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AIIMS Launched App: अब त्वचा रोगों का स्मार्टफोन की मदद से लगेगा पता, एम्स ने न्यूरिथम लैब के साथ मिलकर लांच किया एप

Sun, 29 May 2022 06:00 AM IST
विजय पुंडीर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 29 May 2022 06:00 AM IST
सार

एम्स ने एक ऐसा एप लॉन्च किया है जिसकी मदद से डॉक्टर त्वचा संबंधी रोगी की जल्द पहचान कर पाएंगे। मुंह के कैंसर की पहचान भी इस एप की मदद से आसान होगी। 

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Now skin diseases will be detected with the help of smartphone AIIMS launched the app in association with Nuritham Lab
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

विस्तार

एम्स में त्वचा और मुंह के कैंसर सहित त्वचा संबंधी रोगों के इलाज के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग किया जाएगा। इलाज को बेहतर बनाने के साथ सटीकता (एक्यूरेसी) को बनाए रखने के लिए एम्स और स्टार्टअप फर्म न्यूरिथम लैब के साथ स्मार्टफोन एप लांच किया गया है। एप के माध्यम से तस्वीर लेकर डॉक्टरों को मरीजों का इलाज करने व रोग को समझने में मदद मिलेगी। डॉक्टरों का दावा है कि एप का सबसे अधिक फायदा ग्रामीण इलाकों में हो सकता है।

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एम्स के त्वचा विज्ञान विभाग में प्रोफेसर डॉ. सोमेश गुप्ता के मुताबिक, त्वचा रोग के इलाज के लिए डर्माएड द्वारा मोबाइल एप एक विशेष तकनीक मशीन-लर्निंग एआई-संचालित एल्गोरिदम का उपयोग करता है। त्वचा की फोटो के लिए इसमें कैमरे का भी इस्तेमाल किया जाता है। एप के माध्यम से सामान्य डॉक्टरों को त्वचा रोग के बारे में बेहतर जानकारी भी मिल सकेगी। गुप्ता ने कहा कि कई शोध से पता चला है कि त्वचा विशेषज्ञों की तुलना में सामान्य डॉक्टरों के बीच इलाज को लेकर 40 से 50 फीसदी ही सही इलाज हो पाता है।
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एप के बारे में गुप्ता ने कहा कि एप के पीछे की तकनीक सरल है। इसमें एक डॉक्टर मरीज के शरीर पर घावों की तस्वीर लेगा और उन्हें क्लाउड सर्वर पर अपलोड करेगा। 15-30 सेकंड के भीतर एप मशीन विश्लेषण के आधार पर रोग की स्थिति बता देगा। डॉक्टर ने कहा कि देश में बड़े स्तर पर त्वचीय संक्रमणों को देख रहा है, जो एक्जिमा सूजन त्वचा रोगों जैसा भ्रामक होता है। इसका स्टेरॉयड के साथ इलाज किया जाता है। एप के माध्यम से फंगल संक्रमण में स्टेरॉयड क्रीम और इलाज के बेकार तरीकों की समस्या से निपटने में मदद मिलने की संभावना है। अभी तक डर्माएड द्वारा 50 से अधिक त्वचा रोगों की पहचान की जा सकती है। इसमें डॉक्टरों द्वारा देखे जाने वाले सबसे आम मामले हैं। हालांकि, इस साल के अंत तक यह संख्या और बढ़ेगी।
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डॉ. गुप्ता ने कहा कि एप 80 फीसदी सटीकता के साथ मुंहासे, सोरायसिस, विटिलिगो, टिनिया, एक्जिमा, पुरुष खालित्य, बेसल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, और मेलेनोमा जैसे विभिन्न प्रकार के त्वचा कैंसर को पता लगा सकता है। उन्होंने कहा कि त्वचा रोग वैश्विक स्तर पर चौथा प्रमुख गैर-घातक रोग है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, भारत में केवल 12.5 लाख एलोपैथिक डॉक्टर हैं, जिनमें से केवल 3.71 लाख के पास विशेषज्ञ या स्नातकोत्तर योग्यता है। एप के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में जहां सामान्य डॉक्टर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं, वहां स्वास्थ्यकर्मी तत्काल रूप से इलाज में अपनी भागीदारी निभा सकते हैं। 

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