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डीयू के नीतिगत मामले में हस्तक्षेप नहीं : हाईकोर्ट

Tue, 06 Jul 2021 12:48 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jul 2021 12:48 AM IST
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No interference in DU's policy matter: High Court
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सोमवार को विधि (लॉ) कोर्स के इंटरमीडिएट सेमेस्टर के लिए ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा आयोजित करने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। पिछले साल कोविड-19 के परीक्षाएं आयोजित नहीं हो पाई थी। अदालत ने कहा कि वे छात्रों को प्रोफेशनल कोर्स की परीक्षा की शर्तों को निर्देशित करने की अनुमति नहीं दे सकते। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने दिल्ली विश्वविद्यालय की फैकल्टी ऑफ लॉ के दूसरे और अंतिम वर्ष के छात्रों की चार याचिकाओं पर सुनवाई करते यह टिप्पणी की।
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अदालत ने विश्वविद्यालय को ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा की अपेक्षा असाइनमेंट आधारित परीक्षा आयोजित करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। स्पष्ट किया कि वह विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते।
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असाइनमेंट आधारित परीक्षा आयोजित करने का निर्देश इस कारण भी नहीं दिया जा सकता कि क्योंकि यह विषय विश्वविद्यालय के विचार करने पर निर्भर करता है। विश्वविद्यालय के नीतिगत फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने विश्वविद्यालय से कहा कि वह परीक्षाओं के परिणाम यथाशीघ्र घोषित करे। इससे पहले लॉ फैकल्टी डीन वंदना ने अदालत को बताया कि परीक्षा जुलाई में ही आयोजित होनी है। पहले राउंड में बैठने में असमर्थ छात्रों के हित में सितंबर में एक और दौर की परीक्षा आयोजित की जाएगी।
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अंतिम वर्ष के लॉ स्टूडेंट की ओर से पेश हुए अधिवक्ता सिद्धार्थ ने तर्क रखा कि पिछले साल के इंटरमीडिएट सेमेस्टर, द्वितीय और चतुर्थ के लिए ऑनलाइन ओपन बुक की परीक्षा छात्रों के हित में नहीं थी। एक असाइनमेंट आधारित परीक्षा के लिए दबाव डालते हुए उन्होंने बताया कि ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा की तारीखें अन्य प्रवेश परीक्षाओं के साथ टकरा सकती हैं जो अंतिम वर्ष के छात्र आगे की पढ़ाई के लिए ले सकते हैं।

अदालत ने प्रो वंदना के इस आश्वासन को रिकॉर्ड में लिया कि जहां तक संभव होगा प्रवेश परीक्षाओं की तिथियों को ध्यान में रखकर तिथि तय की जाएगी। अदालत ने कहा कि किसी भी स्थिति में जो लोग जुलाई में परीक्षा में शामिल नहीं हो सकते वे सितंबर शामिल हो सकते हैं।
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