जिन्हें स्कूल अपने दाखिला मानकों में शामिल नहीं कर सकते। 
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इसके बावजूद विद्यालयों ने इन्हें स्थान दिया है। शिक्षा निदेशालय ने मानक अपलोड करने के लिए स्कूलों को 17 फरवरी तक का समय दिया था। इसके बाद शिक्षा निदेशालय के लिंक पर कुल 1187 स्कूलों ने मानक अपलोड किए हैं। 
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अब भी 538 स्कूलों ने निदेशालय के निर्देश का पालन नहीं किया है। इस कारण काफी अभिभावकों को दाखिले के मानक की ही जानकारी नहीं है। इस कारण वे फॉर्म नहीं भर पाए हैं। अब उन्हें फॉर्म खत्म होने का डर सता रहा है।

इस संबंध में एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम के प्रमुख सुमित वोहरा ने कहा कि स्कूल मनमानी कर रहे हैं। सभी स्कूलों ने अपने मानक अपलोड नहीं किए है। 20-25 स्कूलों ने प्रतिबंधित आधार को दाखिला मानकों में शामिल किया है। करीब 15 स्कूलों ने ट्रांसफर को मानक बनाया है। 

इसी तरह, अभिभावक के प्रोफेशन (डॉक्टर, पुलिस व हेल्थ वर्कर) के लिए भी अंक तय कर दिए गए हैं। कुछ स्कूलों ने परिवहन के लिए 10 से 30 अंक तक दिए हैं। इनमें ब्लूम पब्लिक स्कूल व क्वींन ग्लोबल इंटरनेशनल स्कूल शामिल हैं। श्रीराम ग्लोबल स्कूल तो एसआरसीसी और एलएसआर कॉलेज में पढ़ चुके अभिभावकों को एल्युम्नाई के अंक दे रहा है। 


विद्यालयों पर कार्रवाई की उठी मांग
मनमाने मानक तय करने पर विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है। सुमित वोहरा कहते हैं कि अभिभावकों को नहीं पता कि वे कहां मानक देखें। जिन स्कूलों ने अब तक मानक जारी नहीं किए हैं, उन पर शिक्षा निदेशालय को कार्रवाई करनी चाहिए। जिन स्कूलों ने प्रतिबंधित आधार को शामिल किया है, उन पर निदेशालय को पहले ही निगरानी रखनी चाहिए थी। अब उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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